सुप्रभात बालमित्रों!
3 जुलाई – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 3 जुलाई है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"जो हार नहीं मानता, वो जीत जाता है।"
"He who does not give up wins."
यह कथन हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हार न मानने का दृढ़ संकल्प बहुत महत्वपूर्ण है। चाहे कितनी भी मुश्किलें या चुनौतियां आएं, हमें हार नहीं माननी चाहिए और लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
हमें अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए, दृढ़ रहना चाहिए, और लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। यदि हम कभी भी हार नहीं मानते हैं और अपने लक्ष्यों की ओर लगातार प्रयास करते रहते हैं, तो हम अंततः सफल होंगे।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: BARRIER: बैरियर: अवरोध, घेरा, रुकावट या नाका: किसी भी प्रकार की बाधा या रोकथाम जो किसी चीज को आगे बढ़ने या गति प्राप्त करने से रोकती है।
वाक्य प्रयोग: The police put up a barrier to stop the crowd. भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने अवरोध लगा दिया।
जवाब: आपकी पलकें
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 3 जुलाई की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1819 – अमेरिका का पहला बचत बैंक, "बैंक ऑफ सेविंग इन न्यूयॉर्क" स्थापित हुआ।
- 1863 – अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान गेटिसबर्ग युद्ध समाप्त हुआ, जिसमें संघ की जीत हुई।
- 1886 – कार्ल बेंज ने पहली मोटर कार, बेंज पेटेंट-मोटरवैगन, का प्रदर्शन किया।
- 1908 – लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में अंग्रेजों ने गिरफ्तार किया।
- 1972 – भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
- 1999 – मनोज कुमार पांडे, परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक, वीरगति को प्राप्त हुए।
- 2005 – महेश भूपति और मेरी पियर्स ने विम्बलडन का मिश्रित युगल खिताब जीता।
- 2013 – भारत ने अपने पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का निर्माण शुरू किया।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे प्रसिद्ध जर्मन इंजीनियर और आविष्कारक "कार्ल बेंज" के बारे में।
कार्ल बेंज एक प्रसिद्ध जर्मन इंजीनियर और आविष्कारक थे, जिन्हें आधुनिक ऑटोमोबाइल का जनक माना जाता है। उनका जन्म 25 नवंबर 1844 को जर्मनी के म्युलबर्ग में हुआ था। उन्होंने 1885 में दुनिया की पहली पेट्रोल इंजन से चलने वाली कार "बेंज पेटेंट मोटरवागन" का आविष्कार किया।
कार्ल बेंज की पत्नी बर्था बेंज का योगदान भी उल्लेखनीय है, जिन्होंने 1888 में अपने बच्चों के साथ एक लंबी दूरी की यात्रा कर इस वाहन की विश्वसनीयता सिद्ध की। बाद में उनकी कंपनी "बेंज एंड सी" का मर्सिडीज कंपनी से विलय हुआ, जिससे आज की प्रसिद्ध कंपनी "मर्सिडीज-बेंज" अस्तित्व में आई।
उनकी सोच, परिश्रम और नवाचार की भावना ने पूरी दुनिया को गतिशील बना दिया। 4 अप्रैल 1929 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके योगदान को आज भी हर सड़क पर दौड़ती गाड़ियों में महसूस किया जा सकता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 3 जुलाई को मनाये जाने वाले "अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस" के बारे में:
अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस हर साल 3 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया भर में लोगों, समुदायों और व्यवसायों को प्लास्टिक की थैलियों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ विकल्पों की तलाश करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक वैश्विक आह्वान है।
इसकी शुरुआत 2002 में गैर-सरकारी संगठन द सेंटर फॉर इंटरनेशनल एनवायरनमेंटल लॉ CIEL ने की थी। प्लास्टिक की थैलियां सैकड़ों वर्षों तक टिकी रह सकती हैं और जमीन, पानी और वायु को प्रदूषित करती हैं। प्लास्टिक की थैलियां वन्यजीवों के लिए भी हानिकारक होती हैं।
हम प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग करने से इनकार कर सकते हैं, पुन: प्रयोज्य बैग का उपयोग कर सकते हैं, प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में जागरूकता बढ़ा सकते हैं। हम सब मिलकर प्लास्टिक बैग पर अपनी निर्भरता कम करके अपनी पृथ्वी को स्वच्छ और स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "मटके में सर"
एक बार महाराज कृष्णदेव राय किसी बात पर तेनालीराम से नाराज हो गए। गुस्से आकर उन्होंने तेनालीराम से भरी राजसभा में कह दिया कि कल से मुझे दरबार में अपना मुंह मत दिखाना। उसी समय तेनालीराम दरबार से चला गया।
दूसरे दिन जब महाराज राजसभा की ओर आ रहे थे तभी एक चुगलखोर ने उन्हें यह कहकर भड़का दिया कि तेनालीराम आपके आदेश के खिलाफ दरबार में उपस्थित है। राजा दरबार में पहुंचे। उन्होंने देखा कि सिर पर मिट्टी का एक घड़ा ओढ़े तेनालीराम विचित्र प्रकार की हरकतें कर रहा है।
'तेनालीराम ! ये क्या बेहुदगी है। तुमने हमारी आज्ञा का उल्लंघन किया हैं', महाराज ने कहा। दंडस्वरूप कोडे खाने के तैयार हो जाओ। 'मैंने कौन-सी आपकी आज्ञा नहीं मानी महाराज?' घड़े में मुंह छिपाए हुए तेनालीराम बोला- 'आपने कहा था कि कल मैं दरबार में अपना मुंह न दिखाऊं तो क्या आपको मेरा मुंह दिख रहा है।'
यह सुनते ही महाराज की हंसी छूट गई। वे बोले 'तुम जैसे बुद्धिमान और हाजिरजवाब से कोई नाराज हो ही नहीं सकता। अब इस घड़े को हटाओ और सीधी तरह अपना आसन ग्रहण करो।' यह कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धिमानी, हास्य-बोध और हंसी से जीवन में कई मुश्किलों का समाधान किया जा सकता है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







