सुप्रभात बालमित्रों!
25 मई – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 25 मई है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है,
आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में,
जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"सफल वही होता है जो हर परिस्थिति में हंसना सीख लेता है"
"Success belongs to those who learn to smile in every situation."
यहाँ "हंसना" आत्मविश्वास और धैर्य का प्रतीक है। जो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखकर सकारात्मक रहता है, वह समस्याओं को समाधान के नज़रिए से देखता है। चाहे कितनी भी मुश्किल घड़ी क्यों न हो, यदि हम अपने चेहरे पर मुस्कान बनाए रखें और सकारात्मक सोच रखें, तो हम हर चुनौती का सामना आसानी से कर सकते हैं। हंसी न केवल मन को शांत करती है बल्कि हमें अंदर से मजबूत भी बनाती है। इसलिए, सफलता पाने के लिए जरूरी है कि हम जीवन के उतार-चढ़ाव को स्वीकार करें और हर हाल में खुश रहने की कला सीखें।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है:
Integrity : ईमानदारी, नैतिकता, सत्यनिष्ठा
वह गुण जिसके कारण व्यक्ति अपने सिद्धांतों और नैतिक मानदंडों पर दृढ़ता से कायम रहता है।
वाक्य प्रयोग : Maintaining integrity in difficult situations shows true character.
कठिन परिस्थितियों में ईमानदारी बनाए रखना असली चरित्र को दर्शाता है।
जवाब : दिन
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास:
इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 25 मई की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 25 मई 1886: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी, गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य, और आज़ाद हिंद फौज के प्रेरणास्रोत रास बिहारी बोस का जन्म हुआ।
- 25 मई 1915: महात्मा गांधी ने अहमदाबाद में साबरमती आश्रम स्थापित किया, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना।
- 25 मई 1963: अफ़्रीकी एकता संगठन (OAU) की स्थापना हुई, जो अब अफ़्रीकी संघ (AU) के नाम से जाना जाता है। यह दिन अफ़्रीका दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 25 मई 1979: न्यूयॉर्क से 6 वर्षीय एटन पैट्ज़ के लापता होने की घटना की याद में हर साल 25 मई को अंतर्राष्ट्रीय गुमशुदा बाल दिवस मनाया जाता है।
- 25 मई 2008: थायराइड रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व थायराइड दिवस मनाने की शुरुआत की गई।
- 2024: संयुक्त राष्ट्र ने 25 मई को विश्व फुटबॉल दिवस घोषित किया — 1924 के पहले अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे भारत की आजादी की लड़ाई के महान क्रांतिकारी ‘रास बिहारी बोस’ के बारे में।
रास बिहारी बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी, राष्ट्रभक्त और संगठनकर्ता थे। इनका जन्म 25 मई 1886 को बंगाल के बर्दवान ज़िले में हुआ था। प्रारंभ से ही वे तेजस्वी, राष्ट्रवादी विचारों से प्रेरित और अंग्रेजों की गुलामी के घोर विरोधी थे। उन्होंने 1912 में वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंकने की योजना में भाग लिया और भूमिगत हो गए।
बाद में जापान जाकर उन्होंने गदर पार्टी के साथ मिलकर भारतीय स्वतंत्रता का बिगुल बजाया। उन्होंने इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की स्थापना की और आज़ाद हिंद फौज की नींव रखी, जिसे जिसे बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आगे बढ़ाया। उनका जीवन भारत की आज़ादी के लिए समर्पित रहा। उनका निधन 21 जनवरी 1945 को जापान में हुआ। रास बिहारी बोस का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारियों की प्रथम पंक्ति में लिया जाता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 25 मई को मनाये जाने वाले “विश्व फुटबॉल दिवस” के बारे में:
विश्व फुटबॉल दिवस यानी World Football Day हर वर्ष 25 मई को मनाया जाता है। यह दिवस फुटबॉल के खेल की वैश्विक लोकप्रियता, सामाजिक एकता और शांति स्थापना में उसके योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। वर्ष 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक विशेष प्रस्ताव पारित कर 25 मई को ‘विश्व फुटबॉल दिवस’ घोषित किया। यह दिन 1924 में पेरिस में आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल टूर्नामेंट की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में चुना गया।
फुटबॉल केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह जन-जन को जोड़ने वाली भाषा बन चुका है। यह टीम वर्क, अनुशासन, सहनशीलता और रणनीतिक सोच को विकसित करता है। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मनाने के पीछे यह संदेश दिया है कि खेलों के माध्यम से विश्व में शांति, सहयोग, और समानता को बढ़ावा दिया जा सकता है। विश्व फुटबॉल दिवस हमें प्रेरणा देता है कि हम खेलों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं और सकारात्मक सोच, स्वास्थ्य तथा सामाजिक एकता को बढ़ावा दें।
एक बार की बात है। कुछ बच्चे मैदान में खेल रहे थे। तभी चिड़ियों का एक झुंड उड़ता हुआ आया और मैदान के एक कोने में दाना चुगने लगा। नन्हीं-नन्हीं रंग-बिरंगी चिड़ियों को फुदकते देख एक लड़के को शरारत सूझी। उसने चुपके से एक चिड़िया को पकड़ लिया और अपनी कलम की स्याही से रंग दिया। फिर उसे उड़ा दिया।
जब रंगी हुई चिड़िया अपने झुंड के पास गई तो उसकी साथियों ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया। जब वह उनके पास जाती, तो वे फुर्र से उड़ जातीं। बेचारी चिड़िया बहुत परेशान हुई। उसे समझ नहीं आया कि अब वह जाए तो कहां जाए।
वह अकेली एक कोने में बैठ गई। इतने में वही शरारती लड़का फिर आया। इस बार उसने उस पर कंकड़ फेंका। कंकड़ लगते ही चिड़िया बेहोश हो गई। उसने चिड़िया को उठाया और उसके पंख नोचने लगा। दर्द के मारे चिड़िया बेहोश होने लगी थी, तभी एक दूसरा लड़का, जो दयालु था, दौड़कर आया और चिड़िया पर ठंडा पानी छिड़का।
चिड़िया को होश आ गया, लेकिन उसका शरीर दर्द से कांप रहा था। पंख नोंचे जाने से उसे भयंकर पीड़ा हो रही थी। तभी शरारती लड़का एक तिनका लेकर उसकी आंखें फोड़ने की कोशिश करने लगा। अब चिड़िया डर गई, लेकिन इस बार उसने हार मानने की बजाय लड़ने का निश्चय किया।
उसने पूरी ताकत से लड़के की उंगली पर चोंच मारी। लड़का चिल्ला उठा। चिड़िया का आत्मबल जाग चुका था। उसने एक के बाद एक तीखे वार किए। लड़का बौखला गया और पीछे हटते हुए गड्ढे में गिरकर बेहोश हो गया।
चिड़िया भी घायल थी, लेकिन अपने आत्म-बल से उसने न केवल अपनी रक्षा की, बल्कि उस निर्दयी लड़के को सबक भी सिखा दिया।
यह कहानी हमें सिखाती है कि "जब आत्म-रक्षा की भावना जाग जाती है, तब कमजोर से कमजोर प्राणी भी अत्याचार के विरुद्ध खड़ा हो जाता है। साहस और आत्मविश्वास से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। परिस्थितियाँ चाहे जितनी कठिन क्यों न हों, अगर हम हार न मानें और डटकर सामना करें, तो जीत हमारी ही होती है।"
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था,
कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ
रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में।
आपका दिन शुभ हो!







