
सुप्रभात बालमित्रों!
25 जून – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 25 जून है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"आपका स्वभाव ही आपका भविष्य तय करता है।
Your nature decides your future."
यह सच है कि हमारे जीवन में कई कारक होते हैं जो हमारे भविष्य को प्रभावित करते हैं, जैसे कि भाग्य, परिस्थितियाँ और opportunities यानी मौके। लेकिन हमारा स्वभाव निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि हम सकारात्मक स्वभाव विकसित करने का प्रयास करते हैं, तो हम सफलता और खुशी की संभावना बढ़ा सकते हैं।
हमारे पास अपनी परिस्थितियों को चुनने और अपनी आदतों को बदलने की शक्ति है, भले ही वे हमेशा आसान न हों। अपने स्वभाव में सकारात्मक बदलाव करके, हम अपने जीवन के पाठ्यक्रम को बेहतर बना सकते हैं और एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: ECOSYSTEM: इकोसिस्टम: पारिस्थितिकी तंत्र – यानी एक ऐसा प्राकृतिक तंत्र जिसमें जीव जानवर, पेड़-पौधे, सूक्ष्मजीव आदि और उनका वातावरण एक-दूसरे के साथ सामंजस्य में रहते हैं और एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं।
उदाहरण वाक्य: Forests are one of the richest ecosystems on Earth. जंगल पृथ्वी के सबसे समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक हैं।
जवाब: खामोशी Silence
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 25 जून की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1908: सुचेता कृपलानी, का जन्म हुआ वे भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं।
- 25 जून 1913 को बाबा सोहन सिंह भकना की अध्यक्षता में गदर पार्टी का गठन हुआ। यह संगठन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय था।
- 25 जून 1932 को भारतीय क्रिकेट टीम ने लंदन के लॉर्ड्स मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ खेला।
- 25 जून 1947 को ऐनी फ्रैंक की "डायरी ऑफ ए यंग गर्ल" पहली बार प्रकाशित हुई।
- 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सिफारिश पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल की घोषणा की।
- 25 जून 1983 को भारत ने लंदन में प्रूडेंशियल विश्व कप के फाइनल में वेस्टइंडीज को 43 रनों से हराकर पहली बार क्रिकेट विश्व कप जीता।
- 25 जून 2009 को विश्व प्रसिद्ध पॉप स्टार माइकल जैक्सन का निधन हुआ।
- 25 जून 2011 को पहली बार "अंतरराष्ट्रीय नाविक दिवस" मनाया गया।
- 25 जून 2011 को विटिलिगो रिसर्च फाउंडेशन ने विश्व विटिलिगो दिवस की शुरुआत की।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे "सुचेता कृपलानी" के बारे में।
सुचेता कृपलानी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख सेनानी, समाजसेवी और उत्तर प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। उनका जन्म 25 जून 1908 को हरियाणा के अंबाला में एक बंगाली परिवार में हुआ था। सुचेता ने अपनी शिक्षा दिल्ली और लाहौर में पूरी की और युवावस्था में ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गईं।
वे महात्मा गांधी के विचारों से गहरे प्रभावित थीं और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया। स्वतंत्रता के बाद, वे संविधान सभा की सदस्य रहीं और 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। उनके कार्यकाल में सामाजिक सुधार, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर विशेष ध्यान दिया गया।
सुचेता एक कुशल प्रशासक और समाजसेवी थीं, जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक समानता के लिए निरंतर कार्य किया। उनका जीवन नारी शक्ति, देशभक्ति और सामाजिक सेवा का प्रतीक है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 25 जून को मनाये जाने वाले "विश्व विटिलिगो दिवस" के बारे में:
विटिलिगो यानी सफ़ेद दाग त्वचा से जुड़ा एक विकार है। इससे पीड़ित व्यक्ति की त्वचा का रंग बदल जाता है। विटिलिगो से जूझ रहे लोगों को आज भी हीन भावना की नजरों से देखा जाता है। इस बीमारी के प्रति लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 25 जून को विश्व विटिलिगो दिवस मनाया जाता है।
इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों में इस त्वचा संबंधी विकार की समस्या, विटिलिगो से पीड़ित व्यक्ति की मदद करना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। एक शोध के अनुसार, दुनिया में हर 100 व्यक्ति में से 1 व्यक्ति विटिलिगो की समस्या से जूझ रहा है। विश्व विटिलिगो दिवस को मनाने की शुरुआत 2011 में द विटिलिगो रिसर्च फाउंडेशन द्वारा की गई थी।
यह तारीख इसलिए खास है क्योंकि 25 जून को ही फेमस पॉप स्टार माइकल जैक्सन की पुण्यतिथि होती है। माइकल जैक्सन ने इंटरव्यू के दौरान विटिलिगो से पीड़ित व्यक्ति की लाइफ कैसे स्ट्रगल करती है, इसके बारे में खुलकर बात की थी। माइकल जैक्सन खुद विटिलिगो से पीड़ित थे।
अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: ""आलसी आरव"
एक गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। वह थोड़ा मोटा था, इसलिए गाँव के कुछ बच्चे उसे "मोटू" कहकर चिढ़ाते थे। एक दिन गाँव के बच्चे मैदान में फुटबॉल खेल रहे थे। आरव भी खेलने पहुँचा, लेकिन वह ठीक से दौड़ नहीं पा रहा था। कुछ देर में वह थक गया और हार मानकर बैठ गया। यह देखकर बच्चे उस पर हँसने लगे।
आरव को बहुत बुरा लगा। उसने सोच लिया कि अब वह कभी खेलने नहीं जाएगा। वह धीरे-धीरे घर में ही रहने लगा, खाना खाता और आराम करता रहता। कुछ ही समय में वह पूरी तरह आलसी हो गया।
एक दिन उसकी माँ ने देखा कि आरव लगातार खाने और सोने में ही लगा है। चिंतित होकर उन्होंने घर की सारी खाने की चीज़ें छिपा दीं। लेकिन आरव कहाँ मानने वाला था! एक दोपहर, जब माँ सो रही थीं, वह चुपके से रसोई में घुस गया और खाने की तलाश करने लगा।
वह एक-एक डिब्बा खोल रहा था, तभी ऊपर रखी आटे की थैली उसके सिर पर गिर गई। सारा आटा उसके सिर से पाँव तक गिर गया और वह सफेद भूत जैसा दिखने लगा। माँ की नींद खुली तो रसोई से आवाज़ सुनाई दी। वह समझीं कि शायद बिल्ली आई है। लेकिन जब उन्होंने अंदर जाकर आरव को देखा तो उनकी हँसी छूट गई।
आरव शर्म से सिर झुकाकर खड़ा था। उसने अपनी गलती मान ली और माँ से माफ़ी माँगी। आरव ने माँ से वादा किया कि अब वह आलसी नहीं बनेगा और ज़रूरत से ज़्यादा नहीं खाएगा। माँ ने प्यार से उसे समझाया, "बेटा, गलती करना बुरा नहीं है, लेकिन उससे सीखना ज़रूरी है।"
इसके बाद आरव ने बदलाव शुरू कर दिया। वह रोज़ थोड़ा-थोड़ा व्यायाम करने लगा, स्वस्थ खाना खाने लगा और फिर से खेलकूद में हिस्सा लेने लगा। कुछ ही हफ्तों में वह पहले से ज़्यादा फुर्तीला और मज़बूत हो गया। अब जब भी उसे आलस आता, वह माँ की बात याद करता और बाहर खेलने निकल जाता।
धीरे-धीरे उसके दोस्त भी उसे "मोटू" नहीं, बल्कि "चैंपियन" कहकर पुकारने लगे। कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में कई चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन हार मानने के बजाय हमें उनका सामना करना चाहिए और खुद को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, माता-पिता का मार्गदर्शन स्वीकार करना, और हार न मानने का जज्बा रखना सफलता प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!






