सुप्रभात बालमित्रों!
25 जनवरी – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 25 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"हर कोशिश हमे हमारी मंजिल के करीब लाती है। "Every effort brings us closer to our destination."
यह कथन हमें बताता है कि निरंतर प्रयास और मेहनत से हम अपने लक्ष्यों के करीब पहुँच सकते हैं। हमारी हर छोटी सी कोशिश, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, हमें हमारे लक्ष्य की ओर एक कदम और करीब ले जाती है। निरंतर प्रयास और धैर्य से ही हम कठिनाइयों को पार कर सकते हैं और अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। हमें अपनी मेहनत और प्रयासों पर भरोसा रखना चाहिए और निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: LANDSCAPE : लैंडस्केप : प्राकृतिक दृश्य जिसमें पहाड़, घाटियां, नदियाँ, जंगल, समुद्र तट, पेड़-पौधे आदि शामिल हो सकते हैं।
लैंडस्केप किसी क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं, पर्यावरण और प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाने के लिए उपयोग होता है। इसका उपयोग चित्रकला, फोटोग्राफी और अन्य कलाओं में भी किया जाता है, जहाँ प्राकृतिक दृश्य को कैनवास पर उकेरा जाता है या कैमरे में कैद किया जाता है।
उत्तर : 11 दिन
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 25 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1755: रूस में मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी की आधिकारिक स्थापना हुई। यह यूरोप के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है।
- 1924: फ्रांस के शैमॉनिक्स में प्रथम शीतकालीन ओलंपिक खेलों का उद्घाटन हुआ।
- 1948 से हर साल 25 जनवरी को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है।
- 1950: भारतीय संविधान के लागू होने के एक दिन पहले भारत निर्वाचन आयोग Election Commission of India की स्थापना हुई। इसी कारण 2011 से हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।
- 1971: हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया और यह भारत का 18वाँ राज्य बना। इसीलिए हिमाचल प्रदेश में 25 जनवरी को राज्य स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- 1980: प्रसिद्ध समाजसेवी मदर टेरेसा को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
- 1983: भूदान आंदोलन के प्रणेता आचार्य विनोबा भावे को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
अभ्युदय वाणी में अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व ' आचार्य विनोबा भावे’ के बारे में।
आचार्य विनोबा भावे भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और आध्यात्मिक गुरु थे। उन्हें भारत का राष्ट्रीय अध्यापक भी कहा जाता था। महात्मा गांधी के अनुयायी होने के नाते, उन्होंने गांधीजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विनोबा भावे का जन्म 11 सितंबर, 1895 को महाराष्ट्र के गाहोदे गांव में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही प्राप्त की और बाद में महात्मा गांधी के आश्रम में रहकर आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण की। विनोबा भावे ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से भाग लिया। उन्होंने असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इस दौरान उन्हें कई बार ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार किया और जेल भेजा गया।
विनोबा भावे ने भूदान आंदोलन की शुरुआत की। इस आंदोलन के तहत उन्होंने जमींदारों से अनुरोध किया कि वे अपनी भूमि गरीब किसानों को दान कर दें। भूदान आंदोलन के माध्यम से विनोबा भावे ने सर्वोदय के विचार को जन-जन तक पहुंचाया। सर्वोदय का अर्थ है सभी का उत्थान।
विनोबा भावे शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रसार करने के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने छुआछूत, जातिवाद और अस्पृश्यता जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। वे एक महान आध्यात्मिक गुरु भी थे और उन्होंने लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
1983 में, विनोबा भावे को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया। आचार्य विनोबा भावे के जीवन और कार्य हमें सिखाते हैं कि समर्पण और निस्वार्थ सेवा से समाज में महान बदलाव लाए जा सकते हैं।
आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 25 जनवरी को मनाये जाने वाले "राष्ट्रीय मतदाता दिवस" के बारे में:
राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर साल 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारत में लोकतंत्र के महत्व को दर्शाता है और लोगों को अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों, सेमिनारों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को मतदान के महत्व के बारे में बताया जाता है।
वर्ष 2011 में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने 25 जनवरी को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना दिवस के अवसर पर 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य मतदाताओं द्वारा चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने तथा मतदाताओं में जागरूकता बढ़ाना है।
यह दिवस सभी भारतवासियों को अपने राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की याद दिलाता है कि हर व्यक्ति के लिए मतदान करना जरूरी है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम अपने मताधिकार का उपयोग करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें। मतदान के माध्यम से ही हम एक मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं।
अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: अभ्यास सबसे बड़ा गुरु है
गुरु द्रोणाचार्य पाण्डवों और कौरवों के गुरु थे और उन्हें धनुर्विद्या का ज्ञान देते थे। एक दिन, एकलव्य, जो कि एक गरीब शूद्र परिवार से थे, गुरु द्रोणाचार्य के पास आए और बोले, "गुरुदेव, आपसे अनुरोध है कि मुझे भी अपना शिष्य बनाकर धनुर्विद्या का ज्ञान प्रदान करें।" किन्तु द्रोणाचार्य ने एकलव्य को अपनी विवशता बताई और कहा कि वे किसी और गुरु से शिक्षा प्राप्त कर लें। यह सुनकर एकलव्य वहाँ से चले गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
कुछ दिनों बाद, अर्जुन और द्रोणाचार्य शिकार के लिए जंगल की ओर गए। उनके साथ एक कुत्ता भी गया हुआ था। कुत्ता अचानक से दौड़ते हुए एक जगह पर जाकर भौंकने लगा, वह काफी देर तक भौंकता रहा और फिर अचानक ही भौंकना बंद कर दिया। अर्जुन और गुरुदेव ने वहाँ जाकर जो देखा, वह एक अविश्वसनीय घटना थी। किसी ने कुत्ते को बिना चोट पहुँचाए उसका मुँह तीरों के माध्यम से बंद कर दिया था और वह चाह कर भी नहीं भौंक सकता था।
यह देखकर द्रोणाचार्य चौंक गए और सोचने लगे कि इतनी कुशलता से तीर चलाने का ज्ञान तो मैंने मेरे प्रिय शिष्य अर्जुन को भी नहीं दिया है और न ही ऐसे भेदन वाला ज्ञान मेरे अलावा यहाँ कोई जानता है, तो फिर ऐसी अविश्वसनीय घटना घटी कैसे? तभी सामने से एकलव्य अपने हाथ में तीर-कमान पकड़े आ रहा था। यह देखकर तो गुरुदेव और भी चौंक गए।
द्रोणाचार्य ने एकलव्य से पूछा, "बेटा, तुमने ये सब कैसे कर दिखाया?" तब एकलव्य ने कहा, "गुरुदेव, मैंने यहाँ आपकी मूर्ति बनाई है। और रोज इसकी वंदना करने के पश्चात मैं इसके समकक्ष कड़ा अभ्यास करता हूँ और इसी अभ्यास के चलते मैं आज आपके सामने धनुष पकड़ने के लायक बना हूँ।"
गुरुदेव ने कहा, "तुम धन्य हो! तुम्हारे अभ्यास ने ही तुम्हें इतना श्रेष्ठ धनुर्धर बनाया है और आज मैं समझ गया कि अभ्यास ही सबसे बड़ा गुरु है।"
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कड़ा अभ्यास और समर्पण से ही हम किसी भी क्षेत्र में कुशलता हासिल कर सकते हैं। अभ्यास की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता और यह सिद्ध करता है कि कठिन परिश्रम और निरंतर अभ्यास से ही हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







