सुप्रभात बालमित्रों!
11 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 11 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"जोखिम उठाइये! पूरी जिंदगी एक जोखिम है। Take a chance! All life is a chance."
जीवन में जोखिम उठाना ही सफलता और नए अवसरों की कुंजी है। अगर हम हमेशा सुरक्षित रहने की कोशिश करेंगे, तो शायद ही कुछ नया सीखने या अनुभव करने का मौका पाएंगे। जोखिम उठाने से ही हम अपनी सीमाओं को पार करते हैं और अपने सपनों को हकीकत में बदलते हैं। जिंदगी अनिश्चितताओं से भरी है, और यही उसे रोमांचक बनाती है। हर कदम पर नए अनुभव, नई चुनौतियाँ और नई सीख मिलती है। इसलिए, डर को पीछे छोड़कर आगे बढ़िए, क्योंकि जोखिम उठाने वाले ही इतिहास रचते हैं।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: SAGE : सेज : ऋषि, मुनि, संत
उदाहरण : "ऋषि ने शांति का संदेश दिया।" "The sage shared a message of peace."
हरा हूँ पर पत्ता नहीं,
बूझो तो मेरा नाम सही।
जवाब - तोता
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 11 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1689: मराठा साम्राज्य के वीर योद्धा और छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज को औरंगज़ेब की सेना ने गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें यातनाएं दी गईं और 11 मार्च 1689 को उनका सिर कलम कर दिया गया।
- 1881: कोलकाता के टाउन हॉल में रामनाथ टैगोर की प्रतिमा स्थापित की गई — किसी भारतीय की पहली सार्वजनिक प्रतिमा।
- 1948: भारत के पहले आधुनिक पोत 'जल उषा' का विशाखापत्तनम में जलावतरण।
- 1999: इंफोसिस नेस्डैक में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी।
- 2020: WHO ने COVID-19 को वैश्विक महामारी घोषित किया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “संभाजी महाराज” के बारे में।
संभाजी महाराज मराठा साम्राज्य के दूसरे छत्रपति और छत्रपति शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनका जीवन वीरता, संघर्ष और बलिदान की एक अद्भुत गाथा है। संभाजी का जन्म 14 मई 1657 को पुरंदर किले में हुआ था। उन्हें बचपन से ही युद्ध कला, राजनीति और संस्कृति की शिक्षा दी गई। वह एक कुशल योद्धा और विद्वान थे, उन्होंने संस्कृत, मराठी और फारसी भाषाओं में महारत हासिल की।
संभाजी ने मुगल सम्राट औरंगज़ेब के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया। उन्होंने मुगलों की विशाल सेना के सामने डटकर मुकाबला किया और कई युद्धों में विजय प्राप्त की। उन्होंने गुरिल्ला युद्ध नीति का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया, जो उनके पिता शिवाजी महाराज की रणनीति थी। संभाजी ने मराठा साम्राज्य का विस्तार किया और पुर्तगालियों तथा सिद्दियों के खिलाफ भी सफल अभियान चलाए। साथ ही, उन्होंने मराठी साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा दिया और 'बुद्धभूषण' जैसे ग्रंथों की रचना की।
1689 में, संभाजी को औरंगज़ेब की सेना ने संगमेश्वर के पास धोखे से गिरफ्तार कर लिया। उन्हें क्रूर यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने इस्लाम कबूल करने से इनकार कर दिया। 11 मार्च 1689 को, उन्हें भीमा नदी के किनारे कोरेगांव में मार दिया गया। उनकी शहादत मराठा इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय है, जो वीरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
संभाजी महाराज ने भारतीय स्वाभिमान और स्वतंत्रता की मशाल जलाई और हमें साहस और बलिदान की प्रेरणा दी।
हर साल 11 मार्च को विश्व प्लंबिंग दिवस मनाया जाता है। प्लंबिंग हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग है, जो स्वच्छ जल की आपूर्ति और अपशिष्ट जल के निपटान को सुनिश्चित करता है।
विश्व प्लंबिंग परिषद WPC ने 2010 में इस दिवस की स्थापना की थी। यह संगठन जल संकट और स्वच्छता जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए काम करता है।
विश्व प्लंबिंग दिवस हमें प्लंबिंग पेशेवरों के प्रति आभार व्यक्त करने और जल संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक होने का अवसर प्रदान करता है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "कबूतर और मधुमक्खी"
एक जंगल में नदी किनारे एक पेड़ पर कबूतर रहता था। एक दिन, एक मधुमक्खी नदी में गिर गई और उसके पंख गीले हो गए। वह बाहर निकलने की कोशिश करती रही, लेकिन असफल रही। जब उसे लगा कि अब वह डूब जाएगी, तो उसने मदद के लिए आवाज़ लगाई। पास के पेड़ पर बैठे कबूतर ने उसे देखा और एक तरकीब सोची। उसने एक पत्ता तोड़ा और उसे नदी में गिरा दिया। मधुमक्खी पत्ते पर बैठ गई और कुछ देर बाद उसके पंख सूख गए। वह उड़कर सुरक्षित दूर चली गई और कबूतर को धन्यवाद दिया।
कुछ दिनों बाद, जब कबूतर पेड़ पर गहरी नींद में सो रहा था, एक लड़का उसे गुलेल से मारने की कोशिश करने लगा। उसी समय वही मधुमक्खी वहां से गुजरी और उसने लड़के को देखा। मधुमक्खी ने तुरंत लड़के के हाथ पर डंक मार दिया। लड़के के चिल्लाने से कबूतर की नींद खुल गई और वह सुरक्षित बच गया। कबूतर ने मधुमक्खी को धन्यवाद दिया और दोनों खुशी-खुशी जंगल में उड़ गए।
यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद जरूर करनी चाहिए। जब हम किसी की मदद करते हैं, तो वह अच्छाई कभी न कभी हमारे पास लौटकर आती है और जब हम मिलकर काम करते हैं, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







