24 August AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢






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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

24 अगस्त – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 24 अगस्त है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: "तूफ़ानों से पेड़ों की जड़ें और गहरी व मज़बूत होती हैं।"
"Storms make trees take deeper roots."

यह कथन प्रकृति की उस अद्भुत सच्चाई को दर्शाता है, जिसमें प्रतिकूल परिस्थितियाँ किसी जीव को कमजोर नहीं बनातीं, बल्कि और अधिक सशक्त कर देती हैं। जिस प्रकार तूफ़ान पेड़ों को झकझोरते हैं और उनकी जड़ों को और गहराई तक पहुँचा देते हैं, उसी प्रकार जीवन की कठिनाइयाँ हमें अधिक मजबूत, अनुभवी और लचीला बना देती हैं।

यदि पेड़ कभी तूफ़ानों का सामना न करें, तो वे कभी उतने मजबूत नहीं बन पाएँगे। उसी तरह यदि मनुष्य जीवन में संघर्ष और चुनौतियों का सामना न करे, तो उसका वास्तविक विकास संभव नहीं। मुश्किलें हमें धैर्य, साहस और आत्मविश्वास सिखाती हैं।

तूफ़ान क्षणिक होते हैं, गुजर जाते हैं; लेकिन पेड़ अपनी मजबूती के साथ खड़े रहते हैं। जीवन में भी कठिनाइयाँ अस्थायी होती हैं, पर उनसे मिली सीख हमें स्थायी रूप से सशक्त बना देती है। इसलिए चुनौतियों से डरने की बजाय उन्हें अवसर समझना चाहिए, क्योंकि यही हमें एक बेहतर, सफल और दृढ़ व्यक्ति बनाती हैं।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: CREATION क्रिएशन का अर्थ होता है निर्माण, सृजन, सृष्टि या किसी नई चीज़ को तैयार करने की प्रक्रिया। यानी The act of making, producing, or bringing something into existence.

वाक्य प्रयोग: Creativity leads to the creation of new ideas. रचनात्मकता नए विचारों का सृजन करती है।

🧩 आज की पहेली
वह क्या है जिसे तोड़कर हम बहुत खुश होते हैं और उसे बार-बार तोड़ना चाहते हैं।
उत्तर- रिकॉर्ड
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 24 अगस्त की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1456: जोहान्स गुटेनबर्ग ने पहली बार चल-मुद्रण तकनीक का उपयोग करके बाइबिल की छपाई पूरी की। यह घटना छपाई क्रांति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी, जिसने ज्ञान के प्रसार को गति दी।
  • 24 अगस्त, 1600 को ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला जहाज 'हेक्टर' सूरत के तट पर पहुंचा। कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारत में व्यापार करना था। यह घटना भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी, क्योंकि यह व्यापारिक उद्देश्यों से शुरू होकर बाद में साम्राज्यवादी शासन में बदल गई।
  • 1690: जॉब चार्नॉक ने कलकत्ता में ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्ट्री शुरू की। इसे कोलकाता शहर की शुरुआत माना जाता है। यह ब्रिटिश भारत की राजधानी बनी।
  • 24 अगस्त, 1889 को के. केलप्पन का जन्म हुआ। उन्हें 'केरल गांधी' कहा जाता है। वे राष्ट्रवादी और समाज सुधारक थे। उन्होंने वैकॉम सत्याग्रह का नेतृत्व किया।
  • 1897: थॉमस एडिसन ने काइनेटोग्राफिक कैमरा और काइनेटोस्कोप का पेटेंट लिया। ये उपकरण सिनेमा की शुरुआत बने। इनसे फिल्म उद्योग को नई दिशा मिली।
  • 1908: क्रांतिकारी शिवराम राजगुरु का जन्म हुआ। उन्होंने भगत सिंह के साथ स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया। वे लाहौर षड्यंत्र केस में शहीद हुए।
  • 24 अगस्त, 1911 को स्वतंत्रता सेनानी बीना दास का जन्म हुआ। वह बंगाल की एक महिला क्रांतिकरी थीं, जिन्होंने 1932 में बंगाल के गवर्नर स्टेनली जैक्सन पर गोली चलाई थी।
  • 1925: रामकृष्ण गोपाल भंडारकर का निधन हुआ। वे इतिहासकार और समाज सुधारक थे। उन्होंने प्राचीन भारतीय इतिहास पर शोध किया। वे प्राच्य अनुसंधान संस्थान के संस्थापक थे।
  • 2006: अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ ने प्लूटो को ग्रह का दर्जा हटाया। इसे बौना ग्रह घोषित किया गया।
  • 2011: चीन के वैज्ञानिकों ने ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदी के उद्गम स्थल खोजे। यह खोज जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण थी।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – शिवराम राजगुरु

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “क्रांतिकारी शिवराम राजगुरु” के बारे में।

महान क्रांतिकारी शिवराम हरि राजगुरु का जन्म 24 अगस्त 1908 को महाराष्ट्र के खेडा अब राजगुरुनगर में हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक वीर और निडर क्रांतिकारी थे। बचपन से ही उनमें देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी हुई थी। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन HSRA से जुड़े और भगत सिंह तथा सुखदेव के घनिष्ठ साथी बने। अंग्रेजों के अत्याचारों से आक्रोशित होकर उन्होंने 1928 में लाहौर में ब्रिटिश अधिकारी जे.पी. सॉन्डर्स की हत्या में भाग लिया। इस घटना का उद्देश्य था लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेना, जो अंग्रेजी शासन की बर्बरता के कारण घायल होकर शहीद हुए थे।

राजगुरु अपनी वीरता, निडरता और बलिदानी स्वभाव के लिए याद किए जाते हैं। वे मात्र 23 वर्ष की आयु में, 23 मार्च 1931 को भगत सिंह और सुखदेव के साथ लाहौर जेल में फाँसी पर चढ़ गए। राजगुरु ने हँसते-हँसते देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। राजगुरु का जीवन हमें सिखाता है कि मातृभूमि के लिए बलिदान सबसे बड़ा धर्म है।

🎉 आज का दैनिक विशेष – पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 24 अगस्त को मनाये जाने वाले “पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस” के बारे में:

24 अगस्त को प्रतिवर्ष पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस यानी Bengal Foundation Day मनाया जाता है। यह दिन राज्य के गठन और उसके गौरवशाली इतिहास की स्मृति में मनाया जाता है। भारत की आज़ादी के समय वर्ष 1947 में बंगाल का विभाजन हुआ। उस समय बंगाल को दो हिस्सों में बाँटा गया—पूर्वी बंगाल, जो आगे चलकर बांग्लादेश बना, और पश्चिमी बंगाल, जो भारत का हिस्सा बना। इसके बाद 24 अगस्त 1947 को भारतीय संविधान के अनुसार पश्चिम बंगाल को आधिकारिक रूप से एक अलग राज्य का दर्जा मिला।

तब से यह दिन पश्चिम बंगाल की ऐतिहासिक विरासत, साहित्यिक धरोहर, समृद्ध संस्कृति और सामाजिक योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर राज्य में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगोष्ठियाँ, और समारोह आयोजित किए जाते हैं, जिनके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को बंगाल की ऐतिहासिक यात्रा उसकी अद्भुत कला, साहित्य, संगीत और परंपराओं से परिचित कराया जाता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – कंजूस गीदड़

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “कंजूस गीदड़”

जंगल में एक गीदड़ रहता था, जो बहुत कंजूस था। वह रुपयों-पैसों में कंजूसी नहीं करता था, बल्कि खाने-पीने में कंजूसी करता था। जितने शिकार से दूसरा गीदड़ दो दिन आराम से पेट भर लेता, उतने ही शिकार को यह सात दिन तक खींचता।

एक बार उसने एक खरगोश पकड़ा। पहले दिन उसने सिर्फ उसका एक कान खाया, दूसरे दिन दूसरा कान। इसी तरह रोज़ थोड़ा-थोड़ा खाकर वह शिकार को खींचता। ठीक वैसे ही जैसे कंजूस लोग पैसों को घिस-घिसकर खर्च करते हैं। इस आदत के कारण गीदड़ अक्सर भूखा रह जाता और दिन-ब-दिन दुर्बल होता जा रहा था।

एक दिन उसे जंगल में एक मरा हुआ बारहसिंघा मिला। वह खुशी-खुशी उसे खींचकर अपनी मांद में ले गया। उसने सोचा—“पहले इसके सींग खा लूँ ताकि मांस बचा रहे।” वह कई दिन बस सींग ही चबाता रहा। इस बीच हिरण का मांस सड़ गया और गिद्धों के खाने लायक रह गया। इस तरह गीदड़ अपनी मूर्खतापूर्ण कंजूसी के कारण मज़ाक का पात्र बनता। जब वह बाहर निकलता तो दूसरे जानवर कहते—“देखो, वह मक्खीचूस जा रहा है।” लेकिन गीदड़ को कोई परवाह नहीं थी।

इसी बीच एक दिन जंगल में एक शिकारी आया। उसने एक जंगली सुअर को देखा और उस पर तीर चला दिया। तीर सुअर की कमर में धँस गया। घायल होकर क्रोधित सुअर ने शिकारी पर हमला कर दिया। उसने अपने तेज दाँतों से शिकारी के पेट को चीर दिया। नतीजा यह हुआ कि शिकारी और सुअर दोनों वहीं मर गए।

थोड़ी देर बाद वही मक्खीचूस गीदड़ वहाँ पहुँचा। वह दोनों को मृत देखकर खुशी से उछल पड़ा और मन ही मन बोला—“वाह! अब तो कई महीनों का भोजन मिल गया। रोज़ थोड़ा-थोड़ा खाऊँगा और लंबे समय तक काम चलाऊँगा।” तभी उसकी नजर पास पड़े शिकारी के धनुष पर पड़ी। धनुष की डोर कोने पर बंधी चमड़ी की पट्टियों से कसकर खींची गई थी। गीदड़ ने सोचा—“क्यों न आज मांस बचाकर सिर्फ यह चमड़ी की पट्टी खा लूँ?” ऐसा सोचकर उसने धनुष का कोना मुँह में डाला और पट्टी काटने लगा। लेकिन जैसे ही पट्टी टूटी, धनुष की डोर छूट गई। लकड़ी चटाक से सीधी हुई और उसका नुकीला सिरा गीदड़ के मुँह में जा धँसा। वह तालू को चीरता हुआ नाक तक पहुँचा और गीदड़ वहीं तड़पकर मर गया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि अत्यधिक कंजूसी का अंत हमेशा बुरा होता है। कंजूस गीदड़ ने अपनी कंजूसी के कारण न केवल स्वादिष्ट भोजन खोया बल्कि अंततः अपनी जान भी गंवा बैठा। हमें संसाधनों का विवेकपूर्ण और संतुलित उपयोग करना चाहिए, न कि मूर्खतापूर्ण कंजूसी।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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