सुप्रभात बालमित्रों!
15 अक्टूबर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 15 अक्टूबर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
“सपने वो नहीं जो हम सोते वक्त देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।”
Dreams are not what we see when we sleep, dreams are those that keep us awake.
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का यह सुविचार हमें बताता है कि असली सपने केवल नींद में देखे जाने वाले दृश्य नहीं होते। असली सपने वे होते हैं जो हमारे दिल और दिमाग में गहरी छाप छोड़ते हैं और हमें उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। ऐसे सपने हमारे भीतर जोश और जुनून पैदा करते हैं, जिससे हम कठिनाइयों और थकान को भूलकर अपने लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ते रहते हैं। यही सपने जीवन को अर्थपूर्ण और सफल बनाते हैं।
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: ULTRA : अत्यन्त, बहुत अधिक
वाक्य प्रयोग — This water is ultra pure and safe to drink.
यह पानी अत्यन्त शुद्ध और पीने के लिए सुरक्षित है।
जिसने मुझको काट लिया, उसका बिगड़ा हाल।।
उत्तर - मिर्च
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 15 अक्टूबर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1542 – दिल्ली भारत पर शासन करने वाले मुगल वंश के सबसे प्रतापी सम्राट अकबर का जन्म उमरकोट में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है।
- 1582 – ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू हुआ। पोप ग्रेगरी XIII के आदेश पर 4 अक्टूबर के बाद 15 अक्टूबर लागू किया गया, जिससे जूलियन कैलेंडर के 10 दिन हटाए गए।
- 1815 – नेपोलियन बोनापार्ट को सेंट हेलेना द्वीप पर निर्वासित किया गया, जहाँ उन्होंने अपने अंतिम वर्ष बिताए।
- 1931 – भारत के 11वें राष्ट्रपति और "मिसाइल मैन" डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म रामेश्वरम, तमिलनाडु में हुआ।
- 1932 – टाटा कंपनी ने अपनी पहली उड़ान टाटा एयर सर्विस कराची से मद्रास तक शुरू की, जो बाद में एयर इंडिया बनी।
- 1961 – महान कवि, उपन्यासकार, निबन्धकार और कहानीकार सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला का निधन हुआ।
- 1966 – अमेरिका में ब्लैक पैंथर पार्टी की स्थापना ह्यू न्यूटन और बॉबी सील द्वारा ओकलैंड, कैलिफोर्निया में की गई।
- 1988 – उज्ज्वला पाटिल पूरी दुनिया की समुद्री यात्रा करने वाली एशिया की प्रथम महिला बनी।
- 1990 – सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्बाचेव को शीत युद्ध में शांति प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला।
अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे “भारत के 11वें राष्ट्रपति और "मिसाइल मैन" डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम” के बारे में।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता मछुआरे थे और परिवार आर्थिक रूप से बहुत समृद्ध नहीं था, लेकिन कलाम ने कभी कठिनाईयों से हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पढ़ाई में अत्यधिक लगन और मेहनत से सफलता हासिल की और अंततः भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय विमान निर्माण अनुसंधान संगठन ISRO और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
डॉ. कलाम को भारत के “मिसाइल मैन” के रूप में जाना गया क्योंकि उन्होंने भारत के मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम में क्रांतिकारी काम किया। उन्होंने अग्नि और पृथ्वी मिसाइल जैसी परियोजनाओं का नेतृत्व किया और देश को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके जीवन का सबसे बड़ा संदेश था सपने देखो, मेहनत करो और निरंतर प्रयास करते रहो। डॉ. कलाम हमेशा युवाओं को प्रेरित करते थे और उनकी कहानियाँ, किताबें और भाषण आज भी छात्रों के लिए मार्गदर्शक हैं।
डॉ. कलाम ने 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में सेवा की और देशवासियों के दिलों में अपने सरल जीवन और विशाल विचारों के कारण अमिट स्थान बनाया। उनका जीवन यह सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी, दृढ़ निश्चय और कड़ी मेहनत से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 15 अक्टूबर को मनाये जाने वाले “विश्व छात्र दिवस” के बारे में:
विश्व छात्र दिवस हर साल 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिन शिक्षा और युवा शक्ति के महत्व को उजागर करता है। यह दिन खास इसलिए भी है क्योंकि इसी दिन भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म हुआ था। डॉ. कलाम, जिन्हें "मिसाइल मैन" कहा जाता है, केवल एक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी थे।
वे हमेशा छात्रों को मेहनत करने, नई चीज़ें सीखने और अपने देश की सेवा करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। विश्व छात्र दिवस का उद्देश्य भी यही है—युवाओं को शिक्षित करना, उन्हें सशक्त बनाना और उनके सपनों को पूरा करने में मदद करना। इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में सेमिनार, वाद-विवाद और प्रेरक व्याख्यान आयोजित किए जाते हैं, ताकि छात्र नेतृत्व, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी के बारे में सीख सकें। डॉ. कलाम का मानना था कि युवा किसी भी राष्ट्र का भविष्य हैं, और उनकी शिक्षा और नैतिक मूल्य ही समाज को प्रगति की ओर ले जा सकते हैं। विश्व छात्र दिवस हमें यह याद दिलाता है कि शिक्षा सिर्फ ज्ञान नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और समाज में योगदान का मार्ग भी है।
तमिलनाडु के छोटे से गाँव रामेश्वरम में 15 अक्टूबर, 1931 को जन्मे डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का बचपन सादगी और संघर्षों से भरा था। एक मछुआरे के बेटे के रूप में, उन्हें बचपन से ही गरीबी और जीवन की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। फिर भी, उनकी ज्ञान की प्यास कभी कम नहीं हुई।
अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए, कलाम सुबह जल्दी उठकर साइकिल पर अखबार बाँटने का काम करते थे। गाँव के कोने-कोने में अखबार पहुँचाने के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई पर कभी समझौता नहीं किया। उनकी मेहनत और लगन उनके भविष्य की नींव बनी।
एक दिन स्कूल में, उनके शिक्षक ने पक्षियों की उड़ान के बारे में सवाल पूछा। इस सवाल ने कलाम को गहरे चिंतन में डाल दिया। उन्होंने पक्षियों को घंटों तक देखा और उनकी उड़ान के रहस्य को समझने की कोशिश की। यह छोटी-सी घटना उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, जिसने उनकी रुचि वैमानिकी की ओर मोड़ दी।
कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से भौतिकी और एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद, انہوں ने भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन DRDO और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों के विकास में उनकी भूमिका के लिए उन्हें "मिसाइल मैन ऑफ इंडिया" का सम्मान प्राप्त हुआ।
डॉ. कलाम केवल एक वैज्ञानिक ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी नेता भी थे। 2002 से 2007 तक वे भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे। इस दौरान उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने और शिक्षा के महत्व को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया। उनकी आत्मकथा "Wings of Fire" ने विश्वभर में लाखों लोगों को प्रेरित किया।
27 जुलाई, 2015 को, शिलॉन्ग में भारतीय प्रबंधन संस्थान IIM में छात्रों को व्याख्यान देते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वे इस दुनिया को अलविदा कह गए। लेकिन उनकी शिक्षाएँ, सादगी और सपनों को हकीकत में बदलने की प्रेरणा आज भी जीवित है।
डॉ. कलाम का मानना था कि सपने देखना ही काफी नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने के लिए कड़ी मेहनत और दृढ़ विश्वास भी जरूरी है। उनकी प्रसिद्ध उक्ति, "सपने वो नहीं जो सोते वक्त देखे जाते हैं, सपने वो हैं जो आपको सोने न दें," आज भी युवाओं को प्रेरित करती है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जीवन हमें सिखाता है कि साधारण परिस्थितियों से शुरूआत करने वाला व्यक्ति भी मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच के बल पर असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कर सकता है। उनकी विरासत हमें प्रेरित करती है कि हम अपने सपनों को उड़ान दें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएँ।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!






