सुप्रभात बालमित्रों!
10 सितम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 10 सितम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है,
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में,
जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"पाप से नफरत करो, पापी से नहीं।"
"Hate the sin, not the sinner."
यह हमें सिखाती है कि किसी व्यक्ति को उसके कर्मों के लिए दोषी ठहराना तो चाहिए, लेकिन उससे नफरत नहीं करनी चाहिए। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो धर्म, दर्शन और नैतिकता के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक रूप से स्वीकृत है। हम अक्सर लोगों को उनके विचारों, धर्म या जाति के आधार पर नफरत करते देखते हैं। यह कथन हमें सिखाता है कि हमें गलतियों को दोष देना चाहिए, न कि लोगों को। यह हमें क्षमा करने, सहनशील होने और एक बेहतर समाज बनाने के लिए प्रेरित करता है।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Agreement: समझौता · किसी विषय पर दो या अधिक व्यक्तियों के बीच हुई सहमति। अथवा लिखित या मौखिक रूप से तय किया गया अनुबंध।
वाक्य प्रयोग: Both friends reached an agreement through mutual discussion. दोनों मित्रों ने आपसी बातचीत से समझौता कर लिया।
उत्तर: पानी पुरी की दूकान
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 10 सितम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1846: एलियस होवे ने सिलाई मशीन का पेटेंट कराया, जिसने कपड़ा उद्योग में क्रांति ला दी।
- 1858: जॉर्ज मेरी सारले ने क्षुद्रग्रह 55 पॉनडोरा की खोज की, जो खगोलीय अनुसंधान में महत्वपूर्ण था।
- 1872: रणजीत सिंह, भारतीय क्रिकेटर जिनके नाम पर रणजी ट्रॉफी है, का जन्म हुआ।
- 1887: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत का जन्म अल्मोड़ा में हुआ।
- 1892: नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी भौतिक विज्ञानी आर्थर कॉम्पटन का जन्म हुआ, जिन्होंने कॉम्पटन प्रभाव की खोज की।
- 1935: सतीश रंजन दास द्वारा भारत के प्रसिद्ध दून स्कूल की स्थापना देहरादून में की गई।
- 1965: परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद का भारत-पाक युद्ध में निधन हुआ।
- 1966: भारतीय संसद ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम पारित कर पंजाब और हरियाणा को दो अलग-अलग राज्यों में विभाजित किया।
- 1976: इंडियन एयरलाइंस के बोइंग 737 विमान का अपहरण हुआ और उसे लाहौर ले जाया गया।
- 2008: स्विट्जरलैंड के सर्न प्रयोगशाला में लार्ज हेड्रॉन कोलाइडर में पहला वैज्ञानिक प्रयोग शुरू हुआ।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद” के बारे में।
अब्दुल हमीद भारतीय सेना के ऐसे शूरवीर थे, जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया। उनका जन्म 1 जुलाई 1933 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में हुआ था। वे भारतीय सेना की ग्रेनेडियर रेजिमेंट में हवलदार के पद पर कार्यरत थे।
1965 के युद्ध में जब पाकिस्तान ने पैटन टैंकों से भारत पर आक्रमण किया, तब अब्दुल हमीद ने अपनी गन माउंटेड जीप से दुश्मन के कई टैंकों को नष्ट कर दिया। वे लगातार दुश्मनों का मुकाबला करते रहे और अपने साथियों का हौसला बढ़ाते रहे। इस दौरान उन्होंने असाधारण साहस दिखाते हुए दुश्मन के एक और टैंक को निशाना बनाया, लेकिन इसी संघर्ष में वे वीरगति को प्राप्त हुए।
उनकी इस शौर्यपूर्ण वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र प्रदान किया गया। अब्दुल हमीद आज भी देश के उन वीर सपूतों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 10 सितम्बर को मनाये जाने वाले “आत्महत्या रोकथाम दिवस” के बारे में:
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस यानी World Suicide Prevention Day हर साल 10 सितम्बर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आत्महत्या जैसी गंभीर समस्या के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को इसके रोकथाम के उपायों से अवगत कराना है। आत्महत्या आज विश्व स्तर पर एक बड़ी सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है।
आज की भागदौड़ और तनावपूर्ण जीवनशैली में कई लोग मानसिक दबाव, अवसाद, अकेलापन और निराशा के शिकार हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO के अनुसार, हर साल लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं, जिनमें से अधिकतर की उम्र 15 से 29 वर्ष के बीच होती है। कोरोना महामारी ने इस समस्या को और गहरा कर दिया। लॉकडाउन, आर्थिक तंगी और सामाजिक दूरी ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाला है।
इस दिवस की शुरुआत 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन IASP ने की थी। बाद में 2004 में WHO ने इसे औपचारिक रूप से प्रायोजित किया। तब से हर साल यह दिवस विभिन्न कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और कार्यशालाओं के माध्यम से मनाया जाता है।
किसी गाँव में एक बूढ़े व्यक्ति अपने बेटे और बहू के साथ रहते थे। परिवार सुखी-संपन्न था और किसी तरह की कोई परेशानी नहीं थी। बूढ़े पिता, जो कभी जवान और मजबूत थे, अब बुढ़ापे के कारण कमजोर हो गए थे। चलते समय वे लड़खड़ाते, लाठी का सहारा लेते और उनका चेहरा झुर्रियों से भर चुका था। अब वे बस अपना जीवन किसी तरह व्यतीत कर रहे थे।
एक शाम भोजन करते समय बूढ़े पिता के हाथ काँपने लगे। खाना उनके कपड़ों और ज़मीन पर गिरने लगा। यह देखकर बहू चिढ़कर बोली – “हे राम! कितनी गंदी तरह से खाते हैं। मन करता है इनकी थाली किसी कोने में रख दी जाए।” बेटे ने भी पत्नी की बात से सहमति जताई। यह सब घर का छोटा बच्चा मासूमियत से देख रहा था।
अगले दिन पिता की थाली टेबल से हटाकर कोने में रख दी गई। बूढ़े पिता की आँखें भर आईं, मगर उन्होंने कुछ नहीं कहा। वे रोज़ की तरह चुपचाप कोने में बैठकर भोजन करने लगे, और खाना इधर-उधर गिरता ही रहता।
बच्चा अपनी थाली छोड़कर लगातार दादा की ओर देखता रहा। माँ ने पूछा – “बेटा, तुम दादा जी की ओर क्यों देख रहे हो? खाना क्यों नहीं खा रहे?” बच्चा मासूम स्वर में बोला – “माँ, मैं सीख रहा हूँ कि जब आप बूढ़े हो जाओगे तो मैं भी आपको ऐसे ही कोने में खाना दूँगा।”
बच्चे की यह बात सुनकर बेटे और बहू के दिल काँप उठे। मासूम बच्चे ने उन्हें एक बहुत बड़ा सबक सिखा दिया। तुरंत बेटे ने आगे बढ़कर पिता को उठाया और उन्हें वापस टेबल पर बैठाया। बहू भी भागकर पानी का गिलास ले आई और प्यार से उनका ख्याल रखने लगी।
यह कहानी हमें बताती है कि बुजुर्ग हमारे अनुभव और ज्ञान के खजाने हैं। उनका सम्मान और देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। परिवार का असली सुख तभी है जब हम एक-दूसरे का ख्याल रखें, विशेषकर अपने वृद्ध माता-पिता का।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







