सुप्रभात बालमित्रों!
5 जून – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 5 जून है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"कल के लिए सबसे अच्छी तैयारी यही है, कि आज अच्छा करो!"
"The best preparation for tomorrow is to do well today!"
कल के लिए सबसे अच्छी तैयारी यही है कि हम आज अपना काम अच्छी तरह करें। यानी अगर हम आज मेहनत और ईमानदारी से काम करेंगे, तो आने वाला कल भी सफल और बेहतर होगा। आज का दिन ही हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है इसका हर पल अनमोल है। यदि हम आज को व्यर्थ गंवा देते हैं, तो कल के लिए हमारी तैयारी अधूरी रह जाएगी। यदि हम आज अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं, तो निश्चित रूप से कल हमारा बेहतर होगा और हम कल के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर पाएंगे।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है:
Compassion : करुणा या सहानुभूति
किसी के दुख या तकलीफ़ को समझकर उसके लिए सहानुभूति और मदद की भावना रखना।
वाक्य प्रयोग : She showed great compassion towards the injured puppy.
उसने घायल पिल्ले के प्रति बहुत करुणा दिखाई।
उत्तरः सूरज
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 5 जून की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1661: सर आइजैक न्यूटन ने कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला लिया।
- 1857: कानपुर में भारतीय विद्रोही सैनिकों ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना को हराया।
- 1875: अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में पैसिफिक स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना हुई।
- 1901: मलयालम साहित्यकार और भारत के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता गोविंद शंकर कुरुप का जन्म हुआ।
- 1953: डेनमार्क में नया संविधान लागू हुआ।
- 1962: टेनिस खिलाड़ी और कोच रमेश कृष्णन का जन्म हुआ।
- 1972: संयुक्त राष्ट्र ने 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में घोषित किया।
- 2017: भारत ने अपने सबसे भारी रॉकेट, जीएसएलवी मार्क-3 डी-1, का सफल प्रक्षेपण किया।
- 2017: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 जून को अवैध मत्स्य पालन के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित किया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “गोविंद शंकर कुरुप” के बारे में।
गोविंद शंकर कुरुप, जिन्हें जी. शंकर कुरुप के नाम से जाना जाता है, मलयालम साहित्य के एक महान कवि, निबंधकार और साहित्यकार थे। उनका जन्म 5 जून 1901 को केरल के नेय्याट्टिन्करा में हुआ था। वे भारत के पहले ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता थे, जिन्हें 1965 में उनकी काव्य कृति ओटक्कुझल (बाँसुरी) के लिए यह सम्मान मिला। उनकी रचनाएँ प्रकृति, मानवता, और आध्यात्मिकता के गहन चिंतन को दर्शाती हैं।
उन्होंने मलयालम साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ कई अनुवाद कार्य भी किए, जिनमें रवींद्रनाथ टैगोर की गीतांजलि का मलयालम अनुवाद शामिल है। इसके अतिरिक्त, वे भारतीय साहित्य अकादमी के सदस्य और राज्यसभा के मनोनीत सांसद भी रहे। 2 फरवरी 1978 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी मलयालम साहित्य में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है। यह दिवस हमारी पृथ्वी और पृथ्वी के पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हम सभी इस अद्भुत ग्रह के प्रति जिम्मेदार हैं और हमें इसकी रक्षा करनी चाहिए।
विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में हुई थी जब संयुक्त राष्ट्र ने स्टॉकहोम, स्वीडन में पहला विश्व पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया था। इस सम्मेलन में 113 देशों के 1300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। इस सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरणीय मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इन समस्याओं को हल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना था।
यह दिवस हर साल एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है, जैसे जैव विविधता, वायु प्रदूषण, या प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन। भारत में, यह दिन वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, और पर्यावरण शिक्षा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सिखाता है कि हमारी छोटी-छोटी कोशिशें, जैसे पानी और बिजली की बचत, पुनर्चक्रण, और प्लास्टिक का कम उपयोग, पर्यावरण को स्वस्थ रखने में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। यह दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हमारी धरती की रक्षा हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
रामू नाम का एक समझदार चरवाहा था। उसके पास सौ से भी अधिक भेड़ें थीं। वह प्रतिदिन उन्हें हरे-भरे जंगल में चराने ले जाया करता, जहाँ घास मुलायम और नदी का पानी मीठा था। उसी जंगल में शेरू नाम का एक चालाक भेड़िया भी रहता था। वह अक्सर पेड़ों के पीछे छिपकर रामू की भेड़ों को लालच भरी नजरों से देखता और सोचता, “काश! मैं इनमें से किसी को खा सकता।”
लेकिन रामू बहुत सतर्क था। वह हमेशा भेड़ों के आस-पास नजर रखता था, जिससे शेरू के लिए हमला करना आसान नहीं था।
एक दिन शेरू को एक धूर्त योजना सूझी। वह जंगल में घूमते-घूमते एक मरी हुई भेड़ की खाल ले आया। उसने वह खाल अपने शरीर पर ओढ़ ली और खुद को असली भेड़ जैसा दिखाने लगा। भेड़ों की तरह चाल चलने की कोशिश करने लगा और धीरे-धीरे झुंड में घुस गया।
भेड़ों ने उसे पहचानने में गलती की और वह उनके बीच घूमता रहा। मौका मिलते ही उसने एक कमज़ोर भेड़ को दबोच लिया और धीरे-धीरे इसी तरह कई भेड़ों को शिकार बना लिया। रामू को शुरुआत में कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब उसकी सबसे आगे चलने वाली भेड़ अचानक गायब हो गई, तो उसे शक हुआ।
रामू तुरंत झुंड की ओर भागा और ज़ोर से चिल्लाया, “भेड़िया है! सब भागो!” घबराकर सभी भेड़ें इधर-उधर दौड़ने लगीं। शेरू भी उनके साथ भागने लगा, लेकिन उसी दौरान उसकी भेड़ की खाल गिर गई और उसकी असली पहचान सामने आ गई।
रामू ने तुरंत लाठी उठाई और शेरू पर हमला कर दिया। शेरू डर के मारे जान बचाकर भाग खड़ा हुआ। रामू ने अपनी बची हुई भेड़ों को इकट्ठा किया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले गया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि "दिखावा अक्सर धोखा होता है। हमें किसी के बाहरी रूप या शब्दों पर आँख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। सतर्कता और विवेक ही हमें धोखे से बचा सकते हैं।" इसलिए जीवन में हमेशा सच को पहचानने की कोशिश करें और सतर्क रहें, चाहे कोई कितनी भी अच्छी तरह से खुद को मासूम क्यों न दिखाए।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में।
आपका दिन शुभ हो!








