16 June AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢

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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

16 जून – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 16 जून है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"बढ़े चलो, सब कुछ सही समय पर आपके पास आ जाएगा।
Keep going Everything will come to you at the perfect time."

यह वाक्य धैर्य, आशा और विश्वास का संदेश देता है। इसका अर्थ है कि हमें अपने लक्ष्यों और सपनों के लिए प्रयास करते रहना चाहिए, भले ही हमें तुरंत सफलता न मिले। सही समय आने पर, हमारी मेहनत और लगन रंग लाएगी और हमें वह सब मिलेगा जिसकी हम कामना करते हैं।

यह वाक्य हमें यह विश्वास दिलाता है कि यदि हम धैर्य रखें, आशावादी रहें, कड़ी मेहनत करें, अपनी क्षमताओं पर यकीन करें और सही समय का इंतजार करें तो हम निश्चित रूप से सफल होंगे।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है:
Eloquent जिसका अर्थ होता है वाकपटु या प्रभावशाली और स्पष्ट बोलने या लिखने की कला।

वाक्य प्रयोग: The leader gave an eloquent speech that inspired the entire audience.
नेता ने एक प्रभावशाली भाषण दिया जिसने पूरे श्रोताओं को प्रेरित किया।

🧩 आज की पहेली
ऐसी कौन सी चीज है, जो जगे रहने पर ऊपर रहती है और सो जाने पर नीचे रहती है ?

उत्तर - पलक
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 16 जून की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 16 जून, 1911 को, कम्प्यूटिंग-टैबुलेटिंग-रिकॉर्डिंग कंपनी CTR की स्थापना न्यूयॉर्क, अमेरिका में हुई, जो बाद में 1924 में IBM बन गई। यह सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में अग्रणी कंपनियों में से एक है, जो कंप्यूटर हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर और सेवाओं में विशेषज्ञता रखती है।
  • 16 जून, 1963 को, सोवियत अंतरिक्ष यात्री वलेन्टीना तेरेश्कोवा अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने वॉस्टोक 6 यान से 48 बार पृथ्वी की परिक्रमा की और अंतरिक्ष अन्वेषण में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
  • 16 जून, 1976 को, दक्षिण अफ्रीका के सोवेटो में छात्रों ने अफ्रीकांस भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। इस घटना को "सोवेटो विद्रोह" के नाम से जाना जाता है और दक्षिण अफ्रीका में हर साल 16 जून को "युवा दिवस" के रूप में मनाया जाता है।
  • 16 जून, 1925 को, सुप्रसिद्ध भारतीय नेता, राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास का कोलकाता में निधन हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के "स्वराज" और 'असहयोग आंदोलन' के प्रमुख नेताओं में से एक थे।
  • 16 जून, 1903 को, हेनरी फोर्ड ने फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना की, जिसने ऑटोमोबाइल उद्योग में क्रांति ला दी और मॉडल टी जैसी कारों के साथ बड़े पैमाने पर उत्पादन की शुरुआत की।
  • 16 जून, 1858 को, अब्राहम लिंकन ने अपने प्रसिद्ध "हाउस डिवाइडेड" भाषण दिया, जिसमें उन्होंने अमेरिका में गुलामी के मुद्दे पर चेतावनी दी कि "एक विभाजित घर खड़ा नहीं रह सकता।"
  • 16 जून, 2010 को: भूटान तंबाकू की बिक्री और धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बना।
  • 16 जून, 1884 को, रोलर कोस्टर का पहला व्यावसायिक संचालन अमेरिका के कोनी आइलैंड, न्यूयॉर्क में शुरू हुआ, जिसे "स्विचबैक रेलवे" कहा जाता था।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – देशबंधु चित्तरंजन दास

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे "महान स्वतंत्रता सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास" के बारे में।

चित्तरंजन दास एक महान स्वतंत्रता सेनानी, कुशल राजनीतिज्ञ, प्रसिद्ध वकील और निर्भीक पत्रकार थे। उन्हें सम्मानपूर्वक 'देशबंधु' कहा जाता है, जिसका अर्थ है "देश का मित्र"। वे कलकत्ता उच्च न्यायालय के प्रतिष्ठित वकीलों में से एक थे और उन्होंने अलीपुर बम कांड में क्रांतिकारी अरविन्द घोष की सफल पैरवी की थी।

उनका जन्म 5 नवम्बर 1870 को कोलकाता के एक समृद्ध और शिक्षित परिवार में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज, कोलकाता से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके पश्चात वे इंग्लैंड गए, जहाँ उन्होंने विधि की शिक्षा ग्रहण की। भारत लौटने पर वे शीघ्र ही एक सफल और प्रसिद्ध वकील बन गए।

महात्मा गांधी के 'असहयोग आंदोलन' से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी वकालत छोड़ दी और अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा मेडिकल कॉलेज तथा महिला अस्पताल को दान में दे दिया। 1920 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ गए और शीघ्र ही इसके प्रमुख नेताओं में गिने जाने लगे। 1922 में वे बंगाल प्रांतीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए।

स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा देने हेतु 1 जनवरी 1923 को उन्होंने मोतीलाल नेहरू के साथ मिलकर 'स्वराज पार्टी' की स्थापना की। देशबंधु दास शिक्षा और सामाजिक सुधारों के भी प्रबल पक्षधर थे। उन्होंने 1921 में 'विद्यापीठ' नामक एक राष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की।

देशबंधु चित्तरंजन दास न केवल एक निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि एक प्रेरक वक्ता, दूरदर्शी नेता और समाज सुधारक भी थे। वे आज भी हम सबके लिए प्रेरणा के स्रोत हैं और उनका भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

🎉 आज का दैनिक विशेष – पारिवारिक प्रेषण का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 16 जून को मनाये जाने वाले "पारिवारिक प्रेषण का अंतर्राष्ट्रीय दिवस" के बारे में:

"पारिवारिक प्रेषण का अंतर्राष्ट्रीय दिवस" यानी International Day of Family Remittances हर वर्ष 16 जून को मनाया जाता है। इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1 जून 2018 को मान्यता मिली और 16 जून 2019 को इसे पहली बार आयोजित किया गया। यह पहल अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष IFAD और विश्व बैंक जैसे वैश्विक संगठनों के सहयोग से शुरू की गई थी।

इसका उद्देश्य प्रवासी श्रमिकों द्वारा अपने परिवारों और समुदायों को भेजे गए धन यानी प्रेषण के महत्व को रेखांकित करना है। इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य प्रेषण के आर्थिक और सामाजिक योगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस सतत विकास लक्ष्यों SDGs, जैसे गरीबी उन्मूलन SDG 1 और आर्थिक असमानता में कमी SDG 10, में प्रेषण की भूमिका को उजागर करता है।

विश्व बैंक के अनुसार, वर्ष 2023 में वैश्विक प्रेषण प्रवाह लगभग 669 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें से अधिकांश धनराशि निम्न और मध्यम आय वाले देशों को प्राप्त हुई। यह राशि कई बार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश FDI से भी अधिक होती है। प्रेषण परिवारों को भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और आवास जैसी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता प्रदान करता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – तीन खरगोश

रितेश, तीसरी कक्षा का एक होनहार छात्र था, उसने अपने घर में तीन प्यारे से प्यारे खरगोश पाल रखे थे। वह उनसे बहुत प्यार करता था और उनकी देखभाल बड़े ही लाड़-प्यार से करता था। हर सुबह, स्कूल जाने से पहले, रितेश ताज़ी, हरी-भरी घास लाकर अपने खरगोशों को खिलाता था।

उनकी खुशी देखकर उसे भी खुशी होती। स्कूल से लौटने के बाद भी, वह सबसे पहले अपने खरगोशों के लिए घास लाता और उन्हें प्यार से खिलाता। एक दिन, रितेश को स्कूल के लिए देर हो गई। वह घबराया हुआ था और जल्दी-जल्दी तैयार हो रहा था। उसे अपने खरगोशों के लिए घास लाने का समय नहीं मिला।

वह उदास मन से स्कूल चला गया। स्कूल से लौटकर, रितेश अपने खरगोशों को ढूंढने लगा, लेकिन वे कहीं नहीं मिले। वह घबरा गया और उन्हें पूरे घर में ढूंढने लगा। उसने पड़ोसियों से भी पूछा, लेकिन कोई नहीं जानता था कि वे कहाँ गए हैं। रितेश की आँखों में आंसू आ गए और वह रोने लगा।

थोड़ी देर बाद, रितेश उदास मन से पार्क में जा बैठा। वहीं बैठे-बैठे, उसकी नज़र पार्क के एक कोने में पड़ी। वहां, उसे अपने तीनों खरगोश हरी-भरी घास खाते हुए और मस्ती से खेलते हुए दिखे। रितेश खुशी से झूम उठा। उन्हें देखकर उसे समझ आ गया कि उन्हें भूख लगी थी, इसलिए वे घास की तलाश में पार्क आए थे।

रितेश सोचने लगा, "जब मुझे भूख लगती है, तो मैं मां से खाना मांग लेता हूं। लेकिन इनके पास तो कोई माँ नहीं है।" उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसे अपने खरगोशों के लिए बहुत दुख हुआ। लेकिन साथ ही, उन्हें वापस पाकर उसे बहुत खुशी भी हुई।

यह कहानी बच्चों को दया, करुणा, जिम्मेदारी और धैर्य के महत्व के बारे में सिखाती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने में लापरवाही न बरतें। हमें अपने आस-पास के जीवों की परवाह और उनकी देखभाल करनी चाहिए। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना ही अच्छे चरित्र की पहचान है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में।
आपका दिन शुभ हो!

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