9 April AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

9 अप्रैल – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 9 अप्रैल है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

"असफलता की उत्पत्ति तभी होती है जब आप प्रयास करना बन्द कर देते हैं।"
"There is no failure except in no longer trying."

असली असफलता तब नहीं होती जब आपका प्रयास सफल नहीं होता, बल्कि तब होती है जब आप प्रयास करना ही छोड़ देते हैं।जब तक आप कोशिश करते रहते हैं, तब तक आप सीखते और आगे बढ़ते रहते हैं। इसलिए, प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है।जो व्यक्ति हार मानकर प्रयास बंद कर देता है, वही वास्तव में असफल होता है। जो लगातार कोशिश करते हैं, वे कभी असफल नहीं होते—चाहे परिणाम कुछ भी हो।

यह सुविचार हमें याद दिलाता है कि सफलता के लिए लगातार प्रयास जरूरी है। चाहे कितनी भी बार नाकामी मिले, जो व्यक्ति डटा रहता है, वही अंततः जीतता है। असफलता तभी आती है जब आप प्रयास करना छोड़ देते हैं। इसलिए, कभी हार न मानें—क्योंकि कोशिश करने वाला कभी हारा नहीं होता।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: WARD : वार्ड : परवरिश करना, रक्षा करना, बचाव करना / पालन-पोषण करना

"She took the orphan as her ward and raised him with love." "वह अनाथ बच्चे को अपने वार्ड के रूप में लेकर उसकी अच्छी परवरिश कर रही है।"

🧩 आज की पहेली
सबसे लम्बी गर्दन जिसकी, इसमे तनिक न झूठ ।
खाता पेडो के पत्ते पर समझ न लेना ऊँट ।।

उत्तर – जिराफ
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 9 अप्रैल की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 9 अप्रैल 1860: फ्रांसीसी आविष्कारक एडौर्ड-लियोन स्कॉट डी मार्टिनविले ने "फोनोटोग्राफ" नामक उपकरण से मानव आवाज की पहली ज्ञात रिकॉर्डिंग की। इसमें फ्रांसीसी लोकगीत "ऑ क्लेयर डे ला ल्यून" गाया गया था।
  • 9 अप्रैल 1893: हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार, इतिहासकार और दार्शनिक राहुल सांकृत्यायन का जन्म हुआ। उन्हें "यायावर विद्वान" कहा जाता है।
  • 9 अप्रैल 1953: वार्नर ब्रदर्स ने 'हाउस ऑफ वैक्स' शीर्षक से पहली 3D फिल्म रिलीज़ की, जिसने सिनेमा जगत में नई तकनीक की शुरुआत की।
  • 9 अप्रैल 1965: कच्छ के रण में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद बढ़ा, जो बाद में 1965 के भारत-पाक युद्ध में बदल गया।
  • 9 अप्रैल 1989: हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में संजय जलविद्युत परियोजना शुरू की गई, जो भाभा नदी पर स्थित है।
  • 9 अप्रैल 2011: लोकपाल बिल की मांग को लेकर अन्ना हजारे ने 95 घंटे के आमरण अनशन के बाद सरकार के समर्थन के बाद इसे समाप्त किया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – राहुल सांकृत्यायन

राहुल सांकृत्यायन (- 14 अप्रैल 1963) हिंदी साहित्य के एक ऐसे विलक्षण विद्वान थे जिन्हें सम्मानपूर्वक 'महापंडित' की उपाधि दी जाती है। राहुल सांकृत्यायन का जन्म सन् 1893 में उनके ननिहाल गाँव पंदहा. ज़िला आज़मगढ़ (उत्तर प्रदेश) में हुआ। मूल नाम केदारनाथ पांडे होने के बावजूद बौद्ध धर्म से प्रभावित होकर उन्होंने 'राहुल सांकृत्यायन' नाम धारण किया। वे एक प्रतिष्ठित बहुभाषाविद थे जिन्होंने हिंदी, संस्कृत, पाली, तिब्बती, चीनी और रूसी सहित कई भाषाओं में महारत हासिल की।

सांकृत्यायन जी को 'यायावर विद्वान' के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि ज्ञान की खोज में उन्होंने पूरे विश्व की यात्राएँ कीं। बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में उन्होंने यात्रा साहित्य तथा विश्व-दर्शन के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। वे हिंदी यात्रा साहित्य के पितामह माने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में "वोल्गा से गंगा", "मध्य एशिया का इतिहास", "दर्शन-दिग्दर्शन" और "किन्नर देश में" विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

बौद्ध धर्म पर उनका शोध हिंदी साहित्य में युगांतरकारी माना जाता है। इस शोध के लिए उन्होंने तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक की यात्राएँ कीं और दुर्लभ बौद्ध ग्रंथों को खोजकर भारत लाए। मध्य एशिया तथा कॉकेशस की उनकी यात्राओं पर लिखे वृत्तांत साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। अपने जीवनकाल में उन्होंने 100 से अधिक पुस्तकें लिखीं जो विभिन्न विषयों पर उनके गहन अध्ययन का परिचय देती हैं।

राहुल सांकृत्यायन ने सामाजिक समानता, बौद्ध दर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया। उनका कथन - "ज्ञान की खोज में घूमना ही मेरा धर्म है" - उनके जीवन दर्शन को पूरी तरह व्यक्त करता है। अध्ययन, यात्रा और लेखन के अनूठे संगम से परिपूर्ण उनका जीवन सादगी, जिज्ञासा और अथक परिश्रम का उत्कृष्ट उदाहरण है। आज भी उनकी रचनाएँ शोधार्थियों और साहित्यप्रेमियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बनी हुई हैं।

🎖️ आज का दैनिक विशेष – CRPF वीरता दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 9 अप्रैल को मनाये जाने वाले “CRPF वीरता दिवस ” के बारे में: CRPF वीरता दिवस हर साल 9 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की अदम्य साहस, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को समर्पित है।

9 अप्रैल 1965 को गुजरात के सरदार पोस्ट (कच्छ के रण में) पर CRPF के 350 जवानों ने पाकिस्तानी सेना के 3500 सैनिकों के हमले का डटकर मुकाबला किया था। इस असमान लड़ाई में CRPF ने अपनी रणनीति और वीरता से पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इस युद्ध में CRPF के 34 जवान शहीद हुए, लेकिन उन्होंने दुश्मन को भारी नुकसान पहुँचाया। यह दिन CRPF के शौर्य और देशभक्ति की याद दिलाता है।

इस दिन शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी जाती है और वीरता पुरस्कार वितरित किए जाते हैं।
CRPF के जवानों को उनकी बहादुरी और सेवा के लिए सम्मानित किया जाता है।

के बारे में:
CRPF की स्थापना: 27 जुलाई 1939 (क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में)
मुख्यालय: नई दिल्ली
उपनाम: "देश की मुख्य अर्धसैनिक बल"
मोटो: "सेवा और निष्ठा" (Service and Loyalty)

सन्देश:
"CRPF के जवानों का बलिदान देश की सुरक्षा की नींव है। हम सभी को उनकी वीरता को सलाम करना चाहिए।"

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – "सफलता की तैयारी"

शहर से कुछ दूर एक शांत गाँव में एक बुजुर्ग दंपत्ति रहते थे। उनका घर खेतों और पेड़ों से घिरा था, जहाँ आस-पास बहुत कम लोग नज़र आते थे। एक दिन सुबह-सुबह उन्होंने देखा कि एक युवक साइकिल पर फावड़ा लेकर जा रहा है। वह कुछ देर दिखाई दिया और फिर गायब हो गया। दंपत्ति ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन अगले दिन फिर वही युवक उधर से गुज़रा। धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया—रोज़ सुबह वह युवक फावड़ा लेकर निकलता और कुछ देर बाद लौट आता।

एक दिन उनकी जिज्ञासा बढ़ गई। उन्होंने तय किया कि वे उसका पीछा करके देखेंगे कि वह आखिर करता क्या है। अगली सुबह जब वह युवक फिर से गुज़रा, तो दंपत्ति अपनी गाड़ी में बैठकर उसके पीछे हो लिए। कुछ दूर जाने के बाद युवक एक सूखे खेत के पास रुका। उसने साइकिल खड़ी की और फावड़े से ज़मीन खोदनी शुरू कर दी।

दंपत्ति हैरान थे। वे उसके पास गए और पूछा, "बेटा, तुम इस सुनसान जगह पर रोज़ मेहनत क्यों करते हो?"

युवक ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "दादाजी, कल मुझे एक किसान के यहाँ नौकरी के लिए जाना है। वे एक अनुभवी मज़दूर चाहते हैं, लेकिन मैंने पहले कभी खेतों में काम नहीं किया। इसलिए मैं रोज़ यहाँ आकर अभ्यास करता हूँ, ताकि कल मेरी परीक्षा अच्छी जाए!"

बुजुर्ग दंपत्ति उसकी मेहनत और लगन देखकर बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया, "तुम्हारी यह तैयारी तुम्हें ज़रूर सफल बनाएगी!"

और सचमुच, अगले दिन युवक को किसान ने खुश होकर नौकरी पर रख लिया!

कहानी से सीख:

सफलता के लिए तैयारी ज़रूरी है – बिना मेहनत और अभ्यास के कोई भी कामयाबी नहीं मिलती।
अवसर के लिए खुद को तैयार करो – होने वाले मौके का इंतज़ार मत करो, बल्कि उसके लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर दो।
लगन और ईमानदारी हमेशा फल देती है – चाहे शुरुआत में असफलता मिले, लेकिन निरंतर प्रयास सफलता दिलाता है।
"सफलता उन्हीं के कदम चूमती है, जो उसके लिए पहले से तैयार रहते हैं।"

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

निर्माता : प्रेम वर्मा, PS बैजनाथपुर जमुनहा

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