सुप्रभात बालमित्रों!
27 जुलाई – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 27 जुलाई है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"जिसके पास धैर्य है वह जो चाहे वह पा सकता है।"
"He that can have patience can have what he wills."
धैर्य का अर्थ है कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहना, प्रतिकूलताओं का सामना दृढ़ता से करना और लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करते रहना। यह कथन हमें सिखाता है कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती।
सपनों को साकार करने के लिए धैर्य, लगन और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता होती है। धैर्यवान व्यक्ति चुनौतियों से नहीं घबराता, बल्कि उनका सामना दृढ़ता से करता है।
धैर्य रखने का मतलब यह नहीं है कि आप निष्क्रिय बैठें। इसका अर्थ है कि आप चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें, असफलताओं से सीखें और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: EDGE : एज “Edge” का अर्थ होता है — किनारा, धार, बढ़त, सीमा, कगार या बढ़त में लाभ। किसी वस्तु या स्थिति की सीमा या शुरुआत को एज कहते हैं।
वाक्य प्रयोग: Be careful, you are standing near the edge of the cliff. सावधान रहो, तुम खाई के किनारे पर खड़े हो।
मध्य कटे तो बनूँ में आन, बोलो क्या है मेरा नाम ?
उत्तर: आँगन
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 27 जुलाई की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1789 – संयुक्त राज्य अमेरिका में पहली फेडरल एजेंसी, डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन अफेयर्स की स्थापना हुई।
- 1836 – दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में एडिलेड शहर की स्थापना हुई, जो बाद में ऑस्ट्रेलिया का प्रमुख नगर बना।
- 1888 – फिलिप प्रैट ने पहले इलेक्ट्रिक ऑटोमोबाइल का प्रदर्शन किया, जिसने आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहनों की नींव रखी।
- 1897 – स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक को ब्रिटिश सरकार ने पहली बार गिरफ्तार किया।
- 1921 – टोरंटो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक फ्रेडरिक बैंटिंग और उनकी टीम ने इंसुलिन की खोज की घोषणा की, जिससे मधुमेह के इलाज में क्रांति आई।
- 1939 – भारत में शाही प्रतिनिधि पुलिस के रूप में केंद्रीय रेलवे पुलिस बल CRPF का गठन हुआ, जो बाद में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल CRPF बना।
- 2015 – भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का शिलॉन्ग में एक सभा के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे प्रसिद्ध वैज्ञानिक और चिकित्सक “फ्रेडरिक बैंटिंग” के बारे में।
फ्रेडरिक बैंटिंग एक प्रसिद्ध कनाडाई वैज्ञानिक और चिकित्सक थे, जिन्हें मधुमेह के इलाज में क्रांति लाने वाले इंसुलिन की खोज के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 14 नवंबर 1891 को कनाडा के ओंटारियो प्रांत में हुआ था।
1921 में, फ्रेडरिक बैंटिंग और उनके सहायक चार्ल्स बेस्ट ने पैनक्रियास से इंसुलिन को अलग करने में सफलता पाई। यह खोज मधुमेह से पीड़ित लाखों लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हुई।
इस अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें 1923 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फ्रेडरिक बैंटिंग ने अपनी खोज को पेटेंट कराने की बजाय जनहित में साझा किया ताकि इंसुलिन हर ज़रूरतमंद को सुलभ हो सके।
21 फरवरी 1941 को एक विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका योगदान आज भी अमूल्य है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 27 जुलाई को मनाये जाने वाले “केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF): स्थापना दिवस” के बारे में:
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) स्थापना दिवस हर वर्ष 27 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन भारत के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल की गौरवशाली शुरुआत को याद करने और उसके वीर जवानों के साहस, सेवा और समर्पण को सम्मान देने का दिन होता है।
CRPF की स्थापना 27 जुलाई 1939 को Crown Representative’s Police के रूप में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद, इसे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल नाम दिया गया और 1949 में संसद के अधिनियम द्वारा इसे कानूनी दर्जा मिला।
यह बल आंतरिक सुरक्षा, नक्सल विरोधी अभियान, आतंकवाद विरोधी कार्यवाही, दंगों को नियंत्रित करने और चुनावों में सुरक्षा व्यवस्था जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस दिन पर देशभर में CRPF के विभिन्न कैंपों और मुख्यालयों में परेड, शपथ समारोह, वीरता पुरस्कार वितरण और शहीदों को श्रद्धांजलि जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यह अवसर CRPF के योगदान को सराहने और देशवासियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाने का प्रतीक होता है।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “चतुर मेहमान”
एक नगर में एक दरजी और उसकी पत्नी रहते थे। वे दोनों अत्यंत लोभी और स्वार्थी थे। उन्हें सबसे बड़ा डर इसी बात का था कि अगर कोई मेहमान आ गया, तो उनके घर का खर्चा बढ़ जाएगा।
एक दिन अचानक उनके घर दो पुराने रिश्तेदार मेहमान बनकर आ गए। दरजी घबरा गया। उसे चिंता सताने लगी कि अब इनकी खातिरदारी करनी पड़ेगी, जिससे समय और सामान दोनों खर्च होगा।
उसने एक चाल सोची और दरजिन से कहा, "जब मैं तुम्हें गालियाँ दूँ, तो तुम भी मुझे गालियाँ देना। फिर मैं छड़ी लेकर तुम्हारे पीछे दौड़ूंगा, तुम आटे की मटकी लेकर बाहर भाग जाना। इससे मेहमानों को लगेगा कि हमारे घर में झगड़ा हो गया है और वे खुद-ब-खुद चले जाएंगे।"
दरजिन तैयार हो गई। योजना के अनुसार, थोड़ी देर बाद दोनों जोर-जोर से झगड़ने लगे। दरजी गज़ लेकर दरजिन के पीछे भागा और दरजिन मटकी उठाकर दौड़ गई। यह सब देख मेहमान चुपचाप मुस्कराए और बोले, "इनकी नीयत समझ आ गई है। यह सब नाटक है। चलो, ऊपर जाकर आराम से सो जाते हैं।"
दरजी और दरजिन यह सोचकर घर लौट आए कि मेहमान डरकर जा चुके होंगे। दोनों खुशी से बातें करने लगे — दरजी बोला, "मैं कितना चतुर हूं जो गज़ लेकर दौड़ा!" दरजिन बोली, "और मैं कितनी चालाक कि मटकी उठाकर भाग गई।"
तभी ऊपर से आवाज आई, "और हम कितने होशियार हैं जो यह सब सुन रहे हैं!" मेहमानों की यह बात सुनते ही दरजी-दरजिन शर्म से गढ़ गए। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।
उन्होंने तुरंत मेहमानों को नीचे बुलाया, माफ़ी मांगी और प्रेमपूर्वक उन्हें स्वादिष्ट भोजन परोसा। यह कहानी हमें सिखाती है कि लालच और छल की नीति अंततः व्यक्ति को शर्मिंदा ही करती है। मेहमानों का स्वागत और सेवा भारतीय परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सच्ची विनम्रता और आतिथ्य से ही मान-सम्मान बढ़ता है, न कि चालाकी और धोखे से।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







