11 September AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









5 IMAGES INSIDE THIS BOX ]

आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

11 सितम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 11 सितम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "बेशुमार सफ़लता सर्वोत्तम प्रतिशोध है।"
The best revenge is massive success.

यह कथन हमें बताता है कि अगर कोई तुम्हारा मजाक उड़ाए, तुम्हें नीचा दिखाए या तुम्हें नुकसान पहुंचाए, तो उसका जवाब देने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी मेहनत और लगन से सफल होना। बदला लेने की सोच में समय बर्बाद करने के बजाय, अपने सपनों और लक्ष्यों पर ध्यान दो। जब तुम सफल हो जाओगे, तो तुम्हारी मेहनत और उपलब्धियां सबको दिखा देंगी कि तुम कितने काबिल हो। इससे तुम्हें खुशी भी मिलेगी और तुम दूसरों को भी प्रेरित करोगे।

मान लो कोई कहता है कि तुम पढ़ाई में अच्छे नहीं हो। उसका जवाब यह नहीं कि तुम उससे लड़ो, बल्कि यह है कि तुम मेहनत करो, अच्छे नंबर लाओ, और अपनी काबिलियत साबित करो। यही सच्ची जीत है! इसलिए, हमेशा सकारात्मक रहो, अपने लक्ष्यों पर काम करो, और अपनी सफलता से दुनिया को जवाब दो।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है : MARGIN : किनारा, अंतर, नफ़ा और गुंजाइश, या पन्ने का हाशिया। Margin के कई अर्थ होते हैं, जो प्रसंग यानी Context के अनुसार बदलते हैं।

वाक्य प्रयोग: Their profit margin in this business is very high. इस व्यापार में उनका मार्जिन बहुत अच्छा है।

🧩 आज की पहेली
काला काला गोल तवे सा, रोटी नही पकाऊ, सुई के तन मे चुभते ही गाना तुम्हे सुनाऊ।
उत्तर सही जवाब: ग्रामोफोन

ग्रामोफोन एक ऐसा यंत्र है जिसका उपयोग ध्वनि रिकॉर्ड करने और बजाने के लिए होता था। यह एक समय में संगीत सुनने का सबसे लोकप्रिय तरीका था।

📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 11 सितम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1609: हेनरी हडसन ने न्यूयॉर्क में मैनहट्टन द्वीप की खोज की, जो न्यूयॉर्क शहर के विकास का आधार बना।
  • 1893: शिकागो में विश्व धर्म संसद की पहली बैठक हुई, जहाँ स्वामी विवेकानंद ने अपने ऐतिहासिक भाषण से भारतीय संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों” से की, जिससे उन्हें बहुत सराहना मिली। उनके विचारों ने भारतीय संस्कृति और धर्म को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया और उन्हें एक महान आध्यात्मिक नेता के रूप में स्थापित किया।
  • 1895: स्वतंत्रता सेनानी और भूदान आंदोलन के प्रणेता, विनोबा भावे, का जन्म महाराष्ट्र के रायगढ़ में हुआ।
  • 1906: महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेदी कानूनों के खिलाफ सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया।
  • 1948: मुहम्मद अली जिन्ना, पाकिस्तान के संस्थापक और प्रथम गवर्नर-जनरल, का निधन कराची में हुआ।
  • 1961: विश्व वन्यजीव कोष WWF की स्थापना स्विट्जरलैंड के ग्लैंड में हुई।
  • 1965: भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना ने पंजाब के बटाला और डेरा बाबा नानक पर कब्जा किया।
  • 2001: अल-कायदा के आतंकवादियों ने न्यूयॉर्क के विश्व व्यापार केंद्र और पेंटागन पर विमान हमले किए, जिसमें लगभग 2,977 लोग मारे गए।
  • 2007: रूस ने विश्व का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम "फादर ऑफ ऑल बम्स" का सफल परीक्षण किया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – विनोबा भावे

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और समाज सुधारक “विनोबा भावे” के बारे में।

विनोबा भावे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी, सामाजिक सुधारक और मानवतावादी थे। उनका जन्म 11 सितंबर 1895 को महाराष्ट्र के गोरखापुर जिले में हुआ था। वे महात्मा गांधी के अनुयायी थे और सत्य, अहिंसा तथा आत्म-निर्भरता के सिद्धांतों का जीवनभर पालन किया।

स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के साथ ही उन्होंने ग्रामीण विकास और सामाजिक सुधारों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे भूदान आंदोलन के प्रवर्तक थे, जिसमें उन्होंने संपन्न ज़मीनदारों से भूमि लेने और उसे गरीब किसानों में बाँटने की पहल की। उनका उद्देश्य समाज में आर्थिक और सामाजिक समानता लाना था।

विनोबा भावे ने शिक्षा, ग्रामोद्योग और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए। उन्होंने समाज के सबसे कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए कड़ी मेहनत और संघर्ष किया। उनके प्रयासों में कई कठिनाइयाँ और बाधाएँ आईं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें भारत रत्न 1983 प्रमुख है। विनोबा भावे का जीवन साधुता, त्याग और सेवा का उदाहरण है। उन्होंने 15 नवंबर 1982 को पुणे में अंतिम सांस ली। विनोबा भावे का जीवन हमें यह सिखाता है कि अहिंसा, सेवा और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलकर ही समाज में असली बदलाव लाया जा सकता है।

🌳 आज का दैनिक विशेष – राष्ट्रीय वन शहीद दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 11 सितम्बर को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय वन शहीद दिवस” के बारे में:

राष्ट्रीय वन शहीद दिवस हर साल 11 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन उन वन रक्षकों और अधिकारियों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है जिन्होंने जंगलों, वन्य जीवों और पर्यावरण की सुरक्षा के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में जंगलों और वन्य जीवन के संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

इस दिन का ऐतिहासिक महत्व 11 सितंबर 1730 से जुड़ा है। राजस्थान के जोधपुर जिले के खेजड़ली गांव में उस समय के शासक ने किले के निर्माण के लिए लकड़ी की आवश्यकता के चलते खेजड़ी के पेड़ों को काटने का आदेश दिया। गाँव की महिला अमृता देवी बिश्नोई ने पेड़ों को काटने का विरोध किया और खुद पेड़ों के सामने खड़ी हो गईं। सैनिकों ने जब पेड़ काटने की कोशिश की, तो अमृता देवी की हत्या कर दी गई।

अमृता देवी की बहादुरी से प्रेरित होकर उनके तीन सौ से अधिक गांव वालों ने भी पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। जब यह नरसंहार राजा तक पहुँचा, तो उन्होंने तुरंत अपने सैनिकों को पीछे हटने का आदेश दिया और बिश्नोई समुदाय से माफी मांगी। इसके साथ ही महाराजा अभय सिंह ने घोषणा की कि बिश्नोई गांवों के आसपास पेड़ों की कटाई और जानवरों की हत्या नहीं की जाएगी।

साल 2013 में भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय ने 11 सितंबर को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तब से यह दिवस हर साल मनाया जाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीवों की सुरक्षा और वनों की रक्षा में लगे लोगों के समर्पण और बलिदान को याद किया जा सके।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – दर्द क्या है?

एक बार बहुत से लोगों ने एक सभा का आयोजन किया, जिसका विषय था – "दर्द क्या है?" सभा में हर कोई अपनी-अपनी राय देने के लिए स्वतंत्र था।

सबसे पहले एक डॉक्टर साहब खड़े हुए और बोले – "दर्द मांसपेशियों में खिंचाव या चोट लगने से उत्पन्न होता है।" फिर एक कवि बोले – "दर्द वह अहसास है, जब दिल को कविता न मिल पाए।" एक लेखक ने कहा – "बहुत मेहनत से लिखा गया लेख, और उस पर नकारात्मक टिप्पणी मिलना ही सच्चा दर्द है।" एक विचारक बोले – "दर्द वह है जो आनंद न मिलने पर महसूस होता है।" एक अभिनेता ने कहा – "दर्द तब होता है जब फिल्म पहले हफ्ते में ही फ्लॉप हो जाए।" एक छात्र बोला – "दर्द परीक्षा में असफल होने पर होता है।" एक शराबी बोला – "दर्द तब होता है जब शराब की बोतल टूट जाए।" एक महिला बोली – "दर्द तब होता है जब मैं महँगी साड़ी खरीदूँ और मेरी पड़ोसन वही साड़ी कम दाम में ले आए।"

हर कोई अपने-अपने अनुभव के आधार पर दर्द की अलग-अलग परिभाषा दे रहा था। कई घंटे बीत गए। तभी ताऊ जी से रहा नहीं गया। उन्होंने पास रखा लट्ठ उठाया और सब पर बरसाना शुरू कर दिया। जब सब चिल्लाने लगे, तो ताऊ जी बोले – "अब दर्द समझ में आया, या फिर से बताऊँ?" सब एक स्वर में बोले – "नहीं-नहीं, हमें समझ में आ गया।" तब ताऊ जी मुस्कराते हुए बोले – "जब तक दर्द खुद महसूस नहीं होगा, तब तक कोई भी उसकी असली पहचान नहीं कर सकता।"

यह कहानी हमें बताती है कि दर्द एक व्यक्तिगत अनुभव है। हर व्यक्ति दर्द को अलग तरह से महसूस करता है और उसकी व्याख्या भी अलग-अलग तरीके से करता है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.