सुप्रभात बालमित्रों!
13 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 13 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है,
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे,
नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
विजेता अलग काम नही करते है वे कुछ अलग तरीके से करते है।
Winners don't do different things, they do things differently.
इस कथन का अर्थ है कि सफलता पाने वाले लोग कोई असा धारण या जादुई कार्य नहीं करते, बल्कि वे सामान्य कार्यों को अलग दृष्टिकोण और तरीके से करते हैं। विजेता अपने हर काम में नवाचार, समर्पण और उत्कृष्टता जोड़ते हैं। वे कठिनाइयों को अवसर में बदलना जानते हैं और हर कार्य को पूरी निष्ठा से करते हैं। उनका सोचने और काम करने का तरीका ही उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। वे छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देते हैं, निरंतर सुधार की कोशिश करते हैं और हार की स्थिति में भी धैर्य नहीं खोते। अर्थात, विजेता वही काम करते हैं जो बाकी सब करते हैं, लेकिन उनका तरीका, दृष्टिकोण और समर्पण उन्हें भीड़ से अलग बनाता है और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: ACHIEVE : अचीव: प्राप्त करना, हासिल करना या सफलता पाना: जिसका अर्थ है किसी लक्ष्य या उद्देश्य को मेहनत और प्रयास के माध्यम से हासिल करना।
वाक्य प्रयोग: Education helps us achieve our dreams. शिक्षा हमें अपने सपनों को हासिल करने में मदद करती है।
उत्तर: अवसर।
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 13 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1780: पंजाब के महान शासक महाराजा रणजीत सिंह का जन्म पाकिस्तान के गुजरांवाला में हुआ। वे 'शेर-ए-पंजाब' के नाम से प्रसिद्ध थे। उन्होंने सिख मिसलों को एकजुट कर एक शक्तिशाली साम्राज्य स्थापित किया, लाहौर को राजधानी बनाया और अंग्रेजों को अपने क्षेत्र से दूर रखा। उनका शासन धार्मिक सहिष्णुता और सैन्य कुशलता के लिए जाना जाता है।
- 1898: काली पूजा के अवसर पर स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता ने कलकत्ता अब कोलकाता में लड़कियों के लिए एक विद्यालय का उद्घाटन किया। यह भारतीय महिलाओं की शिक्षा में महत्वपूर्ण कदम था।
- 1927: न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी को जोड़ने वाली हॉलैंड टनल खोली गई। यह दुनिया की पहली वाहन टनल थी, जो हडसन नदी के नीचे से गुजरती है और आधुनिक इंजीनियरिंग का प्रतीक बनी।
- 1950: तिब्बत ने चीनी आक्रमण के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में अपील की। यह तिब्बत की स्वतंत्रता संघर्ष की शुरुआत थी।
- 1971: अमेरिकी अंतरिक्ष यान मेरिनर 9 मंगल ग्रह की कक्षा में पहुँचा। यह किसी अन्य ग्रह की कक्षा में प्रवेश करने वाला पहला मानव-निर्मित यान था। मिशन के दौरान इसने मंगल के 85% सतह का मानचित्रण किया, बड़े ज्वालामुखी- ओलंपस मॉन्स और विशाल घाटी- वैलेस मैरिनेरिस की खोज की।
- 1975: विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने एशिया को चेचक यानी स्मॉलपॉक्स मुक्त घोषित किया। यह वैश्विक स्वास्थ्य अभियान की बड़ी सफलता थी, जिसने 1980 तक चेचक को पूरी दुनिया से समाप्त कर दिया।
- 1985: कोलंबिया के नेवादो डेल रुइज़ ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ, जिससे लाहर यानी कीचड़ और मलबे की बाढ़ ने अरमेरो शहर को दफन कर दिया। इससे लगभग 23,000 लोग मारे गए। यह 20वीं शताब्दी की दूसरी सबसे घातक ज्वालामुखी आपदा थी।
- 1998: वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट ने 13 नवंबर को 'विश्व दयालुता दिवस' World Kindness Day के रूप में मनाना शुरू किया। यह दिन दयालुता को बढ़ावा देने और सामुदायिक सद्भावना के लिए मनाया जाता है।
- 2014: भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा ने कोलकाता के ईडन गार्डन्स में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच में 264 रन बनाए। यह वनडे क्रिकेट में व्यक्तिगत सर्वोच्च स्कोर का विश्व रिकॉर्ड है, जिसमें 33 चौके और 9 छक्के शामिल थे। भारत ने मैच 153 रनों से जीता।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “पंजाब के महान शासक महाराजा रणजीत सिंह” के बारे में।
महाराजा रणजीत सिंह पंजाब के महान और दूरदर्शी शासक थे। उनका जन्म 13 नवम्बर 1780 को गुजरांवाला में हुआ था। उनके पिता महा सिंह सुकरचकिया मिस्ल के प्रमुख थे। बचपन में चेचक के कारण उनकी एक आँख की रोशनी चली गई, फिर भी उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता अद्भुत थी। 1799 में उन्होंने लाहौर पर अधिकार कर लिया और 1801 में पंजाब के महाराजा बने। उन्होंने विभिन्न सिख मिस्लों को एकजुट कर शक्तिशाली सिख साम्राज्य की स्थापना की, जिसका विस्तार अफगानिस्तान की सीमा से लेकर सतलुज नदी तक था। वे एक कुशल, न्यायप्रिय और धार्मिक सहिष्णु शासक थे। उनकी सेना में सिखों के साथ-साथ हिंदू और मुसलमान भी शामिल थे, तथा उन्होंने यूरोपीय अधिकारियों की सहायता से सेना को आधुनिक बनाया। वे कला, संस्कृति और धर्म के संरक्षक भी थे। उनके आदेश से हरमंदिर साहिब - स्वर्ण मंदिर को सोने से मढ़वाया गया, जिससे वह “गोल्डन टेम्पल” के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 27 जून 1839 को लाहौर में उनका निधन हो गया, लेकिन वे आज भी पंजाब को एकजुट कर मजबूत और समृद्ध राज्य बनाने वाले महान शासक के रूप में याद किए जाते हैं।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 13 नवम्बर को मनाये जाने वाले “विश्व दयालुता दिवस” के बारे में:
विश्व दयालुता दिवस यानी वर्ल्ड काइंडनेस डे हर साल 13 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य दयालुता और सद्भावना के कार्यों को बढ़ावा देना है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को दयालुता के महत्व के बारे में जागरूक करना और समाज में अच्छे काम करने के लिए प्रेरित करना है। विश्व दयालुता दिवस की मनाने की शुरुआत साल 1998 में वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट संगठन द्वारा की गई थी, जिसकी स्थापना 1997 के टोक्यो सम्मेलन में दुनिया भर के दयालु संगठनों द्वारा की गई थी। यह दिवस दयालुता का एक वैश्विक उत्सव है जो सद्भावना और करुणा के प्रेरक कृत्यों को बढ़ावा देता है और हम सभी से दयालुता के एक छोटे कार्य द्वारा दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने का आग्रह करता है। दयालुता एक सार्वभौमिक भाषा है जो जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को जोड़ती है। यह दिन एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है कि, हमारे मतभेदों के बावजूद, हम सभी दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में योगदान दे सकते हैं।
शाम का समय था। गांव की चार औरतें कुएं पर पानी भरने आईं और अपना-अपना मटका भरकर बतियाने बैठ गईं। पहली औरत बोली, "भगवान मेरे जैसा लड़का सबको दे। उसका कंठ इतना सुरीला है कि सब उसकी आवाज सुनकर मुग्ध हो जाते हैं।" दूसरी बोली, "मेरा लड़का इतना बलवान है कि सब उसे आज के युग का भीम कहते हैं।" तीसरी औरत चुप कैसे रहती, वह बोली, "अरे! मेरा लड़का जो एक बार पढ़ लेता है, वह उसे उसी समय कंठस्थ हो जाता है।" यह सब सुनकर चौथी औरत ने कहा, "मैं क्या कहूँ, मेरा लड़का ना तो बलवान है और ना ही अच्छा गाता है।" यह सुनकर चारों ने मटके उठाए और अपने गांव की ओर चल दीं। तभी कानों में कुछ सुरीला सा स्वर सुनाई दिया। पहली स्त्री ने कहा, "देखा! मेरा पुत्र आ रहा है, वह कितना सुरीला गा रहा है।" पर उसने अपनी माँ को नहीं देखा और उनके सामने से निकल गया। कुछ दूर जाने पर एक बलवान लड़का वहाँ से गुजरा। दूसरी औरत ने कहा, "देखो! मेरा बलिष्ट पुत्र आ रहा है।" पर उसने भी अपनी माँ को नहीं देखा और सामने से निकल गया। कुछ दूर जाकर मंत्रों की ध्वनि उनके कानों में पड़ी। तीसरी औरत ने कहा, "देखो! मेरा बुद्धिमान पुत्र आ रहा है।" पर वह भी श्लोक कहते हुए वहाँ से निकल गया। तभी वहाँ से एक और लड़का निकला, वह चौथी स्त्री का पुत्र था। वह अपनी माता के पास आया और माता के सर पर से पानी का घड़ा ले लिया और गांव की ओर चल दिया। यह देख तीनों स्त्रियाँ चकित रह गईं, मानो उनको सांप सूंघ गया हो। वे तीनों उसे आश्चर्य से देखने लगीं। तभी वहाँ पर बैठी एक वृद्ध महिला ने कहा, "देखो, इसको कहते हैं सच्चा हीरा।" यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण और प्राथमिक ज्ञान वे मूल्य और संस्कार होते हैं जो हमें हमारे माता-पिता और परिवार से मिलते हैं। ये संस्कार हमें अच्छे और बुरे का फर्क सिखाते हैं, सही और गलत के बीच अंतर बताने में मदद करते हैं, हमें एक बेहतर इंसान बनाने का आधार प्रदान करते हैं और हमें सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







