7 September AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









5 IMAGES INSIDE THIS BOX ]

आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

7 सितम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 7 सितम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "धैर्य कड़वा हो सकता है, लेकिन इसका फल मीठा होता है।"
"Patience is bitter, but its fruits are sweet."

मतलब यह है कि जब हम किसी काम को पूरा करने की कोशिश करते हैं, तो शुरुआत में मुश्किलें, रुकावटें और इंतज़ार झेलना पड़ता है। यह समय हमें कड़वा और बोझिल लगता है। कई बार मन करता है कि सब छोड़ दें। लेकिन जो व्यक्ति धैर्य रखता है और बिना हार माने मेहनत करता रहता है, वही अंत में सफलता पाता है।

जैसे किसान बीज बोता है। शुरुआत में उसे मेहनत करनी पड़ती है—जमीन खोदना, पानी देना, धूप-बारिश सहना। यह सब धैर्य की परीक्षा है और आसान नहीं होता। लेकिन जब समय आता है, तो वही बीज बड़ा होकर मीठे फल देता है। इसलिए यह कथन हमें सिखाता है कि धैर्य रखना कठिन जरूर है, पर उसका परिणाम हमेशा सुखद और मधुर होता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: LANGUAGE : लैंग्वेज: भाषा, जुबान, बोली, भाषा मानव जीवन का एक अभिन्न अंग है। लैंग्वेज हमें दूसरों से जोड़ती है, हमें अपनी पहचान देती है और हमें ज्ञान देती है।

वाक्य प्रयोग: Hindi is our mother language and it is very rich. हिंदी हमारी मातृभाषा है और यह बहुत समृद्ध भाषा है।

🧩 आज की पहेली
बिना आग के खीर बनायीं, न मीठी व नमकीन । रत्ती रत्ती खा गए बड़े बड़े शौकीन।।
उतर - चूना
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 7 सितम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1822: ब्राजील ने पुर्तगाल से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की, जिसे ब्राजील स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। डोम पेड्रो ने इपिरंगा नदी के किनारे स्वतंत्रता की घोषणा की, जिसे "ग्रिटो डू इपिरंगा" कहा जाता है।
  • 1882: बंगाल के कांतल पाड़ा गांव में बंकिम चंद्र चटर्जी ने राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" की रचना की। यह गीत उनके उपन्यास आनंदमठ में शामिल है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। 2003 में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के सर्वेक्षण में यह गीत विश्व के शीर्ष 10 गीतों में दूसरे स्थान पर था।
  • 1906: बैंक ऑफ इंडिया की स्थापना मुंबई में प्रतिष्ठित व्यापारियों के एक समूह द्वारा की गई। यह भारत का सबसे पुराना वाणिज्यिक बैंक है, जो स्विफ्ट SWIFT का संस्थापक सदस्य है और 1969 में इसका राष्ट्रीयकरण हुआ। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण कदम था।
  • 1921: अमेरिका के न्यू जर्सी में पहली मिस अमेरिका सौंदर्य प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
  • 1923: इंटरपोल यानी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पुलिस संगठन की स्थापना विएना में हुई।
  • 1979: ईएसपीएन खेल और मनोरंजन केबल चैनल ने स्कॉट रसमिसल और उनके पिता ब्यू रसमिसन द्वारा केबल प्रसारण शुरू किया।
  • 2008: भारत-अमेरिका परमाणु करार के तहत परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह NSG के 45 सदस्यों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु व्यापार की छूट दी, जिसने भारत की ऊर्जा नीति को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया।
  • 2009: भारतीय खिलाड़ी पंकज आडवाणी ने विश्व पेशेवर बिलियर्ड्स खिताब जीता, जिसने भारत को खेल के क्षेत्र में गौरवान्वित किया।
  • 2011: दिल्ली उच्च न्यायालय के गेट नंबर 5 के पास एक सूटकेस में रखे बम के विस्फोट में 11 लोगों की मौत और 74 लोग घायल हुए। यह एक दुखद आतंकवादी घटना थी, जो भारत की सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाती है।
  • 2019: भारत का चंद्रयान-2 मिशन, जिसके तहत लैंडर ‘विक्रम’ को चंद्रमा की सतह पर उतारने का प्रयास किया गया, असफल रहा। चंद्रमा की सतह से 2.1 किमी की ऊँचाई पर लैंडर का इसरो के नियंत्रण कक्ष से संपर्क टूट गया।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – बंकिम चंद्र चटर्जी

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे वन्दे मातरम के रचयिता “बंकिम चंद्र चटर्जी” के बारे में।

बंकिम चंद्र चटर्जी भारतीय साहित्य के एक महान साहित्यकार और स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरक कवि थे, जिन्हें बंगाल के पुनर्जागरण का अग्रदूत माना जाता है। उनका सबसे महत्वपूर्ण योगदान राष्ट्रगीत "वंदे मातरम" की रचना है, जिसे उन्होंने 1882 में अपने उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बना और देशभक्तों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। बंकिम चंद्र ने बांग्ला और संस्कृत मिश्रित भाषा में इस गीत की रचना की, जो भारत माता की स्तुति करता है। उनके अन्य प्रमुख उपन्यासों में दुर्गेशनंदिनी, कपालकुंडला और देवी चौधरानी शामिल हैं, जिन्होंने बांग्ला साहित्य को समृद्ध किया। एक प्रशासक के रूप में भी उन्होंने ब्रिटिश शासन के तहत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन उनका साहित्यिक कार्य सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में केंद्रित रहा। बंकिम चंद्र का साहित्य न केवल सांस्कृतिक गौरव को दर्शाता है, बल्कि भारतीय समाज को आधुनिक विचारों से जोड़ने का भी प्रयास करता है। उनकी विरासत आज भी भारतीय साहित्य और देशभक्ति की भावना में जीवित है।

🇧🇷 आज का दैनिक विशेष – ब्राजील स्वतंत्रता दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 7 सितम्बर को मनाये जाने वाले “दिया दा इंडिपेंडेंसिया यानी ब्राजील स्वतंत्रता दिवस” के बारे में:

ब्राजील हर साल 7 सितंबर को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है। साल 1822 में, ब्राजील के राजकुमार पेड्रो प्रथम ने पुर्तगाल से ब्राजील की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। इस घोषणा को इपीरंगा की पुकार के नाम से जाना जाता है। पेड्रो प्रथम ने कहा था, "स्वतंत्रता या मृत्यु!" इसी घोषणा के साथ ब्राजील एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया। ब्राजील में स्वतंत्रता दिवस को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। देश की राजधानी ब्रासीलिया में राष्ट्रपति की उपस्थिति में एक भव्य सैन्य परेड आयोजित की जाती है। इस परेड में विभिन्न सैन्य इकाइयाँ, स्कूली बच्चे और सांस्कृतिक समूह भाग लेते हैं। देश के अन्य हिस्सों में भी संगीत, नृत्य और आतिशबाजी के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ब्राजील का स्वतंत्रता दिवस न केवल देश की स्वतंत्रता का प्रतीक है, बल्कि यह ब्राजीलियाई लोगों की एकता, गौरव और राष्ट्रीयता का भी प्रतीक है। यह दिन ब्राजील के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को सम्मानित करने का अवसर प्रदान करता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – पिता की सीख

एक गाँव में माधव नाम का व्यापारी रहता था। वह काजू-बादाम बेचने का काम करता था। उसकी तबीयत अक्सर खराब रहती थी, इसलिए वह खुद शहर जाकर सामान नहीं बेच पाता था। उसका बेटा भोला था।

एक दिन माधव उदास बैठा था। भोला ने पूछा – “क्या बात है बापू, आप इतने उदास क्यों हैं?” माधव ने कहा – “बेटा, मैं काजू-बादाम लेकर शहर जाना चाहता हूँ, पर बीमारी और कमजोरी के कारण जा नहीं पा रहा।” भोला बोला – “तो मैं चला जाता हूँ बापू, आप चिंता मत करो।” माधव ने मना किया – “नहीं बेटा, तू अभी छोटा है। शहर में ठग रहते हैं, वे तुझे लूट लेंगे।” पर भोला जिद पर अड़ गया। माँ ने भी रोका, पर अंत में माधव ने उसे भेजने की अनुमति दे दी और तीन बातें याद रखने की सीख दी—

रास्ते में खाना खाते समय कहना – “एक खाऊँ, दो खाऊँ, तीन खाऊँ या चारों को खा जाऊँ।”
धर्मशाला में रुकना हो तो कमरे की कुण्डी अंदर से ज़रूर बंद करके देखना।
दुकानदार अगर दाम कम लगाए तो कहना – “बापू से पूछकर आता हूँ।” और वहाँ से निकल जाना।

भोला ने पिता की सीख ध्यान से सुनी और शहर की ओर चल पड़ा। शहर पहुँचते ही चार बदमाश उसका पीछा करने लगे। तभी भोला को भूख लगी। वह बैठकर बोला – “एक खाऊँ, दो खाऊँ, तीन खाऊँ या चारों को खा जाऊँ।” बदमाशों ने यह सुना और डरकर भाग गए कि लड़का भूत है जो हम चारों को खाने की बात कर रहा है। भोला निश्चिंत होकर खाना खाता रहा।

रात को वह एक धर्मशाला पहुँचा। वहाँ के मालिक ने उसे बिना कुण्डी वाला कमरा दिया। भोला ने पिता की सीख याद की और मना कर दिया। आखिरकार दूसरी धर्मशाला में उसे कुण्डी वाला सुरक्षित कमरा मिल गया।

अगले दिन वह काजू-बादाम बेचने एक दुकान पर गया। दुकानदार ने दाम आधे लगाए। भोला बोला – “रुको, बापू से पूछकर आता हूँ।” यह सुन दुकानदार को लगा कि उसके पिता भी साथ हैं। उसने तुरंत सही दाम देकर सारा सामान खरीद लिया। भोला खुश होकर घर लौटा और पैसे पिता को दिए।

यह कहानी हमें सिखाती है कि बड़ों की सीख अनमोल होती है। उनका अनुभव हमें कठिनाइयों से बचाता है और सही रास्ता दिखाता है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.