सुप्रभात बालमित्रों!
12 अप्रैल – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 12 अप्रैल है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"यदि आप सात बार गिरते हैं, तो आठ बार खड़े हों!"
"If you fall seven times, stand up eight!"
जीवन में गिरना यानी असफल होना स्वाभाविक है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि हर बार उठकर फिर कोशिश करो। एक बार और प्रयास करो – अगर सात बार असफल हुए, तो आठवीं बार उठकर संघर्ष जारी रखो। यानी, हार न मानो।
दृढ़ता सफलता की कुंजी है – सफल लोग वही होते हैं जो मुश्किलों के बावजूद लगातार प्रयास करते रहते हैं। एक बच्चा चलना सीखते समय बार-बार गिरता है, लेकिन हर बार उठकर फिर कोशिश करता है। थॉमस एडिसन ने बल्ब बनाने से पहले हजारों बार असफलता देखी, लेकिन हार नहीं मानी। "गिरना कोई समस्या नहीं, बिना उठे रह जाना समस्या है।"
अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: WAREHOUSE : वेयरहाउस का हिंदी अर्थ "गोदाम" या "भंडारगृह" होता है, जहाँ सामानों को भंडारित (Store) किया जाता है। वेयरहाउस/गोदाम किसी भी व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
उदाहरण वाक्य: The warehouse was full of boxes and machinery. भंडारगृह में बक्सों और मशीनों का ढेर लगा हुआ था।
बोलो भैया साथ ले गये क्यों मेरी घरवाली।
उत्तर – ताला
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 12 अप्रैल की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1961 – सोवियत संघ ने यूरी गगारिन को अंतरिक्ष में भेजा, जो अंतरिक्ष में जाने वाले पहले मानव बने।
- 1981 – अंतरिक्ष शटल कोलंबिया (STS-1) का सफल प्रक्षेपण हुआ, जिसमें जॉन यंग और रॉबर्ट क्रिपेन सवार थे। यह पहला पुन:प्रयोज्य अंतरिक्ष यान था।
- 1955 – डॉ. जोनास साल्क द्वारा विकसित पोलियो वैक्सीन (IPV) को आधिकारिक तौर पर लाइसेंस मिला, जिससे पोलियो उन्मूलन में बड़ी सफलता मिली।
- 1885 – राखलदास बनर्जी (मोहनजोदड़ो की खोज करने वाले प्रसिद्ध पुरातत्वविद्) का जन्म हुआ।
- 1923 – कैंडरस्टेग इंटरनेशनल स्काउट सेंटर (KISC) की स्थापना हुई, जो युवाओं के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एकता को बढ़ावा देने वाला प्रमुख केंद्र बना।
डॉ. जोनास साल्क एक अमेरिकी चिकित्सक और वैज्ञानिक थे, जिन्होंने दुनिया का पहला सुरक्षित और प्रभावी पोलियो वैक्सीन विकसित कर लाखों बच्चों को इस भयानक बीमारी से बचाया। उनका जन्म 28 अक्टूबर, 1914 को न्यूयॉर्क में हुआ था। उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से मेडिसिन की पढ़ाई की और वायरोलॉजी में गहरी रुचि विकसित की।
1950 के दशक में, पोलियो (पोलियोमाइलाइटिस) एक वैश्विक महामारी थी, जिससे हर साल हजारों बच्चे लकवाग्रस्त हो जाते थे। साल्क ने निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (IPV) का आविष्कार किया, जिसे 12 अप्रैल, 1955 को आधिकारिक मान्यता मिली। यह टीका सुरक्षित था और इसने पोलियो के खिलाफ एक क्रांति ला दी।
साल्क ने अपना वैक्सीन पेटेंट नहीं करवाया, ताकि यह सस्ती और सभी को उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा, "क्या सूरज को भी पेटेंट करवाया जा सकता है?" उनके इस निस्वार्थ योगदान के कारण दुनिया भर में पोलियो का प्रसार काफी कम हो गया। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में उन्होंने एड्स वैक्सीन पर भी शोध किया। 23 जून, 1995 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी करोड़ों लोगों की जिंदगी बचा रही है। डॉ. साल्क ने साबित किया कि विज्ञान का सच्चा उद्देश्य मानवता की सेवा करना है।
अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 12 अप्रैल को मनाये जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस” के बारे में: 12 अप्रैल को पूरी दुनिया में "अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस" (International Day of Human Space Flight) मनाया जाता है। यह दिन मानवता के अंतरिक्ष अन्वेषण में ऐतिहासिक उपलब्धियों को समर्पित है।
इसी दिन 1961 में सोवियत कॉस्मोनॉट यूरी गगारिन ने वोस्तोक-1 अंतरिक्ष यान से पहली बार अंतरिक्ष में उड़ान भरी और पृथ्वी की कक्षा का चक्कर लगाया। उनका यह सफर 108 मिनट का था, जिसने मानव इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा। ठीक 20 साल बाद, 12 अप्रैल 1981 को NASA ने पहला पुन:प्रयोज्य अंतरिक्ष शटल "कोलंबिया" (STS-1) लॉन्च किया, जिसमें जॉन यंग और रॉबर्ट क्रिपेन सवार थे।
2011 में, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 12 अप्रैल को "अंतर्राष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान दिवस" घोषित किया, ताकि अंतरिक्ष विज्ञान में मानवता की उपलब्धियों को सलाम किया जाए और भविष्य की अंतरिक्ष खोजों के लिए प्रेरणा दी जाए। इस दिन विज्ञान संग्रहालयों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन ISRO, NASA, Roscosmos जैसी अंतरिक्ष एजेंसियाँ अपने मिशनों की जानकारी साझा करती हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि अंतरिक्ष अन्वेषण मानव जाति की साझी विरासत है, जो हमें एकता, जिज्ञासा और साहस की भावना से जोड़ता है।
एक समय की बात है, एक बुद्धिमान किसान अमरसेन अपने चार बेटों और बहुओं के साथ रहता था। वृद्धावस्था में उसने अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी चुनने का निर्णय लिया। एक दिन उसने सभी को बुलाकर प्रत्येक को पाँच-पाँच गेहूं के दाने दिए और कहा, "मैं तीर्थयात्रा पर जा रहा हूँ। चार वर्ष बाद लौटूंगा। जो इन दानों की सर्वोत्तम देखभाल करेगा, उसे ही मेरी सारी संपत्ति मिलेगी।"
पहला बेटा और बहू जो आलसी और लापरवाह थे उन्होंने सोचा, "चार साल बाद कौन गिनेगा? हम तो बड़े हैं, संपत्ति हमारी ही होगी!" उन्होंने दाने फेंक दिए।
दूसरा बेटा और बहू जो स्वार्थी थे उन्होंने कहा, "इन्हें संभालना कठिन है। खा लेते हैं, शायद पिताजी खुश हो जाएँ!" उन्होंने दाने खा लिए।
तीसरा बेटा और बहू जो धार्मिक पर निष्क्रिय थे उन्होंने सोचा, "हम इन्हें मंदिर में रख देते हैं। भगवान इनकी रक्षा करेंगे!" दाने मंदिर में पड़े-पड़े सड़ गए।
चौथा बेटा और बहू जो बुद्धिमान और मेहनती थे उन्होंने दानों को जमीन में बो दिया। समय के साथ पाँच दाने पचास बोरियों में बदल गए। जब अमरसेन लौटे तो उन्होंने चौथे बेटे को ही अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
इस कहानी से हमें संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, दूरदर्शिता से योजना बनाना, ईमानदारी से जिम्मेदारी निभाना और मेहनत के महत्व को समझने की महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं - यह हमें सिखाती है कि छोटी से छोटी वस्तु का सदुपयोग करके भी बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है। अंततः सच्ची संपत्ति धन नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता, परिश्रम और सत्यनिष्ठा ही होती है।
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!
निर्माता : प्रेम वर्मा, PS बैजनाथपुर जमुनहा







