12 March AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

12 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 12 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

"प्रतिदिन की छोटी-छोटी उपलब्धियों से मिलकर सफलता बनती है।" "Success consists of a series of little daily victories."

जब हम रोजाना छोटे कदम उठाते हैं और छोटे लक्ष्यों को पूरा करते हैं, तो वे धीरे-धीरे जुड़कर एक बड़ी सफलता का रूप ले लेते हैं। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति एक किताब लिखना चाहता है, तो रोजाना थोड़ा-थोड़ा लिखने से एक दिन पूरी किताब तैयार हो जाएगी। इसी तरह, अगर कोई फिट रहना चाहता है, तो रोजाना थोड़ा व्यायाम करने से उसकी सेहत में सुधार होगा।

छोटे लक्ष्यों को पूरा करने से हमें आत्मविश्वास मिलता है और हम बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ते हैं। रोजाना की छोटी जीत हमें निरंतर बने रहने के लिए प्रेरित करती है। साथ ही, बड़े लक्ष्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने से तनाव कम होता है और काम आसान लगने लगता है। इसलिए, सफलता पाने के लिए धैर्य और निरंतरता जरूरी है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: SAKE : सेक – जिसका अर्थ "हेतु", "खातिर", या "लिए" होता है। यह शब्द किसी उद्देश्य, कारण, या फायदे को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण: "She studies hard for the sake of her future." – "वह अपने भविष्य के हेतु कड़ी मेहनत से पढ़ती है।"

🧩 आज की पहेली
ऐसी कौन सी चीज है जो है तो आपकी पर उसे दूसरे लोग इस्तेमाल करते है ?

Ans. आपका नाम
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 12 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1919: यशवंतराव चव्हाण का जन्म हुआ, जो बाद में महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री और भारत के पांचवें उप प्रधानमंत्री बने।
  • 1930: महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी मार्च की शुरुआत की। यह यात्रा अंग्रेजों के नमक कानून को तोड़ने और भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
  • 1954 - भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय साहित्य संस्थान (साहित्य अकादमी) की स्थापना की गई।
  • 1959: को हज़ारों तिब्बती महिलाओं ने ल्हासा में चीनी सरकार के खिलाफ विद्रोह किया। वे पोटाला पैलेस के सामने एकत्रित हुईं और ल्हासा की सड़कों पर जुलूस निकाला। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए हर साल 12 मार्च को तिब्बती महिला विकास दिवस मनाया जाता है।
  • 1992: मारिशस को आधिकारिक तौर पर एक गणराज्य घोषित किया गया।
  • 1993: मुंबई में हुए बम धमाकों में 257 लोग मारे गए और 800 से अधिक घायल हुए। यह घटना भारत के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में याद की जाती है, जिसने आतंकवाद के खतरे को उजागर किया।
  • 1999 - नाटो का विस्तार: पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य नाटो (NATO) के सदस्य बने। 
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – यशवंतराव चव्हाण

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “यशवंतराव चव्हाण” के बारे में।

यशवंतराव बलवंतराव चव्हाण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी और एक प्रमुख राजनीतिज्ञ थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था। उन्होंने महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 1957 में वे बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री बने और 1 मई 1960 को महाराष्ट्र के पहले मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने राज्य के विकास में अहम योगदान दिया। उन्होंने सहकारी आंदोलन को बढ़ावा देकर किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। 1970 से 1974 तक वे भारत के वित्त मंत्री रहे और 1979 में उप प्रधानमंत्री बने। उन्होंने सामाजिक लोकतंत्र और किसानों के उत्थान के लिए कई पहल कीं।

यशवंतराव चव्हाण एक सशक्त नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक थे, जिनकी विरासत आज भी हमें प्रेरणा देती है। उनका जीवन और कार्य भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक मिसाल है।

🎉 आज का दैनिक विशेष – दांडी यात्रा

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे “दांडी यात्रा” के बारे में:

दांडी यात्रा, जिसे नमक सत्याग्रह या नमक मार्च के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इस यात्रा की शुरुआत 12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से की थी। यह यात्रा 6 अप्रैल, 1930 को दांडी पहुंची, जहां गांधी जी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के नमक कानून का विरोध किया। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों के नमक कानून को तोड़ना और भारतीयों को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित करना था।

दांडी यात्रा की कुल दूरी 388 किलोमीटर थी, जिसे गांधी जी और उनके 78 अनुयायियों ने पैदल तय किया। इस यात्रा ने पूरे देश में एक नई ऊर्जा का संचार किया और असहयोग आंदोलन को मजबूती दी। इस आंदोलन में महिलाओं, किसानों, श्रमिकों, छात्रों और व्यापारियों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया। इसके परिणामस्वरूप ब्रिटेन से होने वाला आयात काफी गिर गया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली।

दांडी यात्रा ने न केवल ब्रिटिश सरकार के खिलाफ जनता को एकजुट किया, बल्कि यह अहिंसक प्रतिरोध की शक्ति का भी प्रतीक बन गई। इस यात्रा के बाद कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया, लेकिन इससे आंदोलन और मजबूत हुआ। दांडी यात्रा ने भारतीयों को यह सिखाया कि छोटे-छोटे कदमों से भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। यह यात्रा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक अमर गाथा है, जो हमें साहस, एकता और अहिंसा का संदेश देती है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – "सड़क यहीं रहती है"

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "सड़क यहीं रहती है"

एक दिन शेखचिल्ली कुछ लड़कों के साथ अपने कस्बे के बाहर एक पुलिया पर बैठा था। तभी एक सज्जन शहर से आए और लड़कों से पूछने लगे, "क्यों भाई, शेख साहब के घर को कौन-सी सड़क जाती है?"

शेखचिल्ली के पिता को सब 'शेख साहब' कहते थे। उस गाँव में बहुत से शेख थे, परंतु 'शेख साहब' का नाम केवल चिल्ली के अब्बाजान के लिए ही प्रयोग होता था। वह व्यक्ति उन्हीं के बारे में पूछ रहा था। शेखचिल्ली को मजाक सूझा। उसने पूछा, "क्या आप यह पूछ रहे हैं कि शेख साहब के घर कौन-सा रास्ता जाता है?" "हाँ-हाँ, बिल्कुल!" उस व्यक्ति ने जवाब दिया।

शेखचिल्ली ने चुटकी लेते हुए कहा, "इन तीनों में से कोई भी रास्ता नहीं जाता।" "तो कौन-सा रास्ता जाता है?" "कोई नहीं।" व्यक्ति हैरान होकर बोला, "क्या कहते हो बेटे? शेख साहब इसी गाँव में रहते हैं न?" "हाँ, रहते तो इसी गाँव में हैं।" "मैं भी यही तो पूछ रहा हूँ कि कौन-सा रास्ता उनके घर तक जाएगा?"

शेखचिल्ली मुस्कुराया और बोला, "साहब, घर तक तो आप जाएंगे। यह सड़क और रास्ते यहीं रहते हैं और यहीं पड़े रहेंगे। ये बेचारे तो चल ही नहीं सकते। इसीलिए मैंने कहा था कि ये रास्ते, ये सड़कें कहीं नहीं जातीं। यहीं पर रहती हैं। मैं शेख साहब का बेटा चिल्ली हूँ। मैं वह रास्ता बताता हूँ, जिस पर चलकर आप घर तक पहुँच जाएंगे।"

शेखचिल्ली ने अपनी बुद्धिमत्ता और हास्य से एक साधारण सवाल को मजेदार बना दिया। यह हमें सिखाता है कि जीवन में हास्य और बुद्धिमत्ता का संतुलन जरूरी है। हमें जीवन में छोटी-छोटी बातों को भी हल्के-फुल्के अंदाज में लेना चाहिए और हर स्थिति में रचनात्मक सोच का प्रयोग करना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

निर्माता : प्रेम वर्मा, PS बैजनाथपुर जमुनहा

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