12 July AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢








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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

12 जुलाई – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 12 जुलाई है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
समय और भाग्य पर कभी अहंकार मत करो क्योंकि ये दोनों परिवर्तनशील है।
"Never be arrogant about time and destiny, because both are subject to change."

कभी भी समय और भाग्य पर अहंकार या गर्व नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये दोनों हमेशा एक जैसे नहीं रहते। आज जो अच्छा समय है, वह कल बदल सकता है, और जो भाग्य साथ दे रहा है, वह पलट भी सकता है।

इसलिए हमें विनम्र और समझदार बने रहना चाहिए, क्योंकि जीवन में परिवर्तन ही स्थायी है। यह सुविचार हमें विनम्रता, धैर्य, और समझदारी का पाठ सिखाता है।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: DISRUPTION: व्यवधान: इसका मतलब किसी प्रणाली, प्रक्रिया या घटना के सामान्य रूप से चलने में बाधा उत्पन्न करना होता है।

उदाहरण के लिए: तेज बारिश ने यातायात में व्यवधान पैदा कर दिया। The heavy rain caused disruption to traffic.

🧩 आज की पहेली
रात को नभ में चमका करता, जैसे चाँदी की इक थाली, चोर उचक्के लूट न पावें, लौटें हरदम खाली।
जवाब: चंद्रमा
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 12 जुलाई की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 100 ई.पू. – प्रसिद्ध रोमन सैन्य और राजनीतिक नेता जूलियस सीज़र का जन्म रोम में हुआ।
  • 1674 – छत्रपति शिवाजी महाराज ने ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ पुरंदर संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • 1823 – भारत में निर्मित पहला वाष्प जहाज "डायना" का कलकत्ता अब कोलकाता में अनावरण हुआ। यह भारत में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
  • 1862 – "मेडल ऑफ ऑनर", जो अमेरिका का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, पहली बार स्थापित किया गया।
  • 1912 – "क्वीन एलिजाबेथ" अमेरिका में प्रदर्शित होने वाली पहली विदेशी फिल्म बनी।
  • 1930 – पंडित जवाहरलाल नेहरू ने नमक सत्याग्रह के समर्थन में महत्वपूर्ण भाषण दिया, जिससे भारत का स्वतंत्रता आंदोलन और तेज़ हुआ।
  • 1949 – महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS पर लगा प्रतिबंध सशर्त हटाया गया।
  • 1997 – मलाला यूसुफजई, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और बालिका शिक्षा की समर्थक, का जन्म पाकिस्तान के स्वात घाटी में हुआ।
  • 2001 – भारत और बांग्लादेश के बीच "मैत्री बस सेवा" की शुरुआत हुई, जिसने दोनों देशों के बीच जनसंपर्क और व्यापार को प्रोत्साहित किया।
  • हर वर्ष 12 जुलाई – पेपर बैग दिवस मनाया जाता है। यह दिन 1852 में फ्रांसिस वोले द्वारा पेपर बैग बनाने की मशीन के आविष्कार की याद में मनाया जाता है।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – मलाला यूसुफ़ज़ई

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे "मलाला यूसुफ़ज़ई" के बारे में।

मलाला यूसुफ़ज़ई एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व और बालिका शिक्षा की सशक्त आवाज़ हैं। उनका जन्म 12 जुलाई 1997 को पाकिस्तान के स्वात घाटी में हुआ। बचपन से ही मलाला पढ़ाई को लेकर बहुत उत्साही थीं। उनके पिता ज़ियाउद्दीन यूसुफ़ज़ई स्वयं एक शिक्षक और शिक्षा के समर्थक थे, जिनका प्रभाव मलाला पर गहरा पड़ा।

2009 में, जब तालिबान ने पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाना शुरू किया, तो मलाला ने साहसपूर्वक लड़कियों के शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज़ उठाई। उन्होंने बीबीसी उर्दू के लिए गुप्त रूप से एक डायरी लिखनी शुरू की, जिसमें उन्होंने तालिबान के अत्याचारों और स्कूली जीवन के डरावने अनुभवों को साझा किया।

9 अक्टूबर 2012 को तालिबान ने मलाला को एक स्कूल बस में गोली मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। लेकिन उनकी हिम्मत और संघर्ष की भावना ने उन्हें मौत से जीत दिलाई। इलाज के बाद वे इंग्लैंड चली गईं और वहीं से उन्होंने अपने मिशन को और व्यापक रूप दिया।

मलाला ने शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए "मलाला फंड" की स्थापना की, जो दुनियाभर की लड़कियों को स्कूल और शिक्षा से जोड़ने का काम करता है। वर्ष 2014 में, उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह यह पुरस्कार पाने वाली सबसे युवा व्यक्ति बनीं।

आज मलाला पूरी दुनिया में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों, शांति, और समानता की प्रतीक बन चुकी हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि एक अकेली आवाज़ भी दुनिया बदल सकती है, बशर्ते उसमें साहस, सच्चाई, और दृढ़ संकल्प हो।

🎉 आज का दैनिक विशेष – पेपर बैग दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 12 जुलाई को मनाये जाने वाले "पेपर बैग दिवस" के बारे में:

12 जुलाई को हर साल पेपर बैग दिवस Paper Bag Day मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को प्लास्टिक के उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करना और उन्हें कागज़ के थैलों के उपयोग के लिए प्रेरित करना है।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे हम छोटे-छोटे कदमों से पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। पेपर बैग दिवस को मनाने की प्रेरणा 1852 में फ्रांसिस वोले द्वारा पेपर बैग बनाने की मशीन के आविष्कार से जुड़ी है।

आज प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। प्लास्टिक सैकड़ों वर्षों तक नष्ट नहीं होता और यह ज़मीन, जल, और समुद्री जीवन को भारी नुकसान पहुँचाता है। इसके विपरीत, पेपर बैग पूरी तरह से प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल होते हैं, जो पर्यावरण को हानि नहीं पहुँचाते।

पेपर बैग दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि अगर हम प्लास्टिक की जगह कागज़ या कपड़े के बैग का इस्तेमाल करें, तो हम धरती को प्रदूषण से बचा सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ भविष्य बना सकते हैं।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – बुद्धिमानी की जीत

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "बुद्धिमानी की जीत"

सुल्तान इस्माइल आदिलशाह को आशंका थी कि विजयनगर सम्राट राजा कृष्णदेव राय एक दिन रायचूर और मदकल के क्षेत्रों को वापस लेने के लिए बीजापुर पर आक्रमण कर सकते हैं। इस संकट से बचने के लिए उसने एक षड्यंत्र रचा—राजा कृष्णदेव राय की हत्या करवा देने का।

इस कार्य के लिए सुल्तान ने तेनालीराम के पुराने सहपाठी और दूर के संबंधी कनकराजू को बड़ी धनराशि का लालच देकर तैयार किया। कनकराजू ने तेनालीराम से मित्रता का बहाना किया और उसके घर आकर ठहर गया। तेनालीराम ने उसे सच्चे मित्र की तरह अपनाया और आदर-सत्कार किया।

एक दिन तेनालीराम जब कहीं बाहर गया हुआ था, तब कनकराजू ने राजा को तेनालीराम के नाम से झूठा संदेश भेजा: "महाराज, कृपया अभी मेरे घर पधारें। मैं आपको एक ऐसी अनोखी वस्तु दिखाऊँगा, जो आपने पहले कभी न देखी हो।"

राजा कृष्णदेव राय, तेनालीराम पर विश्वास करते हुए, बिना किसी अंगरक्षक के उसके घर पहुंच गए। जैसे ही वे भीतर आए, कनकराजू ने छिपे हुए छुरे से वार करने का प्रयास किया। लेकिन राजा सतर्क थे—उन्होंने उसकी कलाई कसकर पकड़ ली। उसी समय पीछे से आए अंगरक्षकों ने कनकराजू को पकड़ लिया और वहीं मार डाला।

हालाँकि तेनालीराम निर्दोष था, पर राज्य के नियम स्पष्ट थे—राजा पर हमले के दोषी को शरण देने वाले को भी मृत्युदंड दिया जाता था। तेनालीराम को यह दंड सुनाया गया। उसने हाथ जोड़कर राजा से दया की प्रार्थना की।

राजा ने कहा, "मैं कानून से ऊपर नहीं हूँ, तेनालीराम। फिर भी, मैं तुम्हें यह अधिकार देता हूँ कि तुम अपनी मृत्यु का तरीका स्वयं चुन लो।" तेनालीराम ने विनम्रता से उत्तर दिया, "महाराज, यदि अनुमति हो तो मैं 'बुढ़ापे से मरने' की मृत्यु चाहता हूँ।"

सभी दरबारी हतप्रभ रह गए। राजा कुछ क्षण सोचते रहे, फिर हँसते हुए बोले, "तेनालीराम, तुम एक बार फिर अपनी चतुराई से मृत्यु को मात दे गए। तुम्हें क्षमा किया जाता है, लेकिन याद रखो—हर बार चालाकी तुम्हें नहीं बचा सकती।"

इस घटना ने तेनालीराम को गहराई से झकझोर दिया। कनकराजू का विश्वासघात उसे हमेशा याद रहा। उसने संकल्प लिया कि आगे से किसी पर आँख मूँदकर विश्वास नहीं करेगा, चाहे वह कोई भी क्यों न हो।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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