23 June AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢








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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

23 जून – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 23 जून है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"अंधेरे से मत डरो, सितारे अंधेरे में ही चमकते है।
don't fear the darkness, stars shine in the dark."

इसका अर्थ है कि हमें अंधकार या नकारात्मक परिस्थितियों से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि ये ही वो परिस्थितियां हैं जो हमें चमकने और अपनी असल क्षमता दिखाने का मौका देती हैं। यह कहावत हमें प्रेरित करती है कि हम अपने जीवन में आने वाली हर चुनौती का सामना डटकर करें और अपनी सफलता की कहानी लिखें।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Balance: संतुलन, बाकी, शेष या बची हुई राशि और स्थिरता।

वाक्य प्रयोग: A balanced diet is important for good health. अच्छी सेहत के लिए संतुलित आहार जरूरी होता है।

🧩 आज की पहेली
काला हूँ पर कोयला नहीं, जलता हूँ पर शोला नहीं। काग़ज़ पे उतारो तो, ज्ञान का दरिया बहा दूँ। बताओ तो मैं कौन हूँ?
उत्तर: कलम Pen
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 23 जून की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1757 में इसी दिन प्लासी का युद्ध हुआ था। यह युद्ध बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में नवाब की सेना के सेनापति मीर जाफर के विश्वासघात ने अंग्रेजों को विजय दिलाई। यह जीत भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव साबित हुई और उपमहाद्वीप में उनके प्रभुत्व की शुरुआत हुई।
  • 23 जून, 1868 को क्रिस्टोफर लैथम शोल्स ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अपने टाइपराइटर के लिए पेटेंट प्राप्त किया। यह वही आविष्कार है जो बाद में QWERTY कीबोर्ड के रूप में लोकप्रिय हुआ, और रेमिंगटन कंपनी ने इसे बाजार में उतारा।
  • 1912 में, प्रसिद्ध ब्रिटिश गणितज्ञ और कंप्यूटर विज्ञान के जनक एलन ट्यूरिंग का जन्म हुआ। ट्यूरिंग ने "ट्यूरिंग मशीन" और "ट्यूरिंग टेस्ट" की अवधारणाओं को जन्म दिया, जो आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कंप्यूटिंग के विकास की बुनियाद बने।
  • 23 जून 1934 को भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और "चिपको आंदोलन" के संस्थापक सदस्यों में से चण्डी प्रसाद भट्ट का जन्म उत्तराखंड के गोपेश्वर चमोली ज़िला में हुआ।
  • 1980 में, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी की एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। वे एक प्रशिक्षु पायलट थे और उड़ान अभ्यास के दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
  • 1985 में, एयर इंडिया फ्लाइट 182 'कनिष्का' अटलांटिक महासागर में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह विमान मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए मुंबई जा रहा था। विमान में सवार सभी 329 यात्री मारे गए।
  • 1988 में, नासा के जलवायु वैज्ञानिक डॉ. जेम्स ई. हैनसेन ने अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष गवाही दी कि ग्रीनहाउस गैसों के कारण धरती का तापमान खतरनाक रूप से बढ़ रहा है।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – चण्डी प्रसाद भट्ट

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे "चण्डी प्रसाद भट्ट" के बारे में।

चण्डी प्रसाद भट्ट भारत के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और "चिपको आंदोलन" के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इनका जन्म 23 जून 1934 को उत्तराखंड के गोपेश्वर चमोली ज़िला में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन हिमालय क्षेत्र के वनों की रक्षा, ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों को समर्पित कर दिया।

1970 के दशक में जब वनों की अंधाधुंध कटाई हो रही थी, तब उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और स्थानीय लोगों को संगठित कर पेड़ों को कटने से बचाने के लिए "चिपको आंदोलन" की शुरुआत की। इस आंदोलन में लोग पेड़ों से चिपककर उन्हें काटने से रोकते थे। यह आंदोलन केवल एक पर्यावरणीय संघर्ष नहीं था, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चेतना का प्रतीक भी बन गया।

चण्डी प्रसाद भट्ट को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें गांधी शांति पुरस्कार 2013, रामोन मैग्सेसे पुरस्कार 1982, और पद्म भूषण 2005 प्रमुख हैं। वे सादगी, ईमानदारी और सेवा भाव के प्रतीक हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।

आज भी उनका कार्य और विचार आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति के प्रति सजग और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। वे सच्चे अर्थों में एक "हरित योद्धा" Green Warrior हैं।

🎉 आज का दैनिक विशेष – अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे को मनाये 23 जून को मनाये जाने वाले "अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस" के बारे में:

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस हर साल 23 जून को मनाया जाता है, जिसकी स्थापना 1948 में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति IOC द्वारा की गई थी। यह दिन आधुनिक ओलंपिक खेलों की शुरुआत का प्रतीक है, जो 23 जून 1894 को पियरे डी कुबर्टिन के नेतृत्व में शुरू हुआ, जब IOC की स्थापना पेरिस में हुई। इसका उद्देश्य खेल, स्वास्थ्य, और वैश्विक एकता को बढ़ावा देना है। इस दिन, दुनिया भर में लाखों लोग दौड़, प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं और शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, जो ओलंपिक मूल्यों—उत्कृष्टता, मित्रता और सम्मान—को दर्शाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस न केवल शारीरिक फिटनेस को प्रोत्साहित करता है, बल्कि संस्कृतियों को जोड़ने और शांति को बढ़ावा देने का भी संदेश देता है। IOC और संयुक्त राष्ट्र मिलकर "ओलंपिक ट्रूस" की परंपरा को समर्थन देते हैं, जो युद्धग्रस्त क्षेत्रों में संघर्ष को रोकने की अपील करता है। भारत में, स्कूल, खेल संगठन और समुदाय इस दिन मैराथन, योग सत्र और खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं। यह अवसर हमें याद दिलाता है कि खेल न केवल प्रतिस्पर्धा है, बल्कि एक ऐसा मंच है जो लोगों को एकजुट करता है, स्वास्थ्य को बेहतर करता है और सकारात्मक सामाजिक बदलाव लाता है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – गर्मी की छुट्टियां

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "गर्मी की छुट्टियां"

हर साल की तरह, नंदन गर्मियों की छुट्टियां बिताने अपने दादा-दादी के घर पहुंचा। अगले दिन सुबह, उसने एक अजीब दृश्य देखा। उसके दादाजी फ्रिज में बड़ी संख्या में प्लास्टिक की बोतलें रख रहे थे। पूरा फ्रिज पानी की बोतलों से भरा हुआ था।

उत्सुकता से नंदन ने पूछा, "दादाजी, आप इतनी बोतलें फ्रिज में क्यों रख रहे हैं?" दादाजी हँसते हुए बोले, "बेटा, थोड़ी देर बाद तुम्हें सब पता चल जाएगा।"

कुछ समय बाद, एक फल विक्रेता उनके घर आया। दादाजी ने थोड़े-बहुत फल खरीदे और पैसे के साथ फ्रिज से एक ठंडी पानी की बोतल भी दी।

थोड़ी देर बाद सब्जी वाला आया। दादाजी ने फिर वही किया और उसे ठंडी पानी की बोतल दे दी।

नंदन ने दादाजी से पानी की बोतलों के बारे में फिर से पूछा । तब दादाजी बोले, "बेटा, लोग प्लास्टिक की खाली बोतलों को बेकार में कूड़े में फेंक देते हैं। मैं ऐसा करता हूँ ताकि गर्मी में बेहाल हो रहे लोगों को ठंडा पानी मिल सके और मेरे मन को शांति मिले। अगर सब लोग ऐसा करने लगें, तो लोगों को गर्मी में बहुत राहत मिल सकती है।"

नंदन को एहसास हुआ कि दादाजी बिल्कुल सही कह रहे थे। थोड़ी सी खुशियां बाँटने में कोई हर्ज नहीं है। नंदन ने फैसला किया कि शहर में अपने घर पहुंचने पर वह वैसे ही सब की मदद करने की कोशिश करेगा।

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हमें प्लास्टिक की बोतलों का सदुपयोग करना चाहिए और उन्हें बेकार में नहीं फेंकना चाहिए। हम थोड़ी सी कोशिश करके भी दूसरों की मदद कर सकते हैं और उन्हें खुशी दे सकते हैं। दादाजी की तरह हमें भी हमेशा दूसरों के बारे में सोचना चाहिए और उनकी मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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