18 August AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢








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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

18 अगस्त – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 18 अगस्त है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ीएक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से : "अपनी कल्पना को जीवन का मार्गदर्शक बनाएं, अपने अतीत को नहीं।"
"Live out of your imagination, not your history."

अतीत हमारे अनुभवों और सीखों का भंडार है, लेकिन यह हमारे भविष्य की दिशा तय नहीं करता। अतीत में उलझे रहने से हम अपनी प्रगति रोक सकते हैं। हमें उससे केवल सीख लेनी चाहिए, न कि उसमें कैद होकर जीना चाहिए।

कल्पना हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। यह हमें नए विचार देती है, सपने देखने की प्रेरणा देती है और अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने का साहस देती है। कल्पना हमें अतीत की सीमाओं से बाहर निकालकर एक बेहतर और संभावनाओं से भरे भविष्य की ओर ले जाती है।

जीवन का मार्गदर्शन कल्पना से करना आसान नहीं, लेकिन यही हमें नवाचार, प्रेरणा और सफलता की ओर ले जाता है। इसलिए, अपनी कल्पना को हकीकत में बदलने के लिए पूरे मन से प्रयास करें और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ें।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है : STIGMA स्टिग्मा का अर्थ होता है कलंक जो किसी व्यक्ति, समूह या विचार के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण, पूर्वाग्रह या सामाजिक अपमान, जो उनकी पहचान से जुड़ा हो और उन्हें अलग-थलग या हीन महसूस कराए।

वाक्य प्रयोग: Mental illness still carries a stigma in many societies. मानसिक बीमारी आज भी कई समाजों में एक कलंक मानी जाती है।

🧩 आज की पहेली
एक थाल मोतियों भरा, सबके सिर पर उल्टा धरा, चारों ओर फिरे वो थाल, मोती उससे एक न गिरे ।
जवाब: आकाश और तारे
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 18 अगस्त की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1227: मंगोल साम्राज्य के महान शासक चंगेज खान का निधन हुआ। जिसने विशाल मंगोल साम्राज्य की नींव रखी, जो मध्य एशिया से लेकर यूरोप तक फैला।
  • 1587: वर्जीनिया डेयर का जन्म हुआ, जो उत्तरी अमेरिका में जन्म लेने वाली पहली अंग्रेजी बच्ची थी। उनका जन्म रोआनोक कॉलोनी में हुआ, जो अमेरिकी इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है।
  • 1858: भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के अंत की प्रक्रिया तेज हुई। ब्रिटिश सरकार ने भारत पर प्रत्यक्ष नियंत्रण की घोषणा की, जिसने औपनिवेशिक शासन को और सुदृढ़ किया।
  • 1900: महान स्वतंत्रता सेनानी और नेत्री विजयलक्ष्मी पंडित का जन्म हुआ। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में भारत की पहली महिला राजदूत बनीं, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला थीं।
  • 1920: संयुक्त राज्य अमेरिका में 19वां संशोधन पारित हुआ, जिसने महिलाओं को मतदान का अधिकार प्रदान किया। यह लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।
  • 1940: पहली बार मौसम मानचित्र का टेलिविजन पर प्रसारण हुआ। इसने मौसम विज्ञान के क्षेत्र में एक नई क्रांति को जन्म दिया और जनसंचार में तकनीकी प्रगति को दर्शाया।
  • 1945: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रहस्यमयी मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइवान के ताइहोकू हवाई अड्डे पर एक विमान दुर्घटना में होने की बात कही जाती है। उनकी मृत्यु ने पूरे देश में शोक की लहर फैला दी। हालाँकि, इसकी पुष्टि विवादास्पद रही, और इस दिन को उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • 1951: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान IIT खड़गपुर की स्थापना हुई। यह भारत के सबसे पुराने और शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक है, जिसने देश के तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • 1969: प्रसिद्ध वुडस्टॉक संगीत समारोह का समापन हुआ। यह 1960 के दशक की हिप्पी संस्कृति का प्रतीक बना और संगीत इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
  • 1990: दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद विरोधी आंदोलन के नेता नेल्सन मंडेला ने अपनी पहली अमेरिकी यात्रा शुरू की, जो वैश्विक स्तर पर नस्लभेद के खिलाफ उनके संघर्ष को रेखांकित करती है।
  • 2008: भारत ने अपने पहले चंद्र मिशन, चंद्रयान-1, की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू किया। यह मिशन भारत की अंतरिक्ष अनुसंधान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – विजयलक्ष्मी पंडित

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “विजयलक्ष्मी पंडित” के बारे में।

महान स्वतंत्रता सेनानी और नेत्री विजयलक्ष्मी पंडित का जन्म 18 अगस्त 1900 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार में हुआ था। वे पंडित मोतीलाल नेहरू की पुत्री और भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन थीं। बचपन से ही उनमें नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति की भावना थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया और कई बार जेल भी गईं।

स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के साथ-साथ विजयलक्ष्मी पंडित ने स्वतंत्र भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वे संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष 1953बनीं, जो विश्व स्तर पर भारत के लिए गर्व की बात थी। उन्होंने सोवियत संघ, अमेरिका, मैक्सिको, और यूनाइटेड किंगडम में भारत की राजदूत के रूप में भी सेवा की।

उनका जीवन साहस, सेवा और नारी सशक्तिकरण का अद्भुत उदाहरण है। विजयलक्ष्मी पंडित ने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और नेतृत्व क्षमता के बल पर एक महिला विश्व मंच पर भी अपनी पहचान स्थापित कर सकती है। उनका निधन 1 दिसंबर 1990 को हुआ, लेकिन उनका योगदान और प्रेरणा आज भी भारतीय राजनीति और समाज में जीवित है।

🎉 आज का दैनिक विशेष – अंतर्राष्ट्रीय डिलीवरी ड्राइवर प्रशंसा दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 18 अगस्त को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय डिलीवरी ड्राइवर प्रशंसा दिवस” के बारे में

अंतर्राष्ट्रीय डिलीवरी ड्राइवर प्रशंसा दिवस प्रत्येक वर्ष 18 अगस्त को उन लोगों के प्रति धन्यवाद कहने और सराहना दिखाने के लिए मनाया जाता है जो दुनिया भर में साइकिलों पर डिलीवरी कर रहे हैं! डिलीवरी राइडर्स की अवधारणा कोई नई नहीं है, इसकी जड़ें उन कूरियरों से जुड़ी हैं जो साइकिलों पर घूमकर संदेश, कागजात या अन्य छोटी वस्तुएं पहुंचाते थे। ये संदेशवाहक 1800 के दशक के मध्य में दो पहियों वाले साइकिलों के आविष्कार के तुरंत बाद दिखाई देने लगे। आज के डिलीवरी राइडर्स के पास विशेष, इंसुलेटेड पैक होते हैं जिन्हें वे अपनी पीठ पर रख सकते हैं ताकि वे डिलीवरी के लिए एक बार में कई खाद्य ऑर्डर ले जा सकें। अंतर्राष्ट्रीय डिलीवरी ड्राइवर प्रशंसा दिवस का उद्घाटन समारोह लंदन स्थित विशेषज्ञ खाद्य वितरण कंपनी, हंग्री पांडा कंपनी के प्रयासों के माध्यम से 2023 में आयोजित किया गया था। इस दिन यह आयोजन इसलिए किया जाता है क्योंकि अंक “818” एक साइकिल सवार की छवि जैसा दिखता है जिसके ऊपर एक बैग रखा हुआ है। साथ ही, अंक “8” का उच्चारण अंग्रेजी के “eat” जैसा होता है जो और भी ज़्यादा जुड़ाव पैदा करता है। इन 'डिलीवरी नायकों' को सम्मानित करने के लिए, यह कार्यक्रम उन मेहनती, समर्पित सवारों को श्रद्धांजलि देता है जो पूरे विश्व में स्वादिष्ट भोजन को सीधे दरवाजे तक पहुंचाते हैं!

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – तीन छोटे सूअर

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: “तीन छोटे सूअर”

एक समय की बात है, तीन छोटे सूअर अपनी माँ के साथ रहते थे। जब वे बड़े हुए, माँ ने कहा – "अब तुम बड़े हो गए हो, अपना-अपना घर बनाकर स्वतंत्र रहो।" तीनों अलग-अलग दिशाओं में निकल पड़े।

पहले सूअर ने जल्दी-जल्दी पुआल का घर बना लिया। वह सोच रहा था, "काम जल्दी खत्म, अब मज़े ही मज़े!" लेकिन एक दिन भेड़िया आया। उसने ज़ोर से फूँक मारी, और पुआल का घर उड़ गया। बेचारा पहला सूअर भेड़िये का शिकार हो गया।

दूसरे सूअर ने लकड़ियों का घर बनाया। यह पुआल के घर से मजबूत था, पर उतना भी नहीं। भेड़िये ने कई बार धक्का दिया और घर गिरा दिया। नतीजा वही हुआ — दूसरा सूअर भी खत्म।

अब तीसरे सूअर की बारी थी। वह समझदार और धैर्यवान था। उसने ईंटों का मजबूत घर बनाया। भेड़िया आया, फूँक मारी, धक्का दिया, लेकिन घर ज़रा भी नहीं हिला।

हारकर भेड़िया चिमनी से अंदर आने लगा। तीसरे सूअर ने तुरंत चूल्हे पर पानी का बड़ा बर्तन चढ़ा दिया। भेड़िया नीचे गिरा और सीधे उबलते पानी में चला गया। इस तरह तीसरा सूअर सुरक्षित बच गया।

सीख: जल्दबाज़ी में किया काम कमजोर होता है। अगर हम धैर्य, मेहनत और समझदारी से मजबूत नींव पर काम करें, तो हम मुश्किलों से बच सकते हैं और सफलता पा सकते हैं।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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