आपकी पुस्तक के लिए अध्यायों को एक
समान प्रारूप में तैयार करना उचित रहेगा। नीचे अध्याय 1.1 : भाषा – अर्थ,
प्रकृति एवं विशेषताएँ उसी अंतिम संरचना के अनुसार प्रस्तुत है।
अध्याय 1.1 : भाषा – अर्थ,
प्रकृति एवं विशेषताएँ
📖 भूमिका
मानव जीवन में भाषा का अत्यंत महत्वपूर्ण
स्थान है। भाषा के माध्यम से मनुष्य अपने विचारों,
भावनाओं, अनुभवों तथा ज्ञान का आदान-प्रदान
करता है। भाषा केवल संप्रेषण का साधन ही नहीं, बल्कि
संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक जीवन की आधारशिला भी है। किसी
भी भाषा के शिक्षण को समझने से पहले भाषा के अर्थ, प्रकृति
और विशेषताओं को समझना आवश्यक है।
🧠 मुख्य अवधारणा
‘भाषा’ शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है— बोलना, व्यक्त करना अथवा कथन करना।
सरल शब्दों में, विचारों, भावनाओं,
इच्छाओं और अनुभवों को व्यक्त करने तथा दूसरों तक पहुँचाने के माध्यम
को भाषा कहते हैं।
प्रमुख
परिभाषाएँ
हेनरी स्वीट के अनुसार—
“ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति ही भाषा है।”
प्लेटो के अनुसार—
“विचार आत्मा की मूक बातचीत है और जब यही विचार ध्वनि का रूप धारण
कर लेते हैं, तब भाषा कहलाते हैं।”
सपीर के अनुसार—
“भाषा विचारों, भावनाओं और इच्छाओं को व्यक्त
करने की विशुद्ध मानवीय तथा गैर-सहज पद्धति है।”
📚 विस्तृत अध्ययन
1. भाषा का अर्थ
भाषा एक ऐसी व्यवस्थित प्रणाली है
जिसके माध्यम से मनुष्य अपने विचारों और भावनाओं का आदान-प्रदान करता है। भाषा के
बिना सामाजिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
2. भाषा की प्रकृति
(क) भाषा अर्जित
संपत्ति है
भाषा जन्मजात नहीं होती, बल्कि सामाजिक वातावरण में सीखी जाती है।
उदाहरण: यदि कोई भारतीय बालक जन्म के बाद फ्रांस में पले-बढ़े, तो वह फ्रेंच भाषा सीखेगा।
(ख) भाषा सामाजिक है
भाषा का विकास समाज में होता है। समाज
के बिना भाषा का अस्तित्व नहीं हो सकता।
(ग) भाषा परिवर्तनशील
है
समय,
स्थान और परिस्थितियों के अनुसार भाषा में निरंतर परिवर्तन होता
रहता है।
उदाहरण: मोबाइल, इंटरनेट, ऑनलाइन आदि शब्द आधुनिक हिंदी में नए रूप
से जुड़े हैं।
(घ) भाषा परंपरागत है
भाषा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक
हस्तांतरित होती रहती है।
(ङ) भाषा विचारों की
अभिव्यक्ति का माध्यम है
मनुष्य अपने अनुभव, ज्ञान और भावनाएँ भाषा के माध्यम से व्यक्त
करता है।
(च) भाषा प्रतीकात्मक
है
भाषा ध्वनि-प्रतीकों की एक संगठित
व्यवस्था है। शब्द स्वयं वस्तु नहीं होते,
बल्कि उसके प्रतीक होते हैं।
(छ) भाषा नियमबद्ध है
प्रत्येक भाषा के अपने निश्चित
व्याकरणिक नियम होते हैं।
(ज) भाषा सृजनात्मक है
सीमित शब्दों के आधार पर अनगिनत नए
वाक्यों और विचारों का निर्माण किया जा सकता है।
3. भाषा की प्रमुख
विशेषताएँ
- भाषा संप्रेषण का माध्यम है।
- भाषा सामाजिक संस्था है।
- भाषा अर्जित संपत्ति है।
- भाषा ध्वनि-आधारित होती है।
- भाषा परिवर्तनशील होती है।
- भाषा नियमबद्ध होती है।
- भाषा संस्कृति की वाहक होती है।
- भाषा प्रतीकात्मक होती है।
- भाषा सृजनात्मक होती है।
- भाषा विचारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति का साधन है।
🏫 शिक्षक परिप्रेक्ष्य
एक शिक्षक के लिए भाषा केवल अध्ययन का
विषय नहीं है, बल्कि शिक्षण का
प्रमुख माध्यम है। शिक्षक को यह समझना चाहिए कि भाषा सामाजिक वातावरण में विकसित
होती है और बच्चों की भाषाई त्रुटियाँ सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया का भाग हैं।
इसलिए भाषा शिक्षण में संवाद, सहभागिता और अभिव्यक्ति के
अवसर अधिक दिए जाने चाहिए।
⚠️ सामान्य भ्रांतियाँ
भ्रांति
1
भाषा जन्मजात होती है।
सत्य: भाषा अर्जित की जाती है।
भ्रांति
2
भाषा कभी नहीं बदलती।
सत्य: भाषा निरंतर परिवर्तनशील होती है।
भ्रांति
3
व्याकरण ही भाषा है।
सत्य: व्याकरण भाषा का केवल एक अंग है।
📝 उदाहरण
उदाहरण
1
एक बच्चा घर में भोजपुरी, विद्यालय में हिंदी और मोबाइल पर अंग्रेज़ी
सुनता है। इससे स्पष्ट होता है कि भाषा सामाजिक वातावरण से सीखी जाती है।
उदाहरण
2
“मोबाइल” और “इंटरनेट” जैसे शब्द भाषा
की परिवर्तनशीलता को दर्शाते हैं।
🎯 परीक्षा बिंदु (Exam Booster)
- भाषा शब्द ‘भाष्’ धातु से बना है।
- भाषा अर्जित सामाजिक संपत्ति है।
- भाषा ध्वनि-प्रतीकों की व्यवस्था है।
- भाषा परिवर्तनशील एवं सृजनात्मक होती है।
- भाषा संस्कृति की वाहक होती है।
- भाषा सामाजिक स्वीकृति पर आधारित होती है।
💡 याद रखने की ट्रिक
“सापरवि-प्रनि-सृसं”
सा
– सामाजिक
प
– परंपरागत
र
– नियमबद्ध
वि
– विचार अभिव्यक्ति
प्र – परिवर्तनशील
नि
– प्रतीकात्मक
सृ
– सृजनात्मक
सं
– संस्कृति की संवाहक
📑 अध्याय सारांश
- भाषा शब्द संस्कृत की ‘भाष्’ धातु से बना है।
- भाषा विचारों एवं भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम है।
- भाषा जन्मजात नहीं,
अर्जित संपत्ति है।
- भाषा का विकास समाज में होता है।
- भाषा परिवर्तनशील एवं गतिशील होती है।
- भाषा ध्वनि-प्रतीकों की व्यवस्था है।
- भाषा नियमबद्ध होती है।
- भाषा संस्कृति की वाहक है।
- भाषा सृजनात्मक होती है।
- भाषा मानव सभ्यता के विकास का आधार है।
⚡ One-Liner Revision
- भाषा शब्द ‘भाष्’ धातु से बना है।
- भाषा अर्जित संपत्ति है।
- भाषा सामाजिक संस्था है।
- भाषा ध्वनि-प्रतीकों की व्यवस्था है।
- भाषा परिवर्तनशील होती है।
- भाषा संस्कृति की संवाहक है।
- भाषा नियमबद्ध होती है।
- भाषा विचारों की अभिव्यक्ति का साधन है।
- भाषा सृजनात्मक होती है।
- भाषा समाज में विकसित होती है।
- हेनरी स्वीट ने भाषा को ध्वन्यात्मक अभिव्यक्ति कहा।
- प्लेटो के अनुसार विचार आत्मा की मूक बातचीत है।
- भाषा सामाजिक स्वीकृति पर आधारित होती है।
- भाषा पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है।
- भाषा मानव जीवन की आधारभूत आवश्यकता है।
❓ अभ्यास प्रश्न
वस्तुनिष्ठ
प्रश्न (MCQs)
1. ‘भाषा’ शब्द किस धातु से बना है?
(A) भाष् ✅
(B) वच्
(C) कथ्
(D) बोल्
2. भाषा किस प्रकार की
संपत्ति है?
(A) जन्मजात
(B) अर्जित ✅
(C) आनुवंशिक
(D) जैविक
3. भाषा की कौन-सी
विशेषता नए शब्दों के निर्माण की अनुमति देती है?
(A) सामाजिकता
(B) सृजनात्मकता ✅
(C) परंपरागतता
(D) ध्वन्यात्मकता
4. “ध्वन्यात्मक शब्दों
द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति” किसकी परिभाषा है?
(A) प्लेटो
(B) सपीर
(C) हेनरी स्वीट ✅
(D) ब्लूमफील्ड
5. भाषा का विकास कहाँ
होता है?
(A) परिवार में
(B) विद्यालय में
(C) समाज में ✅
(D) पुस्तक में
वर्णनात्मक
प्रश्न
- भाषा की परिभाषा देते हुए उसकी प्रकृति का वर्णन कीजिए।
- भाषा की प्रमुख विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाइए।
- भाषा को अर्जित सामाजिक संपत्ति क्यों कहा जाता है?
- भाषा की परिवर्तनशीलता पर टिप्पणी लिखिए।
- भाषा शिक्षण में भाषा की प्रकृति का क्या महत्व है?