सुप्रभात बालमित्रों!
आज 12 जनवरी है
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 12 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं…
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"भाग्य अवसर और तैयारी के मिलन की बात है।" "Luck is a matter of preparation meeting opportunity."
भाग्य केवल अवसर मिलने का नाम नहीं है, बल्कि हमारी तैयारी और मेहनत के मिलने से ही सही मायने में भाग्य बनता है। जब हम किसी अवसर का सामना करते हैं, तो हमारी तैयारी और उसकी प्रबलता ही हमारे भाग्य को निर्धारित करती है। यदि हम कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ किसी चीज़ की तैयारी करते हैं, तो जब हमें अवसर मिलता है, तो हम उसे पूरी तरह से भुना सकते हैं। हमें अपने लक्ष्यों के लिए सदैव मेहनत और तैयारी करते रहना चाहिए, ताकि जब भी अवसर आए, हम उसे सफलता में बदल सकें। हमें हमेशा तैयार रहना चाहिए, क्योंकि अवसर किसी भी समय दस्तक दे सकता है। यदि हम तैयारी नहीं करते हैं, तो सबसे अच्छे अवसर भी हमारे हाथ से निकल सकते हैं।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: JUSTIFY : जस्टिफाई : उचित साबित करना
इसका मतलब है किसी बात, कार्य, या निर्णय को उचित और सही ठहराना। यह दिखाने या प्रमाणित करने के लिए कि किसी चीज का अस्तित्व या कार्रवाई सही, न्यायपूर्ण और उचित है।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :
उत्तर - कदम
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 12 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1528: स्वीडन के राजा गुस्ताव प्रथम गुस्ताव वासा का राज्याभिषेक हुआ, जिन्होंने स्वीडन को डेनमार्क के कलमार संघ से मुक्त कराया और देश में प्रोटेस्टेंट सुधारों की शुरुआत की।
- 1863: भारतीय दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु एवं पश्चिमी देशों में वेदांत और योग को पहुँचाने वाले स्वामी विवेकानंद का जन्म कलकत्ता अब कोलकाता में हुआ।
- 1934: चटगाँव शस्त्रागार लूट मामले के महान क्रांतिकारी “मास्टरदा” सूर्य सेन को ब्रिटिश सरकार ने चटगाँव जेल में फाँसी दी।
- 1984: भारत सरकार ने स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन 12 जनवरी को प्रतिवर्ष “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रूप में मनाने की आधिकारिक घोषणा की।
- 2018: इसरो ने PSLV-C40 मिशन के माध्यम से अपना 100वाँ उपग्रह कार्टोसैट-2 सीरीज सहित कुल 31 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया।
अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व 'स्वामी विवेकानन्द’ के बारे में।
स्वामी विवेकानन्द (1863-1902) एक महान योगी और दार्शनिक थे। उनके जीवन और शिक्षाओं ने भारतीय समाज को एक नई दिशा दी। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को बंगाल प्रांत में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय योग और ध्यान के अध्ययन में बिताया। उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनके शिष्यों को योग और ध्यान की शिक्षाएँ सिखाना था।
स्वामी विवेकानन्द ने योग और ध्यान के अध्ययन को विश्वसनीय रूप से विकसित किया। उन्होंने योग को एक आरामदायक और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में पेश किया। उनके शिक्षाओं में योग के विभिन्न आसन, प्राणायाम, और मन्त्रों का उपयोग शामिल था।
स्वामी विवेकानन्द ने 1 मई 1897 को रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इसका मुख्यालय पश्चिम बंगाल, भारत के बेलूर मठ में स्थित है। उनके योगदान ने भारतीय समाज को एक नई दिशा दी। उनके शिष्यों ने उनकी शिक्षाओं को विश्वभर में प्रसारित किया, जिससे योग और ध्यान की लोकप्रियता बढ़ी।
स्वामी विवेकानन्द का जीवन और उनकी शिक्षाएँ हमें आत्मानुशासन, ध्यान और योग के महत्व को समझने में मदद करती हैं। उनका जीवन सच्चे भारतीय मूल्यों और दर्शन का प्रतीक है।
आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 12 जनवरी को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय युवा दिवस” के बारे में:
भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन स्वामी विवेकानन्द के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिनकी शिक्षाएँ और आदर्श युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। 1984 में भारत सरकार ने उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया और 1985 से इस दिन को मनाना शुरू किया गया।
राष्ट्रीय युवा दिवस का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानन्द के आदर्शों और विचारों से प्रेरित करना और उन्हें देश की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है। स्वामी विवेकानन्द ने अपने जीवनकाल में युवाओं के विकास और उनकी शिक्षा पर बहुत जोर दिया था। इस दिन को विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के माध्यम से मनाया जाता है, जिनमें शैक्षिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक कार्यक्रम, समाज सेवा और खेल प्रतियोगिताएँ शामिल हैं। स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान, सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है। युवाओं को समाज सेवा और स्वेच्छा गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता है।
स्वामी विवेकानन्द के विचार और शिक्षाएँ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणादायक हैं और राष्ट्रीय युवा दिवस के माध्यम से उन्हें याद किया जाता है।
अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है:
“मूर्ख साधू और ठग”
एक बार की बात है, एक गांव में साधु बाबा रहा करते थे। पूरे गांव में वे अकेले साधु थे और उन्हें दान में बहुत सारा धन मिलता था। वहीं, एक ठग की नजर साधु बाबा के धन पर थी और वह किसी भी प्रकार से उसे हड़पना चाहता था। ठग ने योजना बनाई और एक विद्यार्थी का रूप धारण कर साधु के पास पहुंच गया। वह साधु के साथ मंदिर में रहने लगा और उनकी सेवा करने के साथ-साथ मंदिर की देखभाल भी करने लगा। ठग की सेवा से साधु खुश हो गए, लेकिन फिर भी उन्होंने उस पर पूरी तरह विश्वास नहीं किया।
एक दिन साधु को किसी दूसरे गांव से निमंत्रण मिला और वह शिष्य के साथ जाने के लिए तैयार हो गए। साधु ने अपने धन को एक पोटली में बांध लिया। रास्ते में उन्हें एक नदी मिली, साधु ने सोचा कि क्यों न गांव में प्रवेश करने से पहले नदी में स्नान कर लिया जाए। साधु ने अपने धन को एक कंबल में छुपा दिया और ठग से उसकी देखभाल करने को कहा।
ठग की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसे जिस मौके की तलाश थी, वो मिल गया। जैसे ही साधु ने नदी में डुबकी लगाई, ठग सारा सामान लेकर भाग गया। साधु जब वापस आए, तो उन्होंने देखा कि न तो शिष्य था और न ही उनका सामान। यह देखकर साधु ने अपना सिर पकड़ लिया।
इस कहानी से यह सीख मिलती है कि कभी भी लालच नहीं करना चाहिए और न ही किसी की चिकनी-चुपड़ी बातों पर विश्वास करना चाहिए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!





