19 January AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢









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आज की अभ्युदय वाणी

सुप्रभात बालमित्रों!

19 जनवरी – रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 19 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं…

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:

"एक रत्ती भर कर्म एक मन भर बात के बराबर है।"
"An ounce of action is worth a ton of theory."

इसका मतलब है कि हम जितना भी विचार करें, योजना बनाएं या सिद्धांत गढ़ें, लेकिन जब तक हम उसे अमल में नहीं लाते, तब तक वह बेकार है। इसलिए, हमें अपने विचारों को कार्य में बदलने पर ध्यान देना चाहिए।

यह कथन हमें सिखाता है कि वास्तव में किए गए छोटे से छोटे कार्य का भी बहुत अधिक महत्व है, जबकि केवल बातें और सिद्धांतों का ज्यादा महत्व नहीं होता।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: KNIT का अर्थ होता है बुनना

उदाहरण: She loves to knit sweaters in the winter. उसे सर्दियों में स्वेटर बुनना बहुत पसंद है।

🧩 आज की पहेली

 आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :

पशु-पक्षी हिंसक जीवों को अपने में बिठला रखता हूँ,
बच्चे आते खुश हो जाते, इसे देख मैं खुश लगता हूँ।

उत्तर : चिड़ियाघर ।
📜 आज का इतिहास

 अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1736: स्कॉटिश यांत्रिक इंजीनियर और आविष्कारक जेम्स वाट का जन्म स्कॉटलैंड के ग्रीनॉक में हुआ था। वे भाप इंजन में अपने सुधारों के लिए जाने जाते हैं।
  • 1597: मेवाड़ के महाराणा प्रताप सिंह का निधन हुआ। उन्होंने मुगलों के सामने अधीनता स्वीकार नहीं की और अपनी बहादुरी और स्वाभिमान के लिए जाने जाते हैं।
  • 1905: नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर के पिता और बंगला साहित्यकार देबेन्द्रनाथ टैगोर का निधन हुआ था।
  • 1966: इंदिरा गांधी भारत की तीसरी प्रधानमंत्री चुनी गईं। वह भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री थीं।
  • 1983: एपल ने अपना पहला व्यावसायिक पर्सनल कंप्यूटर, एपल लिसा, लॉन्च किया, जिसमें ग्राफिकल यूजर इंटरफेस और माउस जैसी सुविधाएं थीं।
  • 1986: पहला कंप्यूटर वायरस 'सी ब्रेन' सक्रिय हुआ, जिसे सॉफ्टवेयर की चोरी रोकने के लिए बनाया गया था।
  • 1990: भारतीय विचारक और धर्मगुरु आचार्य रजनीश ओशो का पुणे में निधन हुआ था।
  • 2006: राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल NDRF की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य आपदा या संकट के समय लोगों को बचाना है।
  • 2013: नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर पृथ्वी के समान कैल्शियम युक्त भंडार की खोज की।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – जेम्स वॉट

 अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व 'जेम्स वॉट’ के बारे में।

जेम्स वॉट एक स्कॉटिश आविष्कारक, यान्त्रिक अभियन्ता और रसायनज्ञ थे। जेम्स वॉट का जन्म 19 जनवरी, 1736 को स्कॉटलैंड के रेनफ्रूशायर के ग्रीनॉक गांव में हुआ था। उन्होंने 1776 में थॉमस न्यूकॉमन के पुराने वाष्प इंजन में सुधार किया और अपने वॉट वाष्प इंजन का निर्माण किया। यह आविष्कार औद्योगिक क्रांति के लिए बेहद महत्वपूर्ण था और इससे ब्रिटेन और बाकी दुनिया में बड़े बदलाव आए।

वॉट ग्लास्गो विश्वविद्यालय में एक उपकरण निर्माता के रूप में काम करते थे, जहां उन्होंने वाष्प इंजन की तकनीक में दिलचस्पी ली। उन्होंने देखा कि तब के इंजन डिज़ाइन बहुत अधिक ऊर्जा बर्बाद करते थे। वॉट ने एक नया डिज़ाइन प्रस्तुत किया, जिसमें अलग कंडेनसर शामिल था। इससे ऊर्जा की बर्बादी कम हुई और वाष्प इंजनों की शक्ति, दक्षता और लागत में सुधार हुआ। उन्होंने अपने इंजन को रोटरी गति उत्पन्न करने के लिए भी अनुकूलित किया, जिससे इसका उपयोग पानी पंप करने के अलावा और भी कई कार्यों में हो सका।

भाप इंजन के साथ अपने काम के दौरान, वाट ने बिजली उत्पादन की एक इकाई के रूप में हॉर्सपावर की अवधारणा विकसित की । चूँकि उनके इंजनों ने बिजली के स्रोत के रूप में जानवरों की जगह ले ली थी, इसलिए वाट को इंजन की शक्ति का वर्णन इस आधार पर करना स्वाभाविक लगा कि इसे उत्पन्न करने के लिए कितने घोड़ों की आवश्यकता होगी। वाट ने स्थापित किया कि हॉर्सपावर की एक इकाई एक मिनट में एक फुट उठाए गए 33,000 पाउंड के बराबर होती है। दक्षता और शक्ति से संबंधित उनके काम के सम्मान में, बिजली और यांत्रिकी दोनों के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली शक्ति की एक इकाई, वाट, का नाम उनके नाम पर रखा गया।

🎉 आज का दैनिक विशेष – NDRF स्थापना दिवस

 आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 19 जनवरी को मनाये जाने वाले “राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल स्थापना दिवस ” के बारे में:

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) का स्थापना दिवस हर साल 19 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन हमारे बहादुर जवानों और उनके अद्वितीय कार्यों को सम्मान देने का मौका है। NDRF की 12 बटालियनों में विशेष रूप से प्रशिक्षित और बहु-कुशल व्यक्ति शामिल होते हैं, जो 16 अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं। यह तैनाती इसलिए की जाती है ताकि आपदा क्षेत्रों में त्वरित सहायता पहुँचाई जा सके।

2006 में औपचारिक रूप से इस बल की स्थापना हुई और तभी से हर साल इस दिन को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। NDRF का मुख्य काम प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूस्खलन, बाढ़, भूकंप, चक्रवात आदि के दौरान विशेष सहायता प्रदान करना है।

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अनुसार, इस बल की स्थापना 2006 में की गई थी। तब बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और आईटीबीपी की आठ बटालियनों को आपदा प्रतिक्रिया के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया। आज, NDRF ने 8,500 से अधिक ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए हैं, जिसमें नौ लाख से अधिक लोगों की जान बचाई गई है। इसके अलावा, 89 लाख से अधिक निवासियों को आपदा की तैयारी और प्रतिक्रिया के बारे में शिक्षित किया गया है।

इस स्थापना दिवस का मुख्य उद्देश्य NDRF कर्मियों की सेवाओं को मान्यता देना और उनकी बहादुरी का सम्मान करना है। यह दिन उनकी भूमिका को सम्मानित करता है, जब वे जनता की सुरक्षा के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना काम करते हैं।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी

अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: कर भला तो हो भला

"कर भला तो हो भला"

एक बार की बात है, राजा रामधन नाम के एक राजा थे, जो बिना स्वार्थ के सभी की मदद करते थे। उनके दयालु स्वभाव की सभी प्रशंसा करते थे। एक दिन, पड़ोसी राज्य के राजा भीम सिंह ने ईर्ष्या के कारण राजा रामधन के राज्य पर हमला किया और छल से युद्ध जीत लिया। राजा रामधन को जंगल में शरण लेनी पड़ी, लेकिन उनकी अच्छाइयों की चर्चा हर जगह होती रहती थी।

इससे परेशान होकर राजा भीम सिंह ने रामधन को मृत्युदंड देने का फैसला किया और घोषणा की कि जो कोई राजा रामधन को पकड़ कर लाएगा, उसे सौ सोने के सिक्के इनाम में दिए जाएंगे। दूसरी ओर, राजा रामधन जंगल में भटक रहे थे। तभी एक राहगीर ने उनसे रास्ता पूछा और बताया कि उसके बेटे की तबीयत ठीक नहीं है और इलाज में सारा धन खत्म हो गया है। उसने सुना था कि राजा रामधन सभी की मदद करते हैं, इसलिए वह उनसे मदद मांगने आया था।

यह सुनकर राजा रामधन उस राहगीर को लेकर राजा भीम सिंह के दरबार में पहुँचे। दरबार में सभी हैरान हो गए। राजा रामधन ने राजा भीम सिंह से कहा, "हे राजन! आपने मुझे खोजने वाले को सौ सिक्के देने का वादा किया था। मेरे इस मित्र ने मुझे आपके सामने पेश किया है। कृपया इसे वे सौ सिक्के दे दें।"

यह सुनकर राजा भीम सिंह को एहसास हुआ कि राजा रामधन कितने महान और दानी व्यक्ति हैं। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और राजा रामधन को उनका राज्य लौटा दिया। साथ ही, उन्होंने निर्णय लिया कि वे हमेशा राजा रामधन के दिखाए मार्ग पर चलेंगे।

यह कहानी हमें सिखाती है कि "कर भला तो हो भला।" यानी, जो व्यक्ति दूसरों के भले के लिए कार्य करता है, उसे अंततः अच्छा फल मिलता है।

🚂 अभ्युदय वाणी का आज का सफ़र

 आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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