2 March AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

2 मार्च – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 2 मार्च है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

“अपनी नियति की कमान अपने हाथ में लें, अन्यथा कोई ओर ले लेगा।”
“Control your own destiny or someone else will.”

इस वाक्य का अर्थ है कि हमें अपने जीवन के निर्णय और दिशा स्वयं निर्धारित करनी चाहिए। यदि हम अपने भविष्य को लेकर सक्रिय और जिम्मेदार नहीं हैं, तो दूसरे लोग या परिस्थितियाँ हमारे जीवन को प्रभावित कर सकती हैं और हमारे लिए निर्णय ले सकती हैं। हमें अपने लक्ष्यों, सपनों और कार्यों को लेकर सजग रहना चाहिए।

यदि हम अपने जीवन की बागडोर खुद नहीं संभालेंगे, तो दूसरे लोग या परिस्थितियाँ हमारे भाग्य को नियंत्रित कर सकते हैं, जो हमारे हित में नहीं हो सकता। यह वाक्य हमें प्रेरित करता है कि हम अपने जीवन की जिम्मेदारी खुद लें और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्रिय रहें।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द, जो है: Underneath : “के नीचे” या “नीचे की ओर”

उदाहरण : उसने अपने तकिए के नीचे की ओर चाबी छुपाई।
She hid the key underneath her pillow.

🧩 आज की पहेली
काली है पर काग नहीं,
लंबी है पर नाग नहीं,
हिलती है पर डाल नहीं,
बांधते हैं पर डोर नहीं।

उत्तर : चोटी
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 2 मार्च की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1807: अमेरिकी कांग्रेस ने दास प्रथा को रोकने के लिए एक कानून पास किया, जिसके तहत देश में गुलामों के आयात पर रोक लगा दी गई। यह दास प्रथा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम था।
  • 1919: कॉमिन्टर्न यानी कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की संस्थापक कांग्रेस मास्को में शुरू हुई। इसमें दो दर्जन देशों के 50 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसी के परिणामस्वरूप कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य दुनिया भर में साम्यवादी आंदोलनों को संगठित करना था।
  • 1930: डॉ. भीमराव अंबेडकर ने नासिक के कालाराम मंदिर में अछूतों के लिए प्रवेश की मांग की। यह आंदोलन कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह या नासिक सत्याग्रह के नाम से जाना गया और लगभग 6 साल तक चला।
  • 1949: भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाली और ‘भारत कोकिला’ के नाम से मशहूर सरोजिनी नायडू का निधन हुआ। वे एक प्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका और भारत तथा उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल थीं।
  • 1969: ब्रिटेन के सुपरसोनिक विमान कॉनकॉर्ड ने अपनी पहली सफल उड़ान भरी। यह विमान ध्वनि की गति से दोगुनी गति (लगभग 2400 किमी/घं) से उड़ान भरने में सक्षम था।
📦 आज का दैनिक विशेष – राष्ट्रीय पुरानी वस्तु दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 2 मार्च को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय पुरानी वस्तु दिवस” के बारे में।

हर साल 2 मार्च को National Old Stuff Day यानी राष्ट्रीय पुरानी वस्तु दिवस मनाया जाता है। यह दिन पुरानी चीजों को याद करने, उनकी सराहना करने और उन्हें संजोने के लिए समर्पित है।

यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पुरानी वस्तुएं हमारे इतिहास, संस्कृति और व्यक्तिगत जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। यह दिन लोगों को उनकी पुरानी यादों और वस्तुओं को फिर से जीवंत करने के लिए प्रेरित करता है और पुरानी चीजों के प्रति रुचि को बढ़ावा देने तथा उन्हें संरक्षित करने के महत्व को उजागर करता है।

पुरानी वस्तुओं को फिर से उपयोग में लाने से नई चीजों की खपत कम होती है, जो पर्यावरण संरक्षण में मददगार होता है। पुरानी वस्तुओं को नए तरीके से उपयोग करने से रचनात्मकता को बढ़ावा मिलता है।

राष्ट्रीय पुरानी वस्तु दिवस हमें यह याद दिलाता है कि पुरानी चीजें हमारे जीवन का एक अमूल्य हिस्सा हैं और उन्हें संजोना हमारी संस्कृति और इतिहास को बचाए रखने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – बंटवारा नहीं होगा

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “बंटवारा नहीं होगा”

दो भाई थे, राम और श्याम। दोनों बचपन से ही एक-दूसरे के साथ खेलते हुए बढ़े थे। उनके पिता एक समझदार और मेहनती व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने परिवार के लिए एक छोटा-सा घर और कुछ जमीन जोड़कर रखी थी। एक दिन अचानक उनके पिता का निधन हो गया। दोनों भाइयों को लगा कि अब उन्हें अपने पिता की विरासत को आपस में बांट लेना चाहिए।

बंटवारे की बात चली तो दोनों भाइयों में झगड़ा शुरू हो गया। राम बोला, “यह जमीन मेरी होगी, क्योंकि मैं बड़ा हूं।” श्याम ने कहा, “नहीं, यह घर मेरा है, क्योंकि मैंने पिता जी की सेवा ज्यादा की है।” दोनों दिन-रात सूची बनाने में लगे रहते, लेकिन कोई ऐसा बँटवारा तय नहीं हो पा रहा था जिससे दोनों संतुष्ट हो सकें।

जब बंटवारे का मामला लगभग तय होने लगा, तो एक खरल (दवा पीसने का पत्थर) पर झगड़ा हो गया। राम बोला, “यह खरल मेरा है, क्योंकि पिता जी इसे हमेशा अपने पास रखते थे।” श्याम ने तुनककर जवाब दिया, “नहीं, यह मेरा है, क्योंकि मैंने ही पिता जी की दवाइयां इसमें घोटी थीं।”

झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों ने पंचों से फैसला कराने का निर्णय लिया। पंचों ने सबसे पहले दोनों भाइयों को घर से बाहर निकाल दिया और दरवाजे पर दो ताले लगा दिए। उन्होंने कहा, “दो दिन बाद बंटवारा करेंगे।” अब दोनों भाई घर के अंदर नहीं जा सकते थे।

लेकिन समाज में कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो दरवाजे से नहीं, दीवार फांदकर घर में घुस जाते हैं। रात को चोरों ने दीवार लांघकर घर में प्रवेश किया और सारा सामान लूटकर ले गए।

दो दिन बाद जब घर खोला गया, तो दोनों भाइयों के सामने एक खाली घर था। उनके बाँटने के लिए कुछ भी नहीं बचा था। एक कोने में पड़ा खरल उन्हें देखकर मानो कह रहा हो, “तुम्हारे झगड़े ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।”

दोनों भाइयों की आंखें खुल गईं। उन्होंने पंचों के सामने हाथ जोड़कर कहा, “अब बंटवारा नहीं होगा। हम साथ-साथ रहेंगे और मिल-जुलकर जीवन बिताएंगे।”

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि परिवार में प्रेम और एकता बनाए रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है। बंटवारे और लालच से केवल नुकसान ही होता है। मिल-जुलकर रहना ही हमारे लिए सच्ची संपत्ति है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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