अध्याय 2.1 : भाषा अर्जन (Language Acquisition)

📖 भूमिका

जब एक शिशु जन्म लेता है, तब वह किसी भाषा को बोलना नहीं जानता। फिर भी कुछ वर्षों के भीतर वह अपने आसपास के लोगों की भाषा को समझने, बोलने तथा प्रयोग करने लगता है। आश्चर्य की बात यह है कि यह प्रक्रिया बिना किसी औपचारिक शिक्षण के स्वाभाविक रूप से घटित होती है। इसी स्वाभाविक प्रक्रिया को भाषा अर्जन कहा जाता है।

भाषा शिक्षाशास्त्र में भाषा अर्जन एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है क्योंकि यह बताती है कि बच्चे भाषा कैसे सीखते हैं। CTET, UPTET, KVS, DSSSB तथा अन्य शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में भाषा अर्जन से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।


🧠 मुख्य अवधारणा

भाषा अर्जन (Language Acquisition) वह स्वाभाविक एवं अवचेतन प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बालक अपने सामाजिक परिवेश में रहकर भाषा को सीखता है।

इस प्रक्रिया में भाषा सीखने के लिए किसी औपचारिक शिक्षण, व्याकरण अध्ययन या नियमों के विशेष अभ्यास की आवश्यकता नहीं होती।

सरल परिभाषा

"परिवेश के संपर्क में आकर भाषा को स्वाभाविक रूप से सीखने की प्रक्रिया भाषा अर्जन कहलाती है।"


📚 विस्तृत अध्ययन

1. भाषा अर्जन का अर्थ

भाषा अर्जन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। बालक अपने परिवार, पड़ोस, मित्रों और सामाजिक वातावरण से लगातार भाषा सुनता है और धीरे-धीरे उसे समझने तथा प्रयोग करने लगता है।

बालक पहले सुनता है, फिर समझता है, उसके बाद बोलना प्रारंभ करता है।

यह प्रक्रिया बिना किसी औपचारिक व्याकरण ज्ञान के भी संभव होती है।


2. भाषा अर्जन की विशेषताएँ

(क) स्वाभाविक प्रक्रिया

भाषा अर्जन किसी विशेष प्रशिक्षण के बिना होता है।


(ख) अवचेतन प्रक्रिया

बालक भाषा सीखते समय भाषा के नियमों का सचेत अध्ययन नहीं करता।


(ग) सामाजिक अंतःक्रिया पर आधारित

भाषा अर्जन परिवार, मित्रों और समाज के संपर्क से होता है।


(घ) निरंतर प्रक्रिया

भाषा अर्जन जन्म के बाद शुरू होकर जीवन भर चलता रहता है।


(ङ) संप्रेषण केंद्रित

भाषा अर्जन का मुख्य उद्देश्य प्रभावी संप्रेषण होता है, न कि व्याकरणिक नियमों का ज्ञान।


(च) अर्थ पर बल

भाषा अर्जन में बालक पहले अर्थ समझता है, बाद में भाषा की संरचना को ग्रहण करता है।


3. भाषा अर्जन की प्रक्रिया

भाषा अर्जन क्रमिक रूप से विकसित होता है।

चरण 1 : ध्वनि अनुकरण

शिशु प्रारंभ में विभिन्न ध्वनियाँ निकालता है।

चरण 2 : शब्द सीखना

बालक अपने परिवेश में बार-बार सुनने वाले शब्दों को सीखता है।

चरण 3 : छोटे वाक्य

बालक दो या तीन शब्दों वाले वाक्य बोलना शुरू करता है।

चरण 4 : जटिल अभिव्यक्ति

धीरे-धीरे बालक पूर्ण वाक्य एवं जटिल विचार व्यक्त करने लगता है।


4. भाषा अर्जन के प्रमुख सिद्धांत

(क) व्यवहारवादी दृष्टिकोण (Behaviorist Theory)

इस सिद्धांत के प्रमुख समर्थक थे

B. F. Skinner

स्किनर के अनुसार

  • भाषा अनुकरण द्वारा सीखी जाती है।
  • प्रोत्साहन (Reinforcement) भाषा सीखने में महत्वपूर्ण है।
  • बालक दूसरों को सुनकर भाषा अर्जित करता है।

उदाहरण

बच्चा "मम्मी" शब्द सुनकर उसे दोहराता है और प्रशंसा मिलने पर उसका प्रयोग बढ़ जाता है।


(ख) जन्मजातवादी दृष्टिकोण (Nativist Theory)

इस सिद्धांत के प्रमुख समर्थक थे

Noam Chomsky

चॉम्स्की के अनुसार

  • भाषा सीखने की क्षमता जन्मजात होती है।
  • प्रत्येक बालक में Language Acquisition Device (LAD) मौजूद होता है।
  • केवल अनुकरण से भाषा अर्जन की व्याख्या नहीं की जा सकती।

(ग) सामाजिक अंतःक्रियावादी दृष्टिकोण

इस दृष्टिकोण के प्रमुख समर्थक थे

Lev Vygotsky

वाइगोत्स्की के अनुसार

  • भाषा अर्जन सामाजिक अंतःक्रिया से होता है।
  • परिवार और समाज भाषा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • भाषा और चिंतन का विकास परस्पर संबंधित है।

5. भाषा अर्जन और मातृभाषा

बालक सामान्यतः अपनी मातृभाषा का अर्जन सबसे पहले करता है।

मातृभाषा का अर्जन

  • स्वाभाविक होता है।
  • सहज होता है।
  • भावनात्मक रूप से जुड़ा होता है।

इसीलिए मातृभाषा भाषा अर्जन का आधार मानी जाती है।


6. भाषा अर्जन को प्रभावित करने वाले कारक

(क) पारिवारिक वातावरण

भाषा समृद्ध वातावरण भाषा अर्जन को प्रोत्साहित करता है।


(ख) सामाजिक संपर्क

अधिक सामाजिक अंतःक्रिया भाषा विकास को बढ़ाती है।


(ग) प्रोत्साहन

सकारात्मक प्रतिक्रिया बालक को भाषा प्रयोग के लिए प्रेरित करती है।


(घ) संज्ञानात्मक विकास

बालक की मानसिक परिपक्वता भाषा अर्जन को प्रभावित करती है।


(ङ) भाषाई अवसर

जितने अधिक भाषा प्रयोग के अवसर मिलेंगे, भाषा अर्जन उतना ही बेहतर होगा।


7. भाषा अर्जन और भाषा अधिगम में अंतर का आधार

भाषा अर्जन और भाषा अधिगम को अक्सर समान समझ लिया जाता है, जबकि दोनों में महत्वपूर्ण अंतर है।

भाषा अर्जन

  • स्वाभाविक होता है।
  • अवचेतन होता है।
  • संप्रेषण पर आधारित होता है।

जबकि भाषा अधिगम

  • औपचारिक होता है।
  • सचेतन होता है।
  • नियमों पर आधारित होता है।

(इसका विस्तृत अध्ययन अगले अध्याय 2.2 में किया जाएगा।)


🏫 शिक्षक परिप्रेक्ष्य

एक प्रभावी भाषा शिक्षक को यह समझना चाहिए कि बच्चे भाषा को केवल नियमों से नहीं सीखते, बल्कि भाषा का प्रयोग करके सीखते हैं।

इसलिए शिक्षक को

  • संवाद आधारित शिक्षण अपनाना चाहिए।
  • भाषा प्रयोग के अवसर देने चाहिए।
  • त्रुटियों को सीखने की प्रक्रिया का भाग मानना चाहिए।
  • समृद्ध भाषाई वातावरण तैयार करना चाहिए।

भाषा सीखने की प्रक्रिया को स्वाभाविक और आनंददायक बनाना भाषा शिक्षक का महत्वपूर्ण दायित्व है।


⚠️ सामान्य भ्रांतियाँ

भ्रांति 1

भाषा केवल पढ़ाने से सीखी जाती है।

सत्य: भाषा का अर्जन स्वाभाविक रूप से भी होता है।


भ्रांति 2

बच्चे केवल अनुकरण से भाषा सीखते हैं।

सत्य: अनुकरण महत्वपूर्ण है, लेकिन भाषा अर्जन में जन्मजात एवं सामाजिक कारक भी भूमिका निभाते हैं।


भ्रांति 3

भाषाई त्रुटियाँ सीखने की असफलता का संकेत हैं।

सत्य: त्रुटियाँ भाषा अर्जन की स्वाभाविक प्रक्रिया का भाग हैं।


📝 उदाहरण

उदाहरण 1

दो वर्ष का बच्चा बिना व्याकरण पढ़े "मुझे पानी चाहिए" बोलना सीख जाता है।

यह भाषा अर्जन का उदाहरण है।

उदाहरण 2

बच्चा घर में बातचीत सुनकर नए शब्द सीखता है।

यह सामाजिक अंतःक्रिया आधारित भाषा अर्जन है।

उदाहरण 3

बालक "मैं गया" के स्थान पर "मैं गई" बोल देता है।

यह भाषा अर्जन की प्रक्रिया में होने वाली स्वाभाविक त्रुटि है।


🎯 परीक्षा बिंदु (Exam Booster)

  • भाषा अर्जन स्वाभाविक एवं अवचेतन प्रक्रिया है।
  • भाषा अर्जन संप्रेषण केंद्रित होता है।
  • स्किनर ने अनुकरण और प्रोत्साहन पर बल दिया।
  • चॉम्स्की ने LAD की अवधारणा दी।
  • वाइगोत्स्की ने सामाजिक अंतःक्रिया को महत्वपूर्ण माना।
  • भाषा अर्जन मातृभाषा से प्रारंभ होता है।
  • भाषा अर्जन में त्रुटियाँ सीखने का स्वाभाविक भाग हैं।

💡 याद रखने की ट्रिक

"स्व-अव-सं-सा"

स्व = स्वाभाविक

अव = अवचेतन

सं = संप्रेषण आधारित

सा = सामाजिक अंतःक्रिया


📑 अध्याय सारांश

  1. भाषा अर्जन भाषा सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया है।
  2. यह अवचेतन रूप से होता है।
  3. भाषा अर्जन सामाजिक वातावरण पर आधारित होता है।
  4. बालक पहले सुनता है, फिर बोलना सीखता है।
  5. स्किनर ने अनुकरण और प्रोत्साहन पर बल दिया।
  6. चॉम्स्की ने LAD की अवधारणा प्रस्तुत की।
  7. वाइगोत्स्की ने सामाजिक अंतःक्रिया को महत्वपूर्ण माना।
  8. मातृभाषा भाषा अर्जन का आधार होती है।
  9. भाषा अर्जन में त्रुटियाँ सामान्य हैं।
  10. भाषा अर्जन संप्रेषण को केंद्र में रखता है।

One-Liner Revision

  1. भाषा अर्जन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
  2. भाषा अर्जन अवचेतन रूप से होता है।
  3. भाषा अर्जन का संबंध मुख्यतः मातृभाषा से होता है।
  4. बालक पहले सुनता है, फिर बोलता है।
  5. स्किनर व्यवहारवादी सिद्धांत के समर्थक थे।
  6. चॉम्स्की ने LAD की अवधारणा दी।
  7. वाइगोत्स्की ने सामाजिक अंतःक्रिया पर बल दिया।
  8. भाषा अर्जन में अनुकरण की भूमिका होती है।
  9. भाषा अर्जन संप्रेषण आधारित होता है।
  10. भाषा अर्जन में व्याकरण का औपचारिक अध्ययन आवश्यक नहीं है।
  11. भाषा अर्जन सामाजिक वातावरण से प्रभावित होता है।
  12. परिवार भाषा अर्जन का प्रथम केंद्र है।
  13. त्रुटियाँ भाषा अर्जन की स्वाभाविक प्रक्रिया का भाग हैं।
  14. भाषा अर्जन जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है।
  15. भाषा अर्जन भाषा शिक्षण की आधारभूत अवधारणा है।

अभ्यास प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

1. भाषा अर्जन किस प्रकार की प्रक्रिया है?

(A) कृत्रिम

(B) स्वाभाविक

(C) यांत्रिक

(D) औपचारिक


2. Language Acquisition Device (LAD) की अवधारणा किसने दी?

(A) स्किनर

(B) पियाजे

(C) चॉम्स्की

(D) वाइगोत्स्की


3. भाषा अर्जन मुख्यतः किस पर आधारित होता है?

(A) रटने पर

(B) संप्रेषण पर

(C) परीक्षा पर

(D) व्याकरण पर


4. सामाजिक अंतःक्रिया को भाषा अर्जन का आधार किसने माना?

(A) स्किनर

(B) चॉम्स्की

(C) वाइगोत्स्की

(D) ब्रूनर


5. भाषा अर्जन में त्रुटियाँ क्या दर्शाती हैं?

(A) असफलता

(B) सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया

(C) बुद्धि की कमी

(D) अनुशासनहीनता


वर्णनात्मक प्रश्न

  1. भाषा अर्जन की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
  2. भाषा अर्जन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
  3. स्किनर, चॉम्स्की एवं वाइगोत्स्की के विचारों की तुलना कीजिए।
  4. भाषा अर्जन को प्रभावित करने वाले कारकों की चर्चा कीजिए।
  5. भाषा अर्जन और भाषा अधिगम में अंतर स्पष्ट कीजिए।

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