10 July AbhyudayVani अभ्युदयवाणी 🎙️📢








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आज की अभ्युदय वाणी


सुप्रभात बालमित्रों!

10 जुलाई – प्रेरणादायक ज्ञान यात्रा

सुप्रभात बालमित्रों!
आज 10 जुलाई है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।

✨ आज का प्रेरणादायक सुविचार

तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु अज्ञान नहीं है, बल्कि ज्ञान का मिथ्याभास है।"
"The greatest enemy of knowledge is not ignorance; it is the illusion of knowledge."

अज्ञानता तो ज्ञान की अनुपस्थिति है, परन्तु ज्ञान का मिथ्याभास ज्ञान के नाम पर भ्रम फैलाता है। अज्ञानता हमें सीखने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है, जबकि ज्ञान का मिथ्याभास हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम सब कुछ जानते हैं, जिससे हम नई चीजें सीखने और अपनी गलतियों को सुधारने से रुक जाते हैं।

ज्ञान का मिथ्याभास कई रूपों में हो सकता है, जैसे: अंधविश्वास, पक्षपात, अहंकार या नई जानकारी या विचारों को स्वीकार करने का डर। ज्ञान का मिथ्याभास से बचने के लिए, हमें सदा जिज्ञासु और खुले विचारों वाले रहना चाहिए। हमें हमेशा नई जानकारी और विचारों के लिए तैयार रहना चाहिए, और अपनी धारणाओं और विश्वासों को लगातार जांचते रहना चाहिए।

📘 आज का अंग्रेजी शब्द

अभ्युदयवाणी में अब जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द जो है: CAMPING: कैंपिंग: कैंपिंग, जिसे शिविरवास या बहिर्वास भी कहा जाता है, प्रकृति के बीच खुले में रहने और जीवन का अनुभव करने की एक रोमांचक गतिविधि है जो आपको शहर की भागदौड़ से दूर, शांत और स्वस्थ वातावरण में ले जाती है।

🧩 आज की पहेली
गोल है पर गेंद नहीं, पूंछ है पर पशु नहीं, पूंछ पकड़कर खेले बच्चे, फिर भी उसकी आँसू न निकलें।
जवाब: गुब्बारा
📜 आज का इतिहास

अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 10 जुलाई की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।

  • 1800 – लॉर्ड वेलेजली ने कोलकाता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की। इसका उद्देश्य ब्रिटिश अधिकारियों को भारतीय भाषाओं और संस्कृति से परिचित कराना था।
  • 1806 – वेल्लोर विद्रोह: वेल्लोर किले में भारतीय सिपाहियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया। यह ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय सैनिकों के पहले बड़े विद्रोहों में से एक था।
  • 1856 – महान वैज्ञानिक और आविष्कारक निकोला टेस्ला का जन्म हुआ। उन्होंने AC विद्युत प्रणाली, प्रेरण मोटर और रेडियो सहित कई महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास किया।
  • 1857 – प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान नाना साहेब और तात्या टोपे ने कानपुर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह को और तेज किया।
  • 1925 – सोवियत संघ में आधिकारिक समाचार एजेंसी TASS की स्थापना हुई।
  • 1947 – भारत की स्वतंत्रता से पहले, संविधान सभा में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को अपनाने पर चर्चा शुरू हुई। 22 जुलाई को इसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया।
  • 1962 – अमेरिका ने पहला संचार उपग्रह Telstar लॉन्च किया, जिसने वैश्विक संचार में क्रांति ला दी।
🌟 आज के प्रेरक व्यक्तित्व – निकोला टेस्ला

अभ्युदय वाणी की अगली कड़ी प्रेरक व्यक्तित्व में आज हम जानेंगे महान वैज्ञानिक और आविष्कारक "निकोला टेस्ला" के बारे में।

निकोला टेस्ला एक महान वैज्ञानिक, आविष्कारक, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, मैकेनिकल इंजीनियर और भौतिक विज्ञानी थे, जिनका जन्म 10 जुलाई 1856 को वर्तमान क्रोएशिया में हुआ था। वे सर्बियाई मूल के अमेरिकी नागरिक थे और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के इतिहास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

टेस्ला को प्रत्यावर्ती धारा AC विद्युत प्रणाली के विकास का श्रेय दिया जाता है, जो आज वैश्विक बिजली आपूर्ति का आधार है। उन्होंने टेस्ला कॉइल, पॉलीफेज़ सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोटर, वायरलेस संचार, और रेडियो तकनीक पर भी अमूल्य कार्य किया।

टेस्ला की सोच समय से बहुत आगे की थी—उन्होंने वायरलेस ऊर्जा ट्रांसमिशन, रोबोटिक्स, रेडार, और यहां तक कि फ्री एनर्जी जैसी अवधारणाओं पर भी प्रयोग किए। हालाँकि टेस्ला के जीवन में कई आर्थिक संघर्ष और असफलताएँ थीं, लेकिन उनके विचारों और प्रयोगों ने 20वीं और 21वीं सदी की तकनीकी क्रांति की नींव रखी।

उनकी स्मृति में कई वैज्ञानिक संस्थाएँ, पुरस्कार और यहां तक कि "टेस्ला" नाम की इलेक्ट्रिक कार कंपनी भी स्थापित की गई है, जो उनके नवाचारों की विरासत को आगे बढ़ा रही है। निकोला टेस्ला आज भी विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं।

🎉 आज का दैनिक विशेष – विश्व ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस

अभ्युदय वाणी के दैनिक विशेष में अब हम जानेंगे 10 जुलाई को मनाये जाने वाले "विश्व ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस" के बारे में:

विश्व ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस यानी World Energy Independence Day हर साल 10 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन ऊर्जा सुरक्षा और स्वतंत्रता के महत्व पर जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। इस दिवस की स्थापना निकोलस जेनकिंस नामक एक ऊर्जा विशेषज्ञ और पर्यावरणविद् ने वर्ष 2012 में की थी।

इसका उद्देश्य था लोगों को स्वच्छ, नवीकरणीय और आत्मनिर्भर ऊर्जा स्रोतों की ओर जागरूक करना और ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देना। यह दिन देशों को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विदेशी ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

यह दिन स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर जोर देता है, जो जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद करता है। वैश्विक ऊर्जा स्वतंत्रता दिवस का उद्देश्य ऊर्जा के नवीकरणीय और टिकाऊ स्रोतों, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत और जैव ऊर्जा की ओर बढ़ने के महत्व पर ध्यान आकर्षित करना है।

आइए हम सब मिलकर ऊर्जा स्वतंत्रता के लिए काम करें और एक स्वच्छ, टिकाऊ और समृद्ध भविष्य का निर्माण करें।

📖 आज की प्रेरणादायक बाल कहानी – आपस की फूट

अभ्युदय वाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: "आपस की फूट"

प्राचीन काल में, भारुंड नामक एक विचित्र पक्षी रहता था। उसका एक ही शरीर था, लेकिन दो सिर थे। एक सिर पूर्व की ओर देखता था, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक ही शरीर होने के बावजूद, उनके विचारों में कभी तालमेल नहीं था। वे हमेशा एक दूसरे से झगड़ते रहते थे।

एक दिन, भारुंड भोजन की तलाश में नदी के किनारे घूम रहा था। तभी, एक सिर को नीचे एक स्वादिष्ट फल दिखाई दिया। उसने फल को चखा और बोला, "वाह! मैंने आज तक ऐसा स्वादिष्ट फल कभी नहीं खाया!"

दूसरे सिर ने भी फल चखना चाहा, लेकिन पहले सिर ने उसे धक्का देकर दूर कर दिया और कहा, "यह फल मैंने पाया है, इसे मैं ही खाऊंगा।" दूसरे सिर ने समझाया, "हम एक ही शरीर के हिस्से हैं। हमें चीजें बांटकर खानी चाहिए।"

पहले सिर ने कहा, "फल खाने के बाद पेट भर जाएगा, और पेट तो हमारा एक ही है।" दूसरे सिर ने तर्क दिया, "खाने का मतलब सिर्फ पेट भरना नहीं होता। जीभ का स्वाद भी महत्वपूर्ण होता है।"

पहले सिर ने गुस्से में कहा, "मैंने तुम्हें फल खाने की अनुमति नहीं दी है। फल खाने के बाद जो डकार आएगी, वो तुम्हारे मुंह से भी निकलेगी। मुझे शांति से फल खाने दो।" ऐसा कहकर, पहले सिर ने फल खाना शुरू कर दिया।

दूसरे सिर ने बदला लेने की ठान ली। कुछ दिनों बाद, उसे एक और फल मिला। वह फल खाने ही वाला था कि पहले सिर ने चिल्लाकर कहा, "यह फल ज़हरीला है! इसे खाने से मौत हो सकती है!"

दूसरे सिर ने हंसते हुए कहा, "तुम्हें क्या मतलब है कि मैं क्या खा रहा हूं?" पहले सिर ने समझाया, "अगर तुमने यह फल खा लिया, तो हम दोनों मर जाएंगे।" लेकिन दूसरा सिर बदला लेने के चक्कर में इतना अंधा हो चुका था कि उसने सारी बातें अनसुनी कर दीं और पूरा फल खा लिया।

फल का ज़हर जल्दी ही फैल गया और भारुंड तड़प-तड़प कर मर गया। ये कहानी हमें सिखाती है कि आपसी फूट और कटुता हमेशा विनाशकारी होती है। एकता में ही शक्ति है। हमें एक दूसरे के प्रति सहानुभूति और समझदारी रखनी चाहिए, ताकि हम मिलकर खुशहाल जीवन जी सकें।

🚂 आज की अभ्युदय वाणी का समापन

आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!

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