27 April AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢







ES INSIDE THIS BOX ]

आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

27 अप्रैल – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 27 अप्रैल है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

"अपने जीवन में स्वयं के स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता दें।" "Give first priority to your own health in your life."

इस सुविचार का अर्थ है कि हमें अपने जीवन में सेहत को सबसे अधिक महत्व देना चाहिए। अक्सर लोग काम, पैसा, या दूसरों की ज़रूरतों में खुद की सेहत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जिससे बाद में थकान, बीमारी, या तनाव हो सकता है। यह संदेश बताता है कि स्वस्थ शरीर और शांत मन के बिना जीवन की अन्य उपलब्धियाँ अधूरी हैं। इसलिए, नियमित व्यायाम, पौष्टिक खाना, मानसिक शांति के लिए ध्यान या आराम, और अपनी भावनाओं को संभालना ज़रूरी है। सेहत को प्राथमिकता देकर ही आप लंबे समय तक खुशहाल और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Consent : सहमति : का अर्थ है किसी कार्य, निर्णय, या प्रस्ताव के लिए स्वेच्छा से दी गई सहमति या अनुमति। यह ज़बरदस्ती के बिना, पूरी जानकारी के आधार पर और स्वतंत्र इच्छा से दिया जाने वाला समर्थन है।

उदाहरण वाक्य : Children can go on the school trip only after their parents’ consent. माता-पिता की सहमती के बाद ही बच्चे स्कूल ट्रिप पर जा सकते हैं।

🧩 आज की पहेली
हरे पीले काले, खट्टे मीठे रस से भरे, खाने मे लगते बड़े स्वादिष्ट, कोई जानता है इनका नाम?

जवाब - अंगूर
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 27 अप्रैल की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1526: बाबर ने पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली पर कब्जा किया। बेहतर सैन्य रणनीति और तोपखाने के बल पर मुगल साम्राज्य की नींव रखी गई।
  • 1848: कलकत्ता विश्वविद्यालय ने भारत में पहली बार महिलाओं को उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय में प्रवेश की अनुमति दी, जो शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम था।
  • 1912: प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री और नृत्यांगना जोहरा सहगल का जन्म हुआ। उन्होंने भारतीय कला और सिनेमा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 1945: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन और सोवियत संघ की सेनाओं ने नाजी जर्मनी को हराने के लिए एकजुट होकर अंतिम हमला शुरू किया।
  • 1960: नई दिल्ली में सैन्य रणनीति और रक्षा अध्ययन के लिए प्रमुख संस्थान राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (NDC) की स्थापना हुई।
  • 1963 अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन परिषद की स्थापना हुई: इस दिन की स्थापना को याद करते हुए 1995 से 27 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दिवस मनाया जाता है।
  • 1972: चंद्रमा पर अन्वेषण के बाद नासा का अपोलो 16 सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस आया।
  • 2005: दुनिया के सबसे बड़े यात्री विमान एयरबस A-380 ने फ़्रांस में सफलतापूर्वक परीक्षण उड़ान भरी।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – ज़ोहरा सहगल

ज़ोहरा सहगल भारतीय रंगमंच, नृत्य और सिनेमा की एक प्रतिष्ठित और सदाबहार शख्सियत थीं। सात दशकों से अधिक के अपने लंबे और शानदार करियर में, उन्होंने कला के विभिन्न रूपों में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

ज़ोहरा सहगल का जन्म 27 अप्रैल 1912 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक पारंपरिक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनका पूरा नाम साहिबज़ादी ज़ोहरा बेगम मुमताज़-उल्ला खान था। कला के प्रति उनके जुनून ने उन्हें रूढ़िवादी बंधनों को तोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लाहौर में शिक्षा प्राप्त की और फिर उच्च शिक्षा के लिए यूरोप गईं, जहाँ जर्मनी के ड्रेसडेन में उन्होंने मैरी विगमैन के स्कूल से आधुनिक नृत्य का प्रशिक्षण लिया।

भारत लौटने पर, वह 1935 में प्रसिद्ध नर्तक उदय शंकर की नृत्य मंडली में शामिल हो गईं और दुनिया भर मंल प्रदर्शन किया। यहीं उनकी मुलाकात अपने भावी पति कामेश्वर सहगल से हुई। नृत्य के बाद, उन्होंने अभिनय की ओर रुख किया और लगभग 14 वर्षों तक पृथ्वी थिएटर्स के साथ जुड़ी रहीं, जहाँ उन्होंने कई नाटकों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। इसके बाद वे इंडियन पीपुल्स थिएटर एसोसिएशन (IPTA) से भी जुड़ीं।

1960 के दशक में वे लंदन चली गईं और वहाँ ब्रिटिश टेलीविजन, फिल्मों और थिएटर में काम किया। भारत लौटने पर, उन्होंने वृद्धावस्था में हिंदी सिनेमा में एक नई और बेहद सफल पारी शुरू की। उन्हें अक्सर ऊर्जावान, जिंदादिल और शरारती दादी या नानी की भूमिकाओं में देखा गया, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया। 'भाजी ऑन द बीच', 'हम दिल दे चुके सनम', 'दिल से..', 'वीर-ज़ारा', 'चीनी कम', 'बेंड इट लाइक बेकहम' और 'सांवरिया' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहा गया।

उन्हें कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री (1998), पद्म विभूषण (2010) और संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप (2004) जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाज़ा गया। 10 जुलाई 2014 को 102 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

ज़ोहरा सहगल का जीवन हमें प्रेरणा देता है कि कि जुनून, कड़ी मेहनत और जीवन के प्रति उत्साह से किसी भी उम्र में सफलता हासिल की जा सकती है और चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

🎉 आज का दैनिक विशेष – अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 27 अप्रैल को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दिवस” के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दिवस हर साल 27 अप्रैल को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह दिन डिज़ाइन के महत्व और हमारे जीवन तथा समाज पर इसके प्रभाव को पहचानने और मनाने के लिए समर्पित है। इसकी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन परिषद (ico-D) द्वारा की गई थी, जो डिज़ाइन पेशेवरों का वैश्विक संगठन है।

27 अप्रैल की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन 1963 में ico-D (जिसे पहले अंतर्राष्ट्रीय ग्राफिक डिजाइन संघ परिषद - Icograda के नाम से जाना जाता था) की स्थापना हुई थी। शुरुआत में इसे 'विश्व ग्राफिक्स दिवस' कहा जाता था, लेकिन बाद में ग्राफिक डिज़ाइन के साथ-साथ अन्य सभी प्रकार के डिज़ाइन के महत्व को शामिल करने के लिए इसका नाम बदलकर 'अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दिवस' कर दिया गया।

इस दिवस का मुख्य उद्देश्य डिज़ाइन की शक्ति को उजागर करना है - कैसे यह हमारे दैनिक जीवन को आकार देता है, संचार को बेहतर बनाता है, नवाचार को प्रेरित करता है और जटिल समस्याओं का समाधान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय डिज़ाइन दिवस हमें डिज़ाइनरों के महत्वपूर्ण योगदान और रचनात्मकता की याद दिलाता है और यह प्रेरित करता है कि कैसे डिज़ाइन का उपयोग एक बेहतर, अधिक कार्यात्मक और सुंदर दुनिया बनाने के लिए किया जा सकता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – "मूर्तिकार की परीक्षा"

एक दिन, कलाधर नाम का एक प्रसिद्ध मूर्तिकार अपनी कार्यशाला में तल्लीन था। अचानक, उसे दो व्यक्तियों की फुसफुसाहट सुनाई दी। "बेचारा मूर्तिकार," एक ने कहा, "उसका समय समाप्त हो रहा है। कल, हमें उसकी आत्मा को ले जाना होगा।"

मूर्तिकार का दिल धड़कने लगा। मौत का सामना कौन करना चाहता है? उसने सोचना शुरू किया। फिर, उसे एक विचार आया। उसने अपनी मूर्तिकला कौशल का उपयोग करके, उसने हूबहू अपने जैसी पांच मूर्तियां तराशीं। सुबह होते ही यमदूत कार्यशाला में आ धमके। उन्हें मूर्तियों की कतार दिखी। "इनमें से कौन असली है?" एक ने पूछा। वे भ्रमित थे। सभी मूर्तियां बिल्कुल एक जैसी दिख रही थीं। तभी, एक यमदूत को एक तरकीब सूझी। उसने कहा, "देखो, इस मूर्ति की आँखें थोड़ी असमान हैं और इस मूर्ति का अंगूठा गायब है।" यह सुनकर, कलाधर आगबबूला हो गया। उसका अहंकार जैसे फूट पड़ा। वह अपनी कला में कोई दोष बर्दाश्त नहीं कर पाया और चीखकर बोला "मूर्ख! "मेरी मूर्तियां त्रुटिहीन हैं!" यह कहते कहते उनकी आवाज धीमी पड़ने लगी। जैसे ही उसका बोलना बंद हुआ, उसका सिर एक तरफ झुक गया और उसका शरीर लुढ़ककर मूर्तियों के बीच गिर पड़ा।। यमदूत उसकी आत्मा को ले जा चुके थे।

यह कहानी हमें सिखाती है कि अहंकार मनुष्य को उसकी कमियों से अनजान बनाकर विनाश की ओर धकेलता है। इसलिए हमें हमेशा अहंकार से बचना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

Tags

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.