सुप्रभात बालमित्रों!
12 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 12 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
जल्दी गुस्सा करना जल्द ही आपको मूर्ख साबित कर देगा।
A quick temper will make a fool of you soon enough.
गुस्सा एक ऐसी भावना है जो हमें सोचने-समझने की शक्ति को क्षीण कर देती है और हमें ऐसे कार्य करने पर मजबूर कर देती है जिनका हमें बाद में पछतावा हो सकता है। गुस्से में लिए गए निर्णय अक्सर जल्दबाजी में और बिना सोच-विचार के होते हैं, जिससे हम गलतियां कर बैठते हैं। गुस्सा हमारे रिश्तों को भी प्रभावित करता है। गुस्से में कहे गए शब्द और किए गए कार्य अक्सर हमारे प्रियजनों के साथ रिश्तों में दरार डाल सकते हैं। गुस्सा मानसिक तनाव और उच्च रक्तचाप जैसी शारीरिक समस्याओं का कारण भी बन सकता है। गुस्से में किए गए कार्य हमारी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे लोग हमें अपरिपक्व और अविश्वसनीय मान सकते हैं। इसलिए, किसी भी परिस्थिति में हमें शांति और धैर्य से काम लेना चाहिए। यह न केवल हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि हमारे रिश्तों और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी मजबूत बनाता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: "Absorb" : अब्सॉर्बः अवशोषित करना। अवशोषित करना का अर्थ है किसी पदार्थ को सोख लेना या अपने अंदर समाहित करना।
वाक्य प्रयोग: Plants absorb sunlight to make their food. पौधे अपना भोजन बनाने के लिए सूर्य का प्रकाश अवशोषित करते हैं।
उत्तर पानी
v अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 12 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1847: ब्रिटेन के चिकित्सक सर जेम्स यंग सिंप्सन ने पहली बार क्लोरोफॉर्म को बेहोशी की दवा के रूप में सफलतापूर्वक प्रयोग किया। इससे सर्जरी में क्रांति आई।
- 1896: पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी डॉ. सालिम अली का जन्म। वे 'भारत के बर्डमैन' कहे जाते हैं। उनकी किताब 'द बुक ऑफ इंडियन बर्ड्स' प्रसिद्ध है। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया। डॉ. सालिम अली का जन्मदिन पक्षी संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के लिए मनाया जाता है। भारत में कई पक्षी अभयारण्य उनके योगदान से प्रेरित हैं।
- 1918: प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया एक गणतंत्र देश बना।
- 1930: लंदन में पहला गोलमेज सम्मेलन शुरू हुआ। इसमें 56 भारतीय और 23 ब्रिटिश प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने बहिष्कार किया।
- 1936 में ट्रावणकोर के महाराजा चिथिरा थिरुनाल बालरामा वर्मा ने ‘मंदिर प्रवेश उद्घोषणा’ जारी कर केरल के सभी मंदिरों को सभी जातियों के हिंदुओं के लिए खोल दिया।
- 1946: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्थापक और भारत रत्न से सम्मानित पंडित मदन मोहन मालवीय का वाराणसी उत्तर प्रदेश में निधन। वे 'महामना' के नाम से विख्यात थे और स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद् तथा कांग्रेस अध्यक्ष रहे।
- 1956: मोरक्को, सूडान और ट्यूनिशिया संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुए।
- 1974: दक्षिण अफ्रीका को नस्लीय भेदभाव यानी अपार्थाइड नीतियों के कारण संयुक्त राष्ट्र महासभा से निलंबित किया गया।
- 2008: परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम K-15 मिसाइल सागरिका का बालासोर ओडिशा से सफल परीक्षण। यह भारत की जलसेना की ताकत बढ़ाने वाला था।
- 2008: भारत का पहला मानव रहित अंतरिक्ष यान 'चंद्रयान-1' चंद्रमा की अंतिम कक्षा में स्थापित हुआ। इससे चंद्रमा पर पानी की खोज हुई।
- 2009: भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के 'अतुल्य भारत' अभियान को वर्ल्ड ट्रेवल अवार्ड-2009 से सम्मानित किया गया।
v अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे प्रमुख नेता, समाज सुधारक, और शिक्षाविद् “पंडित मदन मोहन मालवीय” के बारे में।
पंडित मदन मोहन मालवीय भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता, समाज सुधारक, शिक्षाविद् और महान देशभक्त थे। उनका जन्म 25 दिसंबर 1861 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तब इलाहाबाद में हुआ था। वे बचपन से ही अत्यंत प्रतिभाशाली और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे।
मालवीय जी ने शिक्षा को समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम माना। उन्होंने वर्ष 1916 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय BHU की स्थापना की, जो आज भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है। उनका उद्देश्य था कि भारतीय युवक आधुनिक शिक्षा प्राप्त करें और देश के विकास में योगदान दें।
वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चार बार अध्यक्ष रहे और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं की रक्षा के लिए जीवनभर प्रयास किया। मालवीय जी का व्यक्तित्व सत्य, अहिंसा, सादगी और देशभक्ति से प्रेरित था। पंडित मदन मोहन मालवीय ने शिक्षा और राष्ट्रसेवा को अपना जीवन उद्देश्य बनाया।
भारत सरकार ने उनके योगदान को सम्मानित करते हुए उन्हें मरणोपरांत “भारत रत्न” की उपाधि से सम्मानित किया। वे सच्चे अर्थों में भारत माता के सपूत और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 12 नवम्बर को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय पक्षी दिवस” के बारे में:
प्रत्येक वर्ष देश भर में 12 नवम्बर को भारत के प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी डॉ. सालिम अली के जन्मदिवस के अवसर पर राष्ट्रीय पक्षी दिवस मनाया जाता है। डॉ॰ सलीम अली को भारत में 'Birdman' के नाम से भी जाना जाता था। डॉ. सालिम ने असामान्य रंग की गौरैया की पहचान की थी। इनके नाम पर कोयम्बटूर के निकट 'अनाइकट्टी' नामक स्थान पर सालिम अली पक्षीविज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास केन्द्र स्थापित किया गया है। डॉ॰ सलीम अली ने पक्षियों से जुड़ी कई किताबें लिखी थीं, जिनमें से सबसे लोकप्रिय किताब 'बर्ड्स ऑफ़ इंडिया' है। डाक विभाग ने डॉ॰ सलीम अली की याद में डाक टिकट भी जारी किया है। साल 1958 में डॉ॰ सलीम अली को पद्मभूषण और 1976 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। राष्ट्रीय पक्षी दिवस पर लोग पक्षियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए कई तरह की गतिविधियां करते हैं, पक्षियों को गोद लेते हैं, बर्ड वाचिंग करते हैं, पक्षियों के बारे में अध्ययन करते हैं और दूसरों को शिक्षित करते हैं। यह दिवस पक्षियों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद है कि लोग पक्षियों को पकड़कर घरों में शोपीस के रूप में न रखें, बल्कि उन्हें आज़ादी से जीने दें।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “राजा का चुनाव”
चन्दन वन का राजा शेर बहुत बूढ़ा हो चुका था। अब वह जंगल पर शासन करने में सक्षम नहीं था, जिससे पूरे वन में अव्यवस्था और अशांति फैल गई। एक दिन शेर ने सभी जानवरों को बुलाकर कहा, “अब मैं वृद्ध हो गया हूँ, इसलिए तुम सब मिलकर कोई योग्य राजा चुन लो जो जंगल की व्यवस्था संभाल सके।”
सभी जानवर एकत्र हुए, लेकिन हर कोई स्वयं को राजा बनने योग्य समझता था। काफी बहस के बाद भी कोई निर्णय नहीं हो पाया। तभी चतुर खरगोश चंदू ने एक सुझाव दिया — “हर जानवर को उसकी क्षमता के अनुसार एक कार्य दिया जाए। दस दिन बाद जब हम दोबारा मिलेंगे, तब यह देखा जाएगा कि किसने अपना काम सबसे अच्छे ढंग से किया। वही राजा बनने के योग्य होगा।”
सभी ने यह प्रस्ताव स्वीकार किया। सभी जानवरों को उनके कार्य सौंप दिए गए। मोटू हाथी को बड़े-बड़े पत्थरों को एक गड्ढे में डालने की जिम्मेदारी मिली। दस दिन बीत गए और सभी अपने कार्य की समीक्षा के लिए एकत्र हुए। सबने देखा कि केवल मोटू हाथी ने अपना कार्य पूरा नहीं किया था। सभी यह सोचकर हैरान थे कि अब क्या किया जाए।
तभी पक्षीराज गरुड़ ने मतदान करने का सुझाव दिया। मतदान हुआ और सबसे अधिक मत मोटू हाथी को ही मिले। सब अचंभित थे — जिसने काम पूरा ही नहीं किया, उसे सबसे अधिक वोट कैसे मिल गए? उसी समय एक छोटी चिड़िया बोली, “मोटू हाथी ने अपने काम को इसलिए अधूरा छोड़ा क्योंकि गड्ढे के पास ही वह पेड़ था, जिस पर मेरे अंडे थे। यदि वह पत्थर डालता, तो मेरे अंडे नष्ट हो जाते। उसने अपने राजा बनने की चिंता किए बिना मेरे बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।”
सभी जानवरों ने यह सुनकर सहमति जताई और मोटू हाथी को चन्दन वन का नया राजा घोषित किया। उसके बाद जंगल में फिर कभी अशांति नहीं हुई। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा नेता वही होता है जो अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों की भलाई के बारे में सोचता है। निःस्वार्थ सेवा और संवेदनशीलता ही श्रेष्ठ नेतृत्व के गुण हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







