सुप्रभात बालमित्रों!
7 अक्टूबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 7 अक्टूबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है,
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे,
नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"सुविचरों से सुफल उपजते हैं और कुविचारों से कुफल।
Good thoughts bear good fruit, bad thoughts bear bad fruit."
हमारे विचार हमारे जीवन की दिशा और गुणवत्ता को निर्धारित करते हैं। सुविचार, यानी अच्छे और सकारात्मक विचार, हमारे जीवन में सकारात्मकता और सफलता लाते हैं। जब हम सकारात्मक सोचते हैं, तो हम अपने कार्यों में उत्साह और ऊर्जा का अनुभव करते हैं। यह सकारात्मक दृष्टिकोण हमें चुनौतियों का सामना करने और उन्हें सफलतापूर्वक पार करने में मदद करता है।
दूसरी ओर, कुविचार, यानी नकारात्मक और हानिकारक विचार, हमारे जीवन में नकारात्मकता और असफलता लाते हैं। नकारात्मक सोच हमें निराशा, चिंता और भय में डाल देती है, जिससे हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असमर्थ हो जाते हैं। नकारात्मक विचार हमारे आत्मविश्वास को कम करते हैं और हमें निराशा की ओर धकेलते हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने विचारों को सकारात्मक और प्रेरणादायक बनाए रखें।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: COMMENDABLE (कमेंडबल) : प्रशंसनीय, काबिलेतारीफ़, सराहनीय। अर्थात — ऐसा कार्य या गुण जो तारीफ़ के योग्य हो।
पकड़ भी न मुझको पाओगे, मेरे बिन रह न पाओगे
उत्तर : हवा
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 7 अक्टूबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1891: स्वतंत्रता सेनानी, लेखक, और समाज सुधारक नरहरि पारिख का जन्म अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था। उन्होंने महात्मा गांधी के साथ काम किया और अस्पृश्यता, शराबखोरी तथा निरक्षरता के खिलाफ अभियान चलाया।
- 1907: भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्रान्तिकारियों की प्रमुख सहयोगी दुर्गावती देवी - दुर्गा भाभी का जन्म इलाहाबाद (अब कौशाम्बी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की सदस्य थीं और उन्होंने भगत सिंह व शिवराम राजगुरु को भागने में मदद की थी।
- 1914: 'मलिका-ए-गजल' के नाम से मशहूर, प्रसिद्ध भारतीय गायिका बेगम अख़्तर का जन्म उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद में हुआ था।
- 1919: नीदरलैंड्स की फ्लैग कैरियर एयरलाइन KLM की स्थापना हुई, जो आज भी मूल नाम से संचालित होने वाली दुनिया की सबसे पुरानी एयरलाइन है।
- 1950: मदर टेरेसा को वेटिकन से मिशनरीज ऑफ चैरिटी शुरू करने की अनुमति मिली। यह संस्था आज विश्व भर में अनाथालय, एड्स हॉस्पिटल और चैरिटी केंद्र चला रही है।
- 1959: सोवियत अंतरिक्ष यान लूना 3 ने चंद्रमा के पीछे के हिस्से यानी फार साइड की पहली तस्वीरें भेजीं, जिससे चंद्रमा के 70% हिस्से का मानचित्रण संभव हुआ।
- 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस (World Cotton Day) वैश्विक रूप से मनाया जाता है, जो कपास के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है। भारत जैसे कपास उत्पादक देशों के लिए यह विशेष रूप से प्रासंगिक है।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे दुर्गा भाभी के नाम से प्रसिद्ध महान क्रांतिकारी “दुर्गावती देवी” के बारे में।
दुर्गावती देवी, जिन्हें इतिहास में दुर्गा भाभी के नाम से जाना जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की उन साहसी क्रान्तिकारियों में से एक थीं जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए ब्रिटिश राज के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष में सक्रिय रूप से भाग लिया। उनका जन्म 7 अक्टूबर 1907 को इलाहाबाद (अब कौशाम्बी), उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह महान क्रान्तिकारी भगवती चरण वोहरा की पत्नी थीं और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) की एक सक्रिय और महत्वपूर्ण सदस्य थीं।
दुर्गा भाभी ने क्रान्तिकारी गतिविधियों में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका तब निभाई जब जॉन सॉन्डर्स की हत्या के बाद भगत सिंह और शिवराम राजगुरु को लाहौर से भागना पड़ा। उन्होंने भगत सिंह के साथ एक "दंपति" के रूप में यात्रा की, जिसमें राजगुरु उनके नौकर के वेश में थे। उनकी सूझबूझ और साहस के कारण, भगत सिंह सुरक्षित रूप से कलकत्ता पहुँच पाए। क्रान्तिकारियों को आश्रय देने, संदेश पहुँचाने और हथियार उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका अमूल्य थी। उन्होंने स्वयं कई क्रान्तिकारी कार्रवाइयों में भाग लिया और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ़ आवाज़ उठाई, जिसके लिए उन्हें जेल की सज़ा भी काटनी पड़ी।
दुर्गा भाभी ने केवल क्रांति के साथियों के रूप में ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय योद्धा के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनका त्याग, साहस और देश के प्रति समर्पण उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अविस्मरणीय क्रान्तिकारी सहयोगी के रूप में स्थापित करता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 7 अक्टूबर को मनाये जाने वाले “विश्व कपास दिवस” के बारे में:
विश्व कपास दिवस हर साल 7 अक्टूबर को मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य कपास के महत्व को उजागर करना और इससे जुड़ी आर्थिक, सामाजिक व पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
कपास एक प्राकृतिक रेशा यानी Natural Fiber है, जिसका उपयोग न केवल कपड़े बनाने में, बल्कि खाद्य उत्पादों और अन्य वस्तुओं में भी किया जाता है। यह पर्यावरण के अनुकूल यानी eco-friendly फसल है क्योंकि यह बायोडिग्रेडेबल होती है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण घटाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिलती है। कपास शुष्क जलवायु यानी कम पानी वाले क्षेत्रों में भी उगाई जा सकती है, जिससे यह कई किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत बनती है।
कपास का उत्पादन रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कई विकासशील देशों के लिए एक प्रमुख आर्थिक फसल है।
विश्व कपास दिवस की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, जब उप-सहारा अफ्रीका के चार कपास उत्पादक देश — बेनिन, बुर्किना फासो, चाड, और माली — जिन्हें सामूहिक रूप से "कॉटन फोर" कहा जाता है, ने विश्व व्यापार संगठन यानी WTO को 7 अक्टूबर को विश्व कपास दिवस घोषित करने का प्रस्ताव दिया था।
इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से कपास के महत्व, इसके व्यापार और उपयोग से जुड़े अवसरों तथा टिकाऊ उत्पादन के तरीकों पर चर्चा की जाती है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि कपास न केवल हमारे वस्त्रों का हिस्सा है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय स्थिरता का भी एक महत्वपूर्ण अंग है।
रोम में एन्ड्रोक्लीज़ नामक एक गुलाम अपने निर्दयी मालिक से परेशान होकर जंगल की ओर भाग गया। जंगल में भटकते हुए उसे एक घायल शेर दिखाई दिया, जो दर्द से कराह रहा था और बार-बार अपना पंजा उठा रहा था।
पहले तो एन्ड्रोक्लीज़ डर गया, लेकिन फिर उसने साहस और सहृदयता दिखाते हुए शेर के पास जाकर उसका पंजा देखा। उसमें एक बड़ा काँटा फँसा हुआ था। उसने सावधानीपूर्वक काँटा निकाल दिया।
शेर ने राहत की सांस ली और आभार स्वरूप एन्ड्रोक्लीज़ के हाथ चाटने लगा। इसके बाद शेर शांति से जंगल में चला गया।
कुछ समय बाद एन्ड्रोक्लीज़ को उसके मालिक के आदमियों ने पकड़ लिया और सम्राट के सामने प्रस्तुत किया। दंडस्वरूप उसे भूखे शेर के सामने फेंकने का आदेश दिया गया।
जब शेर को छोड़ा गया, तो वह एन्ड्रोक्लीज़ पर झपटा नहीं, बल्कि उसके पास आकर उसका हाथ चाटने लगा। यह वही शेर था, जिसके पंजे से एन्ड्रोक्लीज़ ने काँटा निकाला था।
यह दृश्य देखकर सम्राट और जनता आश्चर्यचकित रह गए। एन्ड्रोक्लीज़ ने पूरी घटना बताई। सम्राट ने उसकी सहृदयता और साहस की प्रशंसा की, उसे मुक्त कर दिया और शेर को भी जंगल लौटने की अनुमति दी।
इस प्रकार, यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें सभी के प्रति सहृदयता का भाव रखना चाहिए, क्योंकि दया और करुणा के कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाते। सहृदयता और करुणा के कार्य हमेशा हमारे जीवन में सकारात्मक परिणाम लाते हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







