सुप्रभात बालमित्रों!
10 जनवरी – ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सफ़र
सुप्रभात बालमित्रों!
आज 10 जनवरी है, और अभ्युदय वाणी की रेलगाड़ी एक बार फिर से आपको ले चलने के लिए तैयार है, आज के रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक अद्भुत यात्रा में, जहाँ हम नए विचारों से प्रेरित होंगे, नई जानकारी हासिल करेंगे, और जीवन के मूल्यों को समझेंगे।
तो, आइए, इस सफर की शुरुआत करते हैं, आज के प्रेरणादायक सुविचार से:
"विवादों से घिरे बहुत कुछ की तुलना में संतोषयुक्त बहुत कम अच्छा है।"
"Better a little with contentment than a lot with contention."
यह कथन हमें सादगी और संतोष के महत्व को दर्शाता है। जीवन में संतोष और शांति की तुलना में विवादों और संघर्षों से घिरा हुआ बहुत कुछ पाने का कोई अर्थ नहीं है। संतोष से भरा छोटा जीवन, विवादों और संघर्षों से भरे बड़े जीवन की तुलना में कहीं अधिक मूल्यवान और सुखद होता है। हमें हमेशा अपने जीवन में संतोष और शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और जानते हैं आज का अंग्रेजी शब्द: JUNCTION: जंक्शन संगम, संधि
जंक्शन का मतलब वह स्थान होता है जहां विभिन्न मार्ग, वस्तुएं या धाराएं एक दूसरे से मिलती हैं। जैसे: जैसे नदियों का संगम, जहां दो नदियां मिलती हैं, या रेलवे जंक्शन, जहां कई रेल मार्ग मिलते हैं।
आगे बढ़ते हैं इस सफर में, और आनंद लेते हैं आज की पहेली का :
जवाब : दर्पण
अब अगला स्टेशन है आज का इतिहास: इतिहास हमें अतीत से सीखने और वर्तमान को बेहतर बनाने का मौका देता है। आइए इतिहास के पन्नों में आज 10 जनवरी की कुछ प्रमुख घटनाओं पर नज़र डालें।
- 1863: लंदन के फोलेन स्ट्रीट में दुनिया का पहला भूमिगत रेलवे अंडरग्राउंड मेट्रो खुला, जो आधुनिक शहरी परिवहन का प्रतीक बना।
- 1920: प्रथम विश्व युद्ध के बाद लीग ऑफ नेशंस यानी राष्ट्रसंघ की स्थापना हुई। इसका मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना था। यह संगठन जनरल असेंबली और काउंसिल के माध्यम से कार्य करता था, जिसमें सदस्य राष्ट्र एक साथ मिलकर विभिन्न मुद्दों पर निर्णय लेते थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, लीग ऑफ़ नेशन्स को समाप्त कर दिया गया और उसकी जगह संयुक्त राष्ट्र ने ले ली।
- 1946: लंदन में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली बैठक में 51 राष्ट्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- 1975: पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर में आयोजित हुआ था, जिसकी स्मृति में यह दिन मनाया जाता है।
- 2006: हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने की घोषणा हुई। यह दिवस 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी के पहले भाषण की याद दिलाता है और हिंदी को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का प्रतीक है।
- 2008: ऑटो एक्सपो में टाटा ने सस्ती कार नैनो को प्रदर्शित किया, जिसे "लाखों के लिए लाखों" के नारे के साथ दुनिया की सबसे सस्ती कार के रूप में पेश किया गया।
अब हम जानेंगे आज के प्रेरक व्यक्तित्व 'डॉ जॉन मथाई’ के बारे में।
डॉ जॉन मथाई भारत के शिक्षाविद, अर्थशास्त्री और न्यायविद थे। उनका जन्म 10 जनवरी 1886 को त्रिवेंद्रम में एक धनी परिवार में हुआ था। उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से बीए और बीएल की डिग्रियाँ प्राप्त कीं और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से बी लिट् और लंदन विश्वविद्यालय से डीएस-सी की डिग्री हासिल की।
1910 से 1918 तक वे मद्रास हाईकोर्ट के वकील रहे और 1920 से 1925 तक मद्रास के प्रेजीडेंसी कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर थे। वे मद्रास लेजिस्लेटिव कौंसिल और इंडियन टैरिफ बोर्ड के सदस्य भी रहे। 1935 में वे कामर्शियल इंटेलिजेंस और स्टैटिस्टिक्स के महा निदेशक नियुक्त हुए।
1944 से 1946 तक टाटा संस लिमिटेड के निदेशक रहने के बाद भारत आज़ाद होने के बाद वे केंद्र में परिवहन मंत्री बने। उन्होंने 1950 तक वित्त मंत्री का कार्यभार संभाला और फिर पुनः टाटा संस लिमिटेड के निदेशक बने। 1955 से 1956 तक भारतीय स्टेट बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अध्यक्ष रहे और मुंबई विश्वविद्यालय और केरल विश्वविद्यालय के उपकुलपति भी रहे। 1959 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मविभूषण से सम्मानित किया।
उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं:
विलेज गवर्नमेंट इन ब्रिटिश इंडिया
ऐग्रीकलचरल कोआपरेशन इन इंडिया
एक्साइज ऐंड लिकर कंट्रोल
डॉ जॉन मथाई का निधन फरवरी 1959 में हुआ।
आज के दैनिक विशेष में हम जानेंगे 10 जनवरी को मनाये जाने वाले “विश्व हिंदी दिवस” के बारे में:
विश्व हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्वभर में हिंदी भाषा को प्रोत्साहित करना और इसके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। इस दिवस को पहली बार 2006 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने घोषित किया था।
इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा की विश्वव्यापी पहचान को बढ़ाना, विदेशों में हिंदी भाषी समुदाय के बीच सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को मजबूत करना तथा हिंदी साहित्य और भाषा के महत्व को समझाना और हिंदी के अध्ययन को प्रोत्साहित करना।
इस दिन, विभिन्न देशों में भारतीय दूतावास और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा हिंदी भाषा से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसमें हिंदी कविताएँ, लेखन प्रतियोगिताएँ, निबंध प्रतियोगिताएँ, हिंदी फिल्म समारोह, और साहित्यिक संगोष्ठियों का आयोजन होता है।
विश्व हिंदी दिवस हिंदी भाषा और उसकी सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमारी मातृभाषा हमारी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और हमें गर्व होना चाहिए कि हम हिंदी बोलते हैं।
अभ्युदयवाणी के अंतिम पड़ाव पर अब सुनते हैं आज की प्रेरणादायक बाल कहानी, जिसका शीर्षक है: शिक्षा का चमत्कार
कक्षा का एक छात्र रोहन रातोरात अमीर बनना चाहता था। उसके पिता बहुत गरीब थे। अमीर बनने के लिए वह साधुओं और बाबाओं के चक्कर में पड़ा रहता, जो उपाय वो बताया करते। वह वैसा ही करता, लेकिन कोई चमत्कार न होता। वह सोचता कि कहीं कमी रह गई होगी। एक न एक दिन चमत्कार जरूर होगा और वह अमीर बन जाएगा।
यह सब देखकर एक दिन उसके दोस्त श्रेयस ने कहा, "मेरे एक काका हैं, जो अमीर बनने का एक ऐसा चमत्कार जानते हैं, जो आज तक असफल नहीं हुआ है। ऐसा चमत्कार जो हमेशा होता देखा है लोगों ने। शत-प्रतिशत आजमाया हुआ। तू कहे तो तुझे भी मिलवा दूं?" रोहन खुश होकर श्रेयस के साथ चल दिया। श्रेयस के काका की आलीशान कोठी देखकर रोहन हैरान रह गया। पता चला कि ये शहर के नामी-गिरामी अधिवक्ता (वकील) हैं। श्रेयस की बात सुनकर पहले तो काका हंसे, फिर बोले, "बिलकुल, ये चमत्कार हो सकता है। बल्कि मैंने ही कर दिखाया है। मेरे पिता भी गरीब मजदूर थे और आज तुम देख ही रहे हो। चमत्कार करना तुम्हारे हाथ में है। बोलो, करोगे?"
"हाँ, क्या करना होगा?"
"तो सुनो।" थोड़ा गंभीर होते हुए काका जी ने कहा, "उस चमत्कार का नाम है शिक्षा। शिक्षा का जादू कभी भी असफल नहीं हुआ है। मैं गरीब पिता का पुत्र था। मैंने अपनी पूरी मेहनत शिक्षा में लगा दी। पढ़-लिखकर अधिवक्ता बना। कानून की ऊँची-ऊँची डिग्रियाँ प्राप्त कीं। आज मैं एक-एक पेशी के 5-5 हजार रुपए लेता हूँ। मेरा एक गरीब मित्र था, जो आज डॉक्टर बन गया। आज वह एक ऑपरेशन के लाख-लाख रुपए लेता है। जिसमें तुम्हारी रुचि हो, उसमें तुम भी सफल हो सकते हो। इंजीनियर बन सकते हो, कम्प्यूटर विशेषज्ञ बन सकते हो, तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर सकते हो। शिक्षा इंसान को क्या से क्या बना देती है। एक सामान्य आदमी से खास आदमी बना सकती है। पैसा ही नहीं, इज्जत और प्रतिष्ठा भी दिला सकती है।"
"पढ़-लिखकर अपने अंदर इतनी योग्यता पैदा करो, फिर तुम्हें वो सब मिल जाएगा, जो तुम चाहते हो। मन लगाकर पढ़ो, एक दिन चमत्कार अवश्य होगा।"
आज की अभ्युदय वाणी का सफ़र बस यहीं तक था, कल सुबह फिर मिलेंगे एक नई ऊर्जा के साथ रोमांचक, ज्ञानवर्धक और नैतिक शिक्षा से भरपूर एक रोचक सफ़र में। आपका दिन शुभ हो!







