10 November AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢







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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

10 नवम्बर – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
         आज 10 नवम्बर है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से: कभी-कभी बुरा वक़्त हमें कुछ अच्छे लोगों से मिलवाने के लिए आता है।
Sometimes, bad time comes to make us meet with some special people.

कभी-कभी हमारे सामने जीवन में कठिनाइयाँ और बुरा समय भी आता है। लेकिन यह समय हमें कुछ खास लोगों से मिलवाता है, जो हमारे जीवन को बदल देते हैं और हमें नई दिशा दिखाते हैं। जब हम कठिनाइयों का सामना करते हैं, तो हमें ऐसा लगता है कि सब कुछ उल्टा हो रहा है और हम अकेले हैं। लेकिन यही समय हमें उन लोगों से मिलवाता है जो वास्तव में हमारे लिए खास होते हैं। ऐसे लोग हमारे जीवन में आते हैं और हमें समर्थन, प्रेरणा और सच्ची दोस्ती देते हैं। वे हमारे साथ खड़े रहते हैं और हमें कठिनाइयों का सामना करने में मदद करते हैं। कठिनाइयाँ हमें मजबूत बनाती हैं और हमें सिखाती हैं कि हम किस पर भरोसा कर सकते हैं। यह समय हमें दिखाता है कि हमारे सच्चे मित्र कौन हैं और कौन हमारी मदद के लिए तत्पर हैं। इस प्रकार, बुरा समय केवल कठिनाइयाँ ही नहीं लाता, बल्कि वह हमें अच्छे और खास लोगों से मिलवाता है जो हमारे जीवन को सार्थक बनाते हैं।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: Assemble असेंबल = इकट्ठा करना, एकत्र करना, जुटाना या किसी वस्तु या लोगों को एक स्थान पर इकट्ठा करना या जोड़ना।

वाक्य प्रयोग: The teacher asked the students to assemble in the playground.शिक्षक ने छात्रों को खेल मैदान में इकट्ठा होने को कहा।

🧩 आज की पहेली
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :  एक पैर की काली धोती, जाड़े में हूँ हरदम सोती, गर्मी में हूँ छाया देती वर्षा में हूँ हरदम रोती।
उत्तर - छतरी
📜 आज का इतिहास

v  अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 10 नवम्बर की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1483: जर्मनी के ईसाई धर्मशास्त्री और सुधारक मार्टिन लूथर का जन्म Eisleben, Germany में हुआ। उन्होंने 1517 में 95 Theses प्रकाशित कर कैथोलिक चर्च की प्रथाओं को चुनौती दी। वे Protestant Reformation के प्रमुख नेता बने, जिससे यूरोपीय धार्मिक और सामाजिक इतिहास में बड़ा परिवर्तन आया।
  • 1848: भारतीय राष्ट्रवादी नेता सुरेंद्रनाथ बनर्जी का जन्म 10 नवंबर 1848 को कोलकाता में हुआ। वे Indian National Congress के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और ‘Indian Association’ के संस्थापक भी। उन्होंने सिविल सेवा सुधार और स्वशासन के लिए आवाज़ उठाई तथा स्वतंत्रता संग्राम में बौद्धिक प्रेरणा दी।
  • 1885: जर्मन इंजीनियर गोट्लिब डैमलर Gottlieb Daimler ने दुनिया की पहली मोटरसाइकिल Daimler Reitwagen का सफल परीक्षण किया। यह पेट्रोल इंजन से चलने वाला दो-पहिया वाहन था, जिसने आधुनिक ऑटोमोबाइल उद्योग की नींव रखी।
  • 1919: भारतीय श्रमिक नेता और विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी का जन्म नागपुर में हुआ। वे भारतीय मजदूर संघ (BMS) के संस्थापक थे — जो आज विश्व का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन संगठन है।
  • 1990: समाजवादी नेता चंद्रशेखर ने 10 नवंबर 1990 को भारत के 8वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। यह अल्पमत सरकार थी जो नवंबर 1990 से जून 1991 तक चली। उन्होंने आर्थिक संकट के समय देश का नेतृत्व किया और यह काल भारत में गठबंधन राजनीति की शुरुआत का प्रतीक बना।
  • 1999: बुडापेस्ट हंगरी में आयोजित विश्व विज्ञान सम्मेलन World Conference on Science में UNESCO और ICSU ने हर वर्ष 10 नवंबर को विश्व विज्ञान दिवस World Science Day for Peace and Development मनाने की घोषणा की।
  • 2001: पहली बार यूनेस्को द्वारा विश्व विज्ञान दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य विज्ञान को समाज से जोड़ना, शिक्षा को बढ़ावा देना और शांति, विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए विज्ञान की भूमिका को प्रोत्साहित करना था।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व

v  अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता, समाज सुधारक “सुरेंद्रनाथ बनर्जी” के बारे में।

सुरेंद्रनाथ बनर्जी भारत के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता, समाज सुधारक और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उनका जन्म 10 नवम्बर 1848 को कोलकाता पश्चिम बंगाल में हुआ था। उन्होंने इंग्लैंड जाकर भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की, परंतु नस्लीय भेदभाव के कारण सेवा से हटा दिए गए। इस घटना ने उन्हें राष्ट्रवादी आंदोलन की ओर प्रेरित किया।

1905 के बंगाल विभाजन के विरोध में उन्होंने स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व किया, जिससे राष्ट्रवादी भावना पूरे भारत में फैल गई। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने The Bengalee और The Indian जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से जनजागरण किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अमूल्य था — उन्होंने ‘रिपन कॉलेज’ वर्तमान विद्यासागर कॉलेज की स्थापना की, जिससे बंगाली युवाओं में आधुनिक शिक्षा का प्रसार हुआ।

उन्होंने “इंडियन एसोसिएशन” की स्थापना की, जो स्वतंत्रता आंदोलन के प्रारंभिक संगठनों में से एक थी। सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का आधार माना और युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जागृत की। वे एक कुशल वक्ता और प्रभावशाली लेखक थे, जिनकी पुस्तक “A Nation in Making” भारत के स्वतंत्रता संग्राम का महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जाती है।

सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने अपने जीवन को देश सेवा, सामाजिक सुधार और स्वशासन की स्थापना के लिए समर्पित किया। उन्हें “भारत का आदर्श देशभक्त” कहा जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक नींव रखी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।

👁️ आज का दैनिक विशेष – विश्व टीकाकरण दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे  को मनाये  10 नवम्बर को मनाये जाने वाले “विश्व टीकाकरण दिवस” के बारे में:

हर साल 10 नवंबर को विश्व टीकाकरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य लोगों को टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूक करना और उन्हें आवश्यक जानकारी प्रदान करना है। इस दिन विभिन्न प्रोग्राम और इवेंट आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विशेषज्ञों द्वारा टीकाकरण की जानकारी दी जाती है।

वैक्सीनेशन के जनक एडवर्ड जेनर को माना जाता है, जिन्होंने साल 1796 में 13 साल के एक लड़के को वैक्सीनिया वायरस का टीका लगाया था, जिससे टीकाकरण की परंपरा की शुरुआत हुई।

टीकाकरण मानव इतिहास की सबसे बड़ी चिकित्सा उपलब्धियों में से एक है, जिसने चेचक Smallpox, पोलियो, खसरा, टिटनेस, और काली खाँसी जैसी बीमारियों से करोड़ों लोगों की जान बचाई है। वैक्सीन शरीर में रोगों के प्रति प्रतिरक्षा शक्ति Immunity विकसित करती है, जिससे व्यक्ति सुरक्षित रहता है। इसके अलावा, टीकाकरण गंभीर जटिलताओं और मौत से भी बचाव करता है।

यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि टीकाकरण एक महत्वपूर्ण साधन है, जिससे हम अपने समाज को सुरक्षित और स्वस्थ बनाकर आने वाली पीढ़ियों को बीमारियों से मुक्त जीवन प्रदान कर सकते हैं। आइए, हम सभी मिलकर इस दिन को सार्थक बनाएं और टीकाकरण के महत्व को समझें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – “असली परोपकार”

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी,  जिसका शीर्षक है: “असली परोपकार”

भीषण गर्मियों का दिन था। स्कूल से लौट रही एक बुज़ुर्ग शिक्षिका बस में सवार हुईं। उनके पैरों में दर्द था, लेकिन बस में खाली सीट न देखकर जैसे-तैसे खड़ी हो गईं। बस ने कुछ दूरी ही तय की थी कि एक उम्रदराज महिला ने बड़े सम्मानपूर्वक उन्हें आवाज़ दी, "आ जाइए मैडम, आप यहाँ बैठ जाएं।” यह कहते हुए उसने उन्हें अपनी सीट पर बैठा दिया और खुद वह साधारण सी दिखने वाली महिला, बस में खड़ी हो गई।

शिक्षिका ने कहा "बहुत-बहुत धन्यवाद, आज मेरी सचमुच बहुत बुरी हालत थी।" इस पर महिला के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान फैल गई।

कुछ देर बाद शिक्षिका के पास वाली सीट खाली हो गई। लेकिन उस महिला ने एक अन्य महिला को, जो एक छोटे बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी, उस सीट पर बिठा दिया। अगले पड़ाव पर वह महिला और बच्चा उतर गए, लेकिन नेकदिल महिला ने खुद बैठने के बजाये एक कमजोर बूढ़े आदमी को उस सीट पर बैठा दिया जो अभी-अभी बस में चढ़ा था।

कुछ दूरी के बाद सीट फिर से खाली हो गई। बस में अब गिनी-चुनी सवारियां ही रह गई थीं। अब उस बुज़ुर्ग शिक्षिका ने महिला को अपने पास बिठाया और पूछा, "सीट कितनी ही बार खाली हुई है लेकिन क्या बात है, आप लोगों को ही बैठाते रही, खुद नहीं बैठीं?"

महिला ने कहा, "मैडम, मैं एक मजदूर हूं और दिनभर खड़ा रहकर मजदूरी करने से ही मेरा जीवन चलता है। इसके साथ ही मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं कुछ दान पुण्य या दूसरा परोपकार का काम कर सकूं। तो मैं बस कभी रास्ते से कूड़ा-करकट उठाकर एक तरफ कर देती हूं, कभी किसी जरूरतमंद को पानी पिला देती हूं, कभी बस में किसी के लिए सीट छोड़ देती हूं। जब सामने वाला मुझे दुआएं देता है तो मैं अपनी गरीबी भूल जाती हूं और दिन भर की थकान दूर हो जाती है। पैसा रुपया न सही, सोचती हूं मुफ्त में दुआएं तो मिल ही जाती हैं ना! और हमें लेकर भी क्या जाना है यहां से।"

शिक्षिका अवाक रह गईं, एक अनपढ़ सी दिखने वाली महिला इतना बड़ा पाठ जो पढ़ा गई थी उसे। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची समृद्धि और संतोष दया, परोपकार, और दूसरों के लिए किये त्याग में निहित होती है।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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