26 August AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢

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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

26 अगस्त – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 26 अगस्त है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "सफलता को कभी अपने सिर पर न चढ़ने दें। और असफलता को कभी दिल में न उतरने दें।"
"Never let success get to your head. Never let failure get to your heart."

जब हम सफल होते हैं तो खुशी और गर्व महसूस करना स्वाभाविक है, लेकिन यह जरूरी है कि सफलता हमें अहंकारी न बनाए। घमंड व्यक्ति की समझ को धूमिल कर देता है और रिश्तों व व्यक्तिगत प्रगति को नुकसान पहुँचाता है। सफलता हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे, पर कभी भी दूसरों को छोटा दिखाने या खुद को सर्वश्रेष्ठ मानने का अहंकार न लाए।

इसी प्रकार, असफलता हर किसी के जीवन का हिस्सा है। यह हमें निराश कर सकती है, लेकिन इसका असली उद्देश्य हमें सीख देना और हमारी कमजोरियों को पहचानने का अवसर देना है। असफलता अंत नहीं, बल्कि नए प्रयास और सुधार की शुरुआत है। इसलिए जीवन में सफलता मिले तो विनम्र रहें, और असफलता आए तो हिम्मत न हारें। दोनों ही परिस्थितियाँ हमें बेहतर और परिपक्व बनाने के लिए होती हैं। असली सफलता वही है, जहाँ व्यक्ति सीखते हुए निरंतर आगे बढ़ता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: KEEP कीप का अर्थ: रखना, बनाए रखना या सुरक्षित रखना। "KEEP" का प्रयोग अक्सर लगातार जारी रखने के भाव में किया जाता है।

उदाहरण वाक्य: Keep calm – शांत रहें। Keep trying – कोशिश करते रहें। Keep it up – अच्छा काम करते रहें। Keep in touch – संपर्क में रहें। Keep smiling – मुस्कुराते रहें। Keep working hard – मेहनत करते रहें। Keep safe – सुरक्षित रहें। Keep going – चलते रहें / हिम्मत न हारें।

🧩 आज की पहेली
वह कौन है जिसके पास मुंह नहीं है लेकिन बोलता खूब है।
उत्तर: रुपया
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 26 अगस्त की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1303 में, आज ही के दिन, अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया था। यह आक्रमण राजपूत इतिहास का एक काला अध्याय था। चित्तौड़गढ़ के किले को बचाने के लिए राजपूतों ने जौहर किया था, जो उनके साहस, बलिदान और स्वाभिमान का प्रतीक है। यह घटना मलिक मुहम्मद जायसी के काव्य "पद्मावत" में भी वर्णित है।
  • 1789: फ्रांसीसी क्रांति के दौरान, फ्रांस की राष्ट्रीय संविधान सभा ने ऐतिहासिक दस्तावेज मानव और नागरिक अधिकारों Declaration of the Rights of Man and of the Citizen की घोषणा की, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे सिद्धांतों की नींव रखता है।
  • 1883: इंडोनेशिया में क्रकटोआ ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ, जो इतिहास के सबसे बड़े ज्वालामुखी विस्फोटों में से एक था। इसने वैश्विक जलवायु को प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप कई वर्षों तक सूर्यास्त के रंग अधिक तीव्र दिखाई दिए। इस विस्फोट से उत्पन्न सुनामी ने हजारों लोगों की जान ली।
  • 26 अगस्त 1910 को, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और भारत में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्थापक मदर टेरेसा का जन्म स्कोप्जे अब मैसेडोनिया में हुआ। उन्होंने कोलकाता में गरीबों और बीमारों की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया।
  • 1920: संयुक्त राज्य अमेरिका में 19वां संशोधन लागू हुआ, जिसके तहत महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला। यह महिला मताधिकार आंदोलन की एक बड़ी जीत थी। इस ऐतिहासिक घटना को याद रखने के लिए, हर साल 26 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय महिला समानता दिवस Women's Equality Day मनाया जाता है।
  • 1970: अमेरिका में महिला मताधिकार की 50वीं वर्षगांठ पर, हजारों महिलाओं ने न्यूयॉर्क और अन्य शहरों में समानता के लिए प्रदर्शन किया।
  • 2004: हिंद महासागर में 2004 की सुनामी से पहले, 26 अगस्त को भारत और अन्य देशों ने सुनामी चेतावनी प्रणालियों के विकास पर चर्चा शुरू की।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – मदर टेरेसा

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “मदर टेरेसा” के बारे में।

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को स्कोप्जे तब ऑटोमन साम्राज्य, अब उत्तरी मैसेडोनिया में हुआ था। एक धार्मिक और परोपकारी अल्बानियाई परिवार में जन्मीं मदर टेरेसा ने 18 वर्ष की आयु में लोरेटो सिस्टर्स से जुड़ने का निर्णय लिया और 1929 में भारत आईं। उन्होंने कोलकाता के लोरेटो कॉन्वेंट में शिक्षिका के रूप में कार्य किया, लेकिन 1946 में एक ट्रेन यात्रा के दौरान उन्हें “ईश्वर का आह्वान” प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपना जीवन गरीबों और असहायों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। 1950 में उन्होंने “मिशनरीज ऑफ चैरिटी” की स्थापना की, जिसका उद्देश्य “सबसे गरीबों में सबसे गरीब” की सेवा करना था। इस संगठन ने अनाथों, बीमारों, बेघरों और मरने वालों की सहायता हेतु अनेक आश्रय, स्कूल और अस्पताल स्थापित किए। उनके कार्यों का विस्तार भारत से लेकर विश्व के कई देशों तक हुआ। उन्हें उनके मानवीय योगदान के लिए पद्म भूषण 1962, नोबेल शांति पुरस्कार 1979 और भारत रत्न 1980 जैसे सम्मान प्राप्त हुए। यद्यपि उनके कार्यों को लेकर कुछ आलोचनाएँ भी हुईं, फिर भी उनके समर्पण और निस्वार्थ सेवा को विश्वभर में सराहा गया। 5 सितंबर 1997 को कोलकाता में उनका निधन हुआ और बाद में 2016 में उन्हें संत घोषित किया गया। मदर टेरेसा ने संसार को यह संदेश दिया कि करुणा, सादगी और निस्वार्थ सेवा से मानवता के सबसे कठिन दुखों को भी दूर किया जा सकता है।

🎉 आज का दैनिक विशेष – महिला समानता दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 26 अगस्त को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय महिला समानता दिवस” के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय महिला समानता दिवस प्रतिवर्ष 26 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन 1920 में अमेरिका के संविधान के उन्नीसवें संशोधन को अपनाने की स्मृति में मनाया जाता है। इस संशोधन ने राज्यों और संघीय सरकार को लिंग के आधार पर नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने पर रोक लगाई। इस प्रकार अमेरिका में महिलाओं को पहली बार समान मतदान का अधिकार मिला।

विश्व स्तर पर देखा जाए तो न्यूज़ीलैंड दुनिया का पहला देश था जिसने 1893 में महिलाओं को मतदान का अधिकार देकर महिला समानता की शुरुआत की। भारत में स्वतंत्रता के बाद से ही महिलाओं को मतदान का अधिकार प्राप्त था, लेकिन पंचायतों और नगर निकायों में चुनाव लड़ने का अधिकार उन्हें 73वें संविधान संशोधन साल 1992 में तात्कालीन प्रधानमन्त्री राजीव गांधी के प्रयासों से मिला। इसके परिणामस्वरूप आज भारत की पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी 50% से अधिक है।

इस दिवस की शुरुआत अमेरिका की प्रसिद्ध महिला वकील बेल्ला अब्ज़ुग के प्रयासों से हुई, जिन्होंने 1971 से 26 अगस्त को "महिला समानता दिवस" के रूप में मनाने की पहल की। यह दिन महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता फैलाने, महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने और उनके सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक योगदान का सम्मान करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह दिन हमें एक ऐसे समाज की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करता है, जहां सभी को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – बुद्धिमान सियार

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “बुद्धिमान सियार”

एक समय की बात है, एक जंगल में एक शेर के पैर में कांटा चुभ गया था। जख्म के कारण शेर दौड़ नहीं पा रहा था। धीरे-धीरे घिसटते हुए वह एक गुफा के पास पहुंचा। गुफा गहरी और संकरी थी, ठीक वैसी जैसी जंगली जानवरों का बसेरा होता है। उसने अंदर झाँका तो गुफा खाली थी, लेकिन चारों ओर जानवर के रहने के निशान थे। शायद उसका रहने वाला अभी बाहर गया हुआ था। शेर चुपचाप दुबककर बैठ गया ताकि जब वह जानवर लौटे तो वह उसे दबोच ले।

उस गुफा में एक चालाक सियार रहता था। वह दिन में बाहर घूमता रहता और रात को वापस लौट आता। उस दिन भी सूरज डूबने के बाद वह लौटा। गुफा के बाहर किसी बड़े जानवर के पैरों के निशान देखकर वह चौंक गया। उसे शक हुआ कि कोई शिकारी उसके शिकार की आस में घात लगाए बैठा होगा। उसने सोच-विचार कर एक चाल चली। गुफा के मुहाने से थोड़ी दूर जाकर उसने आवाज दी, "गुफा! ओ गुफा!"

गुफा में चुप्पी छाई रही। उसने फिर पुकारा, "अरे ओ गुफा, तुम बोलती क्यों नहीं?" भूख से परेशान शेर दम साधे बैठा था। उसे बस इतना इंतजार था कि सियार अंदर आए और वह उसे पकड़ ले। सियार ने फिर जोर से बोला, "ओ गुफा! रोज़ तुम मेरी पुकार का जवाब देती हो। आज चुप क्यों हो? मैंने पहले ही कह रखा है कि जिस दिन तुम मुझे नहीं बुलाओगी, उस दिन मैं किसी दूसरी गुफा में चला जाऊंगा। अच्छा तो मैं चला।"

यह सुनकर शेर घबरा गया। उसे लगा कि शायद गुफा सचमुच सियार को बुलाती होगी। उसने अपनी आवाज बदलकर कहा, "सियार राजा, मत जाओ। अंदर आओ ना। मैं कब से तुम्हारी राह देख रही थी।" सियार शेर की आवाज पहचान गया और उसकी मूर्खता पर हंसता हुआ वहाँ से चला गया। मूर्ख शेर उसी गुफा में भूखा-प्यासा मर गया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि सतर्क व्यक्ति का कभी अहित नहीं होता। जीवन में सफल होने के लिए हमें सतर्क रहना, धैर्य रखना, बुद्धिमानी से काम लेना और अहंकार से बचना जैसे गुणों को अपने अंदर विकसित करना होगा।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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